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गुफ़ा में
अनुवाद: चारुमति रामदास
मल्वीना
और प्येरो सरकंडों के बीच एक नम, गर्म टीले पर बैठे थे. मकड़ी के जाल ने उन्हें ऊपर से ढांक दिया था, जो अटा पडा था पतंगों के
पंखों, और बेहाल मच्छरों से.
छोटे
छोटे नीले पंछी, जो एक टीले से दूसरे पर उड़ रहे थे, प्रसन्न अचरज से फूट फूट कर रोती हुई बच्ची को
देख रहे थे.
दूर
से हताशापूर्ण सिसकियाँ और चीखें सुनाई दे रही थीं, - ये अर्तेमोन और बुरातिनो थे, ज़ाहिर है, उन्होंने अपने
जीवन की बहुत बड़ी कीमत लगाई थी.
“डर
लग रहा है,
डर लग रहा है!” मल्वीना बार बार दुहरा रही थी और हताशा से बर्डोक के पत्ते से अपना
मुंह ढांक रही थी.
प्येरो
अपनी कविता से उसे सांत्वना देने की कोशिश कर रहा था :
बैठे हैं हम टीले पर,
जहां खिलते हैं फूल, -
पीले, प्यारे,
बेहद खुशबू वाले.
गुजारेंगे पूरी गर्मियां
हम इसी टीले पर,
आह – एकांत में,
सबको चकित करते हुए...
मल्वीना उस पर पांव पटकने
लगी:
“आपने मुझे बेज़ार कर दिया, बेज़ार कर
दिया है, बच्चे! ताज़ा फूल तोड़ो, - देख तो रहे हो, कि ये पूरा गीला है और
इसमें छेद हैं.”
अचानक दूर से शोर और चीखें
रुक गईं, मल्वीना ने धीरे से हाथ हिलाए:
“अर्तेमोन और बुरातिनो मर
गए...”
और वह मुंह के बल टीले से
हरी काई में कूद गई.
प्येरो
उसके चारों ओर बेवकूफी से लड़खड़ा रहा था. हवा बांसों से गुज़रते हुए हौले हौले सीटी
बजा रही थी. आखिरकार कदमों की आहट सुनाई दी. निःसंदेह ये कराबास बराबास चल रहा था, जिससे मल्वीना
और प्येरो को बेदर्दी से पकड़कर अपनी अंतहीन जेबों में डाल दे. बांस दूर दूर हो गए, - और
बुरातिनो प्रकट हुआ: नाक ऊपर को उठी हुई, मुंह कानों तक खींचा हुआ. उसके पीछे पीछे लंगडाते हुए
चल रहा था अर्तेमोन, दो थैलियों के बोझ से बेहाल....
“और, - मुझसे
लड़ाई करना चाहते थे!” मल्वीना और प्येरो की प्रसन्नता पर ध्यान दिए बिना बुरातिनो
ने कहा, - “मेरे लिए बिल्ली क्या, लोमड़ी क्या, पुलिस के कुत्ते क्या, और खुद कराबास बराबास भी
क्या – थू! बच्ची, कुत्ते की पीठ पर चढ़ जा, बच्चे, पूंछ पकड़
ले. चलें...”
कुहनियों
से बांस हटाते हुए वह बहादुरी से टीलों पर चल पडा - तालाब का चक्कर लगाते हुए उस
पार...
मल्वीना
और प्येरो उससे पूछने की हिम्मत भी न कर सके कि पुलिस के कुत्तों के साथ लड़ाई कैसे
ख़त्म हुई और कराबास बराबास उनका पीछा क्यों नहीं कर रहा है.
जब
तालाब के दूसरे किनारे पर पहुंचे, तो भला अर्तेमोन कराहने और चारों पंजों पर लंगड़ाने लगा.
उसकी ज़ख्मों पर पट्टी बांधने के लिए रुकना ज़रूरी था. पथरीली चट्टान पर खड़े चीड़ की
विशाल जड़ों के नीचे, उन्होंने एक गुफ़ा देखी. वहां सभी गांठों को घसीटा और उसीमें
अर्तेमोन भी रेंग गया. शानदार कुत्ते ने पहले अपने हरेक पंजे को जीभ से चाटा फिर
उसे मल्वीना के आगे बढ़ा दिया. बुरातिनो ने मल्वीना की पुरानी कमीज़ फाड़कर पट्टियां
बना दीं, प्येरो उन्हें पकड़े रहा, मल्वीना ने पंजों पर पट्टियां बाँध दीं.
पट्टियां
बांधने के बाद अर्तेमोन को थर्मामीटर लगाया गया, और कुत्ता शान्ति से सो
गया.
बुरातिनो ने कहा,
“प्येरो, तालाब पर जा, पानी ले आ.”
प्येरो आज्ञाधारक की भांति
चल पड़ा, कवितायेँ गुनगुनाते हुए और ठोकर खाते हुए, रास्ते में उसने ढक्कन खो
दिया, मुश्किल से चायदानी की तली में पानी लाया.
बुरातिनो ने कहा:
“मल्वीना, भागकर जा
और अलाव के लिए टहनियां ले आ.”
मल्वीना ने हिकारत से
बुरातिनो की ओर देखा, कंधा उचकाया – और कुछ सूखे डंठल ले आई.
बुरातिनो ने कहा:
“ ये है सज़ा, इन शरीफ़
लोगों के साथ...”
वह
खुद पानी लाया, खुद ही टहनियां और चीड़ के शंकु इकट्ठा किये, गुफा के प्रवेशद्वार के पास
अलाव जलाया, जो इतना शोर मचा रहा था, कि ऊँचे देवदार की टहनियां झूलने लगीं...खुद ही पानी
में कोको बनाया.
“तैयार है! अब नाश्ते के लिए
आ जाओ...”
अपने होंठ भींचे, मल्वीना
पूरे समय चुप थी. मगर अब, उसने दृढता से, बड़ों जैसी आवाज़ में कहा:
“ऐसा न सोचना, बुरातिनो, कि अगर
तुमने कुत्तों से लड़ाई की और जीत गए, हमें कराबास बराबास से बचाया और उसके बाद भी बहादुरी से
काम करते रहे, तो तुम्हें खाने से पहले हाथों और दांतों को साफ़ करने से छुट्टी मिल
जायेगी...”
बुरातिनो बैठा रह गया : ये
लो!” उसने दृढ चरित्र वाली लड़की की ओर आंखें निकाल कर देखा.
मल्वीना गुफा से बाहर निकली
और उसने ताली बजाई:
“तितलियों, इल्लियों, भौंरों,
मेंढकों....”
एक मिनट भी नहीं बीता, कि बड़ी
बड़ी तितलियां उड़ती हुई आ गईं, जो फूलों के पराग से ढंकी थीं. रेंगते हुए इल्लियां और
गोबर की गंभीर मक्खियां भी आ पहुँची. पेट पर टपटपाते मेंढक भी आ गए...
तितलियाँ, पंखों से
आहें भरते हुए, गुफ़ा की दीवारों पर बैठ गईं, ताकि भीतर सुन्दर लगे और गिरती हुई मिट्टी खाने की
चीज़ों में न गिरे.
गोबर के भौंरे गुफ़ा के फर्श
से पूरे कचरे को गेंद की तरह गोल गोल घुमाते हुए बाहर ले गए और उसे दूर फेंक दिया.
मोटी सफ़ेद इल्ली बुरातिनो के
सिर पर चढ़ गयी और, उसकी नाक से लटकते हुए, उसके दांतों पर थोड़ी पेस्ट गिरा दी. चाहो, ना चाहो, दांतों को
साफ़ करना ही पडा.
दूसरी इल्ली ने प्येरो के
दांत साफ़ कर दिए.
एक उनींदा बिज्जू प्रकट हुआ, जो झबरे
सूअर की तरह लग रहा था. ..उसने अपने पंजे से भूरी इल्लियों को उठाया, उन्हें
दबाकर जूतों पर भूरी पेस्ट निकाली और अपनी पूंछ से जूतों के तीनों जोड़े बढ़िया साफ़
कर दिए – मल्वीना के, बुरातिनो के और प्येरो के. साफ़ करके उसने उबासी ली:
“आ-हा-हा” – और ठुमकते हुए
चला गया.
एक हंसमुख, चुलबुला
चटकीला हूपो (एक पक्षी- अनु,) लाल कलगी के साथ उड़ते हुए आया, जो सीधी खड़ी हो जाती थी, जब वह
किसी बात से हैरान हो जाता.
“किसके बाल बनाने हैं?”
“मेरे,” मल्वीना
ने कहा. “बालों में कंघी करो और उन्हें घुंघराले बना दो, मैं अव्यवस्थित हूँ...”
“मगर आईना कहाँ है? सुनो,
प्यारी...”
तब बाहर निकली आंखों वाले
मेंढकों ने कहा:
“हम लाएंगे...”
दस मेंढक पेट के बल तालाब की
ओर भागे. दर्पण के बदले वे दर्पण जैसी कार्प मछली को घसीटते हुए लाये, जो इतनी
मोटी और उनींदी थी कि उसे पंखों से खींचते हुए कहाँ घसीट रहे हैं, इससे कोई
फ़र्क नहीं पड़ता था. कार्प को मल्वीना के सामने पूंछ पर रखा गया. ताकि उसका दम न
घुट जाए, उसके मुंह में केतली से पानी उंडेला गया. नखरेबाज हूपो ने मल्वीना के
बालों को घुंघराले बनाकर उनमें कंघी कर दी. सावधानी से दीवार से एक तितली ली और
उससे बच्ची की नाक पर पावडर लगा दिया.
“हो गया,
प्यारी...”
और – फुर्रर्रर्र! चटकीली
गेंद के समान वह गुफ़ा से बाहर उड़ गया.
मेंढक दर्पण जैसी कार्प मछली
को वापस तालाब ले गए. बुरातिनो और प्येरो ने – चाहो, न चाहो – हाथ दो लिए और गर्दन
भी. मल्वीना ने नाश्ता करने की इजाज़त दे दी.
नाश्ते के बाद, घुटनों से
टुकड़ों को झटक कर, उसने कहा:
“बुरातिनो, मेरे
दोस्त, पिछली बार हम और तुम डिक्टेशन पर रुके थे. पाठ आगे बढ़ाते हैं....”
बुरातिनो का मन हुआ कि गुफ़ा
से बाहर कूद जाए – जहां सींग समाएं. मगर अपने असहाय साथियों और बीमार कुत्ते को तो
छोड़ा नहीं जा सकता था! वह बुदबुदाया:
“लिखने का सामान नहीं लाये
हैं...”
“झूठ है, लाये हैं,” अर्तेमोन
कराहा. वह थैली तक रेंग गया, दांतों से उसे खोला और स्याही की दावात, पेन्सिल
बॉक्स, नोट बुक और छोटा सा ग्लोब भी बाहर निकाला.
कलम को नोक के बिल्कुल नज़दीक
से न पकड़ें, वरना आपकी उँगलियों पर स्याही लग जायेगी,” – मल्वीना ने कहा. उसने
अपनी ख़ूबसूरत आंखें गुफ़ा की छत पर तितलियों की ओर उठाईं और...
इसी समय टहनियों की सरसराहट
और असभ्य आवाज़ें सुनाई दीं, - गुफ़ा के पास से औषधीय जोंकों का विक्रेता दुरेमार और
पैरों को घसीटता कराबास बराबास जा रहे थे.
गुड़ियों के थियेटर के
डाइरेक्टर के माथे पर बड़ी लाल गाँठ थी, उसकी नाक सूज गई थी, दाढी – उलझ गई थी और डामर से पुती हुई थी.
आहें भरते हुए और थूकते हुए
वह बोला:
“वे ज़्यादा दूर तक नहीं भागे
होंगे. वे यहीं कहीं, जंगल में ही हैं.”
बुरातिनो हर हाल में कराबास
बराबास से सुनहरी चाबी का भेद उगलवाना चाहता था.
कराबास बराबास और दुरेमार
धीरे धीरे गुफा के सामने से गुज़ारे.
मैदान में हुई लड़ाई के समय
औषधीय जोंकों का विक्रेता डर के मारे झाड़ी के पीछे छुप गया था. जब सब कुछ समाप्त
हो गया, तो उसने इंतज़ार किया, जब तक कि अर्तेमोन और बुरातिनो घनी घास में छुप न गए, और तभी
बड़ी मुश्किलों से उसने इटालियन चीड़ के तने से कराबास बराबास की दाढ़ी को खींच कर
अलग किया.
“तो, बच्चे ने तुम्हारी अच्छी खबर
ली!” दुरेमार ने कहा. “आपको अपनी खोपडी पर दो दर्जन सबसे बढ़िया जोंकें रखनी
होंगी....”
कराबास बराबास चीखा:
“एक सौ हज़ार शैतान! चलो, उन
शैतानों का पीछा करें!...”
कराबास बराबास और दुरेमार
भगोड़ों को ढूँढने निकले. उन्होंने हाथों से घास को हटाया, हर झाड़ी को अच्छी तरह देखा, हर टीले
को टटोला.
उन्होंने बूढ़े चीड़ की जड़ों
के पास अलाव का धुआं देखा, मगर उनके दिमाग में भी यह बात न आई, कि इस
गुफा में लकड़ी के इंसान छुपे हैं और उन्होंने अलाव भी जलाया है.