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भगोड़े गुफा में छुप गए.
अनुवाद: चारुमति रामदास
अब क्या करें? भाग जाएँ? मगर पट्टियां बंधा हुआ अर्तेमोन गहरी नींद सो रहा था. कुत्ते को चौबीस घंटे सोना चाहिए था, ताकि उसके घाव भर जाएं.
क्या भले कुत्ते को गुफ़ा में अकेला छोड़ दिया जाए?
नहीं, नहीं, बचना है – तो सबको एक साथ, मरना है – तो सबको एक साथ...
बुरातिनो, प्येरो और मल्वीना, गुफ़ा की गहराई में, अपनी नाकें नीची किये, बड़ी देर तक विचार विमर्श करते रहे. ये फैसला किया : सुबह तक यहीं इंतज़ार किया जाए, गुफ़ा के प्रवेश द्वार को टहनियों से ढांक दिया जाए और जडी-बूटी से ठीक होने के लिए अर्तेमोन को पौष्टिक काढ़ा दिया जाए. बुरातिनो ने कहा:
“चाहे कुछ भी हो जाए, मैं कराबास बराबास से ये जानना चाहता हूँ, कि वो दरवाज़ा कहाँ है, जो सुनहरी चाबी से खुलता है. दरवाज़े के पीछे कोई ग़ज़ब की, आश्चर्यजनक चीज़ सुरक्षित रखी हुई है...और वह हमारे लिए खुशनसीबी लायेगी.”
“आपके बगैर रहने में डर लग रहा है, डर लग रहा है,” मल्वीना के कराहते हुए कहा.
“और आपको प्येरो की क्या ज़रुरत है?”
“आह, वह सिर्फ कवितायेँ पढ़ता है...”
“मैं मल्वीना की हिफ़ाज़त करूंगा, शेर की तरह,” प्येरो भर्राई आवाज़ में बोला, जैसे शिकारी बोलते हैं, - “आप मुझे अभी तक नहीं जानते हैं...”
“शाबाश, प्येरो, मुझे बहुत खुशी है!”
और बुरातिनो कराबास बराबास के पीछे भागा.
उसने जल्दी ही उन्हें देख लिया. गुड़ियों के थियेटर का डाइरेक्टर नदी के किनारे पर बैठा था, दुरेमार ने उसके घूमड़ पर औषधी पत्तों का लेप लगा दिया था. दूर से ही कराबास बराबास के खाली पेट में भयानक गड़गड़ाहट ओर औषधीय जोंकों के विक्रेता के खाली पेट में उबाऊ चीखें सुनाई दे रही थीं.
“सिन्योर, हमें कुछ खा-पी लेना चाहिए,” – दुरेमार कह रहा था, “बदमाशों की तलाश देर रात तक खिंच सकती है.”
“मैं तो अभ्भी पूरा सूअर और दो बत्तखें खा जाऊंगा,” कराबास बराबास ने उदास होकर जवाब दिया.
दोस्त “थ्री मिन्नोज़” सराय की तरफ़ चल पड़े – उसका बोर्ड पहाडी पर दिखाई दे रहा था. मगर कराबास बराबास और दुरेमार से भी पहले बुरातिनो वहां पहुँच गया, घास की तरफ़ झुकते हुए, ताकि उसे देख न लें.
सराय के दरवाज़े के पास बुरातिनो दबे पांव एक बड़े मुर्गे की ओर आया, जिसने कोई दाना या मुर्गी की आंत का टुकड़ा पाकर गर्व से अपनी लाल कलगी को झटका, पंजे हिलाए और जोश से मुर्गियों को दावत के लिए बुलाया:
“को-को-को!”
बुरातिनो ने अपनी हथेली पर बादाम केक के टुकड़े रखकर उसकी तरफ़ बढाए:
“नोश फरमाईये, सिन्योर कमांडर इन चीफ़.”
मुर्गे ने कड़ी नज़र से लकड़ी के बच्चे की ओर देखा, मगर वह अपने आप को रोक नहीं पाया और उसकी हथेली पर चोंच मारी.
“को-को-को!...”
“सिन्योर कमांडर इन चीफ़, मुझे सराय तक जाना है, मगर इस तरह, कि मालिक मुझे न देखे. मैं आपकी शानदार रंगबिरंगी पूंछ के पीछे छुप जाऊंगा, और आप मुझे सीधे भट्टी तक ले चलिए. ठीक है?”
“को-को!” और भी ज़्यादा गर्व से मुर्गे ने जवाब दिया.
उसे कुछ भी समझ में नहीं आया था, मगर ऐसा न दिखाने के लिए, कि वह कुछ भी नहीं समझा है, शान से सराय के खुले दरवाज़े की ओर चल पडा. बुरातिनो ने किनारों से उसे पंखों के नीचे पकड़ लिया, उसकी पूंछ से खुद को ढांक लिया, और उकडू बैठकर किचन तक पहुँच गया, सीधे भट्टी के पास, जहां सराय का गंजा मालिक आग पर चमचे और फ्रायिंग पैन को आग पर घुमा रहा था.
“भाग जा, बासे शोरवे के मांस!” मालिक मुर्गे पर चिल्लाया और उसे इतनी जोर से लात मारी कि मुर्गा – कू-दाख-ताख-ताख!” बदहवासी से चीखते हुए बाहर रास्ते पर खूब घबराई हुई मुर्गियों की ओर उड़ गया.
बुरातिनो, बिना किसी की नज़र पड़े मालिक के पैरों के पास से फिसल गया और बड़ी मिट्टी की सुराही के पीछे बैठ गया.
तभी कराबास बराबास और दुरेमार की आवाजें सुनाई दीं.
मालिक नीचे झुकते हुए उनसे मिलने गया.
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