बुधवार, 4 फ़रवरी 2026

बुरातिनो - 17

  

17

सिन्योर कराबास बराबास ने मुझे देख लिया.

अनुवाद: चारुमति रामदास 


“तू छुपकर सुन रहा है, कमीने!” और वह मुझे पकड़ने के लिए उछला,, ताकि आग में फेंक दे, मगर फिर से अपनी दाढ़ी में उलझ गया और भयानक धडाम के साथ, कुर्सियों को तितर बितर करते हुए, फर्श पर गिर पडा.

“याद नहीं है, कि मैं खिड़की के बाहर कैसे पहुंचा, कैसे फेंसिंग पर चढ़कर उससे बाहर आया. अँधेरे में हवा शोर मचा रही थी और बारिश थपेड़े मार रही थी.

“मेरे सिर के ऊपर काला बादल बिजली से चमक गया, और दस कदम पीछे मैंने भागते हुए कराबास बराबास और जोंकें बेचने वाले को देखा....मैंने सोचा: ‘मर गया, लड़खड़ाया और किसी मुलायम और गर्माहट भरी चीज़ पर गिरा, किसी के कानों को पकड़ लिया...

“ये भूरा खरगोश था. वह भय से चीखा, ऊंची छलांग लगाई, मगर मैं उसके कानों को पकड़े रहा, और हम अँधेरे खेतों से, अंगूर के बागों से, सब्जियों के बगीचों से होते हुए भागते रहे.

“जब खरगोश थक गया और बैठ गया, अपमान से अपना कटा हुआ होंठ चबाते हुए, मैंने उसका माथा चूम लिया.

“प्लीज़, थोड़ा और, थोड़ा और भागेंगे, प्यारे भूरे खरगोश...”

“खरगोश ने गहरी सांस ली, और हम फिर से उछलते हुए जाने लगे, न जाने कहीं दायें, तो कहीं बाएं...

 “जब बादल छट गये और चाँद निकल आया, तो मैंने पहाड़ के नीचे एक छोटा सा शहर देखा जिसमें अलग अलग दिशाओं में घंटाघर थे.

शहर वाले रास्ते पर कराबास बराबास और जोंकों का विक्रेता भाग रहे थे.

खरगोश ने कहा:

“एहे हे, ये है खरगोश की खुशी! वे ‘मूर्खों के शहर जा रहे हैं, ताकि पुलिस के कुत्ते किराए पर लें. हो गया, और हम गए काम से!”   

खरगोश उदास हो गया. उसने पंजों में नाक घुसा ली और कान लटका लिए.

मैंने उसकी विनती की, मैं रो रहा था, मैं उसके पैरों पर भी झुका. खरगोश टस से मस नहीं हुआ.

मगर जब शहर से दो चपटी नाक वाले बुलडॉग, जिनके दायें पंजों पर काली पट्टियां बंधी थीं, भागते हुए आए, तो खरगोश की पूरी काया थरथरा गई , - मैं मुश्किल से उछलकर उसकी पीठ पर बैठ गया, और वह बेतहाशा जंगल में भागने लगा...

बाकी तो तुम देख ही चुके हो, बुरातिनो.”

प्येरो ने अपनी कहानी ख़त्म की, और बुरातिनो ने उससे सावधानी से पूछा:

“और किस घर में, सीढ़ियों के नीचे किस कमरे में वह छोटा सा दरवाज़ा है, जिसे चाबी खोलती है?

“कराबास बराबास इस बारे में नहीं बता पाया...आह, क्या हमें इससे कोई फरक पड़ता है, - चाबी तालाब के तल पर है...हम कभी भी सुख नहीं देख पायेंगे...”

“और क्या तुमने ये देखा है?” बुरातिनो उसके कान में चीखा. और जेब से चाबी निकालकर प्येरो की नाक के सामने नचाई. – “ये रही चाबी!”

बुरातिनो और प्येरो मल्वीना के पास आये, मगर उन्हें मल्वीना और कुत्ते अर्तेमोन के साथ भागना पड़ता है.

जब सूरज पर्वत के चट्टानी शिखर पर आया, तो बुरातिनो और प्येरो झाड़ी के नीचे से बाहर आये और खेत से होते हुए भागे, जिस पर कल रात को चमगादड़ बुरातिनो को नीले बालों वाली लड़की के घर से ‘मूर्खों के देस ले गया था.

प्येरो की ओर देखने से हंसी आ रही थी, - वह फ़ौरन मल्वीना को देखने के लिए उतावला हो रहा था.

“सुनो,” वह हर पंद्रह सेकण्ड बाद पूछता, “बुरातिनो, क्या वह मुझे देखकर खुश होगी?

“मुझे क्या मालूम...”

पंद्रह सेकण्ड बाद फिर पूछता है:

“सुनो, बुरातिनो, और अगर उसे खुशी न हुई तो?

“मुझे क्या मालूम...”

आखिरकार उन्हें सफ़ेद घर दिखाई दिया, जिसके दरवाजों पर सूरज, चाँद औए सितारे बने हुए थे.

चिमनी से धुँआ निकल रहा था. उसके ऊपर एक छोटा सा, बिल्ली के सिर जैसा बादल तैर रहा था.

कुत्ता अर्तेमोन पोर्च पर बैठा था और रह रहकर बादल की तरफ़ देखकर भौंक रहा था.

बुरातिनो का नीले बालों वाली लड़की के पास लौटने का ज़रा भी मन नहीं था. मगर वह भूखा था और दूर से ही उबले हुए दूध की गंध सूंघ रहा था.

“अगर लड़की फिर से हमें पढ़ाने का निश्चय करे, तो दूध पी लेंगे, - और मैं किसी भी कीमत पर यहाँ नहीं रुकूंगा.”

इसी समय मल्वीना घर से बाहर आई. उसके एक हाथ में चीनी मिट्टी का कॉफी पॉट था और दूसरे में – कुकीज़ की डलिया.

अभी तक उसकी आखें रोई हुई लग रही थीं, - उसे यकीन था कि चूहे बुरातिनो को कोठरी से खीचकर ले गए और उसे खा गए थे.

वह रेत की पगडंडी पर गुड़ियों की मेज़ पर बैठी ही थी, कि नीले फूल हिलने लगे, उनके ऊपर सफ़ेद और पीली पत्तियों की तरह तितलियाँ उड़ने लगीं, और बुरातिनो और प्येरो प्रकट हुए.

मल्वीना ने अपनी आंखें इतनी चौड़ी खोलीं कि दोनों लकड़ी के लडके आराम से उनमें उछल सकते थे.

मल्वीना को देखते ही प्येरो अनाप-शनाप बडबडाने लगा, उसके शब्द इतने असंबद्ध और बेवकूफ़ी भरे थे, कि हम उन्हें यहाँ नहीं बताएंगे.

बुरातिनो ने इस तरह कहा, मानो कुछ हुआ ही न हो:

“ये, लो, मैं इसे ले आया, - इसे संभालो...”

मल्वीना आखिरकार समझ गई कि ये सपना नहीं है.

“आह, कैसी खुशी है!” वह फुसफुसाई, मगर फौरन बड़ों जैसी आवाज़ में आगे बोली: - “बच्चों, फौरन जाकर नहाओ और दांत साफ़ करो. अर्तेमोन, बच्चों को कुंए पर ले जाओ.”

“तूने देखा,” बुरातिनो बडबडाया, “उसके दिमाग़ में पागलपन है – नहाना, दांत साफ़ करना! दुनिया में हर कोई सफ़ाई से ही रहता है...”

फिर भी वे नहाए. अर्तेमोन ने अपनी पूंछ के पीछे बंधे हुए ब्रश से उनके जैकेट साफ़ किए...

मेज़ पर बैठे. बुरातिनो दोनों गालों में खाना भर रहा था. प्येरो ने केक का एक टुकड़ा भी नहीं चखा था; वह मल्वीना की तरफ़ ऐसे देख रहा था, जैसे वह बादाम के आटे से बनी हो. आखिर वह इससे उकता गई.

“अरे,” उसने उससे कहा, “आपने मेरे चेहरे पर ऐसा क्या देख लिया? शान्ति से नाश्ता कीजिए, प्लीज़.”

“मल्वीना,” प्येरो ने जवाब दिया, “मैं काफ़ी समय से कुछ भी नहीं खा रहा हूँ, मैं कवितायेँ रचता हूँ...”

बुरातिनो हंसी से थरथराने लगा.

मल्वीना को आश्चर्य हुआ और उसने फिर से आंखें पूरी खोल दीं.

“तो – अपनी कवितायेँ पढ़िए.”

अपने सुन्दर हाथ से उसने गाल पोंछा और अपनी ख़ूबसूरत आंखें बादल की ओर उठाईं, जो बिल्ली के सिर जैसा था.  

प्येरो ने इस तरह बिसूरते हुए कविता पढ़ना शुरू किया, जैसे वह गहरे कुएं के तल पर हो:

मल्वीना भाग गई पराए देस

मल्वीना खो गयी, दुल्हन मेरी...

बिसूरता हूँ, नहीं जानता – कहाँ जाऊं...

क्या अलबिदा कहूं, गुड़ियों की ज़िंदगी को?

प्येरो पूरा पढ़ भी नहीं पाया, मल्वीना कविता की तारीफ़ भी नहीं कर पाई, जो उसे बहुत अच्छी लगी थी, कि रेत की पगडंडी पर भौंरा प्रकट हुआ.  

भयानक रूप से आंखें बाहर निकाल कर उसने बताया;

“आज रात को पागल कछुए तर्तीला ने कराबास बराबास को सुनहरी चाबी के बारे में सब कुछ बताया...”

मल्वीना भय से चिल्लाई, हांलाकि वह कुछ भी नहीं समझ पाई थी. सभी कवियों की तरह भुलक्कड़ प्येरो ने कुछ बेमतलब उद्गार प्रकट किये, जिन्हें हम यहाँ नहीं बताएँगे. मगर बुरातिनो फौरन उछला और उसने अपनी जेबों में बिस्कुट, शकर और मिठाई ठूंसना शुरू कर दिया.

“जितनी जल्दी हो, यहाँ से भाग जायेंगे. अगर पुलिस के कुत्ते कराबास बराबास को यहाँ ले आये – तो समझो हम मर गए.”

मल्वीना का चेहरा बदरंग हो गया, सफ़ेद तितली के पंख की तरह. प्येरो ने सोचा कि वह मर रही है, उस पर कॉफी पॉट गिरा दिया, और मल्वीना की बढ़िया ड्रेस पर कोको से ढँक गयी.

ज़ोर से भौंकते हुए उछलकर अर्तेमोन ने, - क्योंकि उसे ही तो मल्वीना की ड्रेस धोनी पड़ती थी, प्येरो की कॉलर पकड़ ली और उसे हिलाने लगा, जब तक कि प्येरो ने तुतलाते हुए कह नहीं दिया:

“बस, बहुत हो गया, प्लीज़...”

भौंरा आंखें फाड़े इस गड़बड़ को देखता रहा और उसने फिर कहा:

“कराबास बराबास पुलिस के कुत्तों के साथ पंद्रह मिनट में यहाँ पहुँच जाएगा.”

मल्वीना कपड़े बदलने के लिए भागी. प्येरो बदहवासी से अपने हाथ नचा रहा था और उसने स्वयं को पीछे से रेत की पगडंडी पर फेंकने की कोशिश की. अर्तेमोन घरेलू सामान की थैलियाँ खीँच रहा था. दरवाज़े धडाम-धडाम कर रहे थे. कबूतर झाड़ी पर बैठे, बदहवासी से चिल्लाए जा रहे थे, गोरैयों ने ज़मीन से ऊपर उड़ान भरी. आतंक बढाने के लिए उल्लू जंगलीपन से अटारी के ऊपर ठहाके लगा रहा था. 

सिर्फ बुरातिनो ही परेशान नहीं था. उसने अर्तेमोन के ऊपर आवश्यक सामानों से भरे दो बैग लाद दिए. बैगों के ऊपर मल्वीना को बिठा दिया, जिसने बढ़िया सफ़र वाली ड्रेस पहनी थी. प्येरो को उसने कुत्ते की दुम पकड़े रहने का हुक्म दिया. खुद सामने खडा हो गया:

“घबराने की ज़रुरत नहीं है! चलो, भागें!”

जब वे – याने बुरातिनो, जो बहादुरी से कुत्ते के आगे आगे चल रहा था, मल्वीना, जो बैगों पर उछल रही थी, और पीछे पीछे प्येरो, जो सामान्य ज्ञान के बदले बेवकूफी भरी कविताओं से लबालब भरा था, - जब वे घनी घास से बाहर निकल कर एक समतल मैदान में आये, तो – जंगल से कराबास बराबास की उलझी हुई दाढ़ी दिखाई दी. उसने सूरज से बचने के लिए आंखों पर हथेली रखी थी और आसपास के नज़ारे को देख रहा था. 

सोमवार, 2 फ़रवरी 2026

बुरातिनो - 16

 

16


बुरातिनो ‘मूर्खों के देस’ से भागता है और दुर्दैवी कॉम्रेड से मिलता है.


अनुवाद: चारुमति रामदास


कछुए तर्तीला ने ‘मूर्खों के देस से जाने का रास्ता नहीं बताया.

बुरातिनो जहां सींग समाएं भागा जा रहा था. काले पेड़ों के पीछे तारे चमक रहे थे. रास्ते के ऊपर चट्टानें लटक रही थीं. संकरे रास्ते पर कोहरे का बादल था.

अचानक बुरातिनो के सामने एक भूरी गाँठ उछलने लगी. तभी कुत्ते का भौंकना भी सुनाई दिया.

बुरातिनो चट्टान से चिपक गया. उसकी बगल में ‘मूर्खों के शहर की पुलिस के दो बुलडॉग क्रूरता से, सूंघते हुए भागकर निकल गए.  

भूरी गांठ रास्ते से बगल में छिटक गई – ढलान पर. बुलडॉग – उसके पीछे पीछे.

जब पैरों की धमधम और कुत्तों के भौंकने की आवाज़ दूर चली गयी तो बुरातिनो ने इतनी तेज़ी से भागना शुरू कर दिया कि काली टहनियों के पीछे तारे जल्दी-जल्दी तैरने लगे.

अचानक भूरी गाँठ फिर से उछल कर रास्ते पर आ गयी. बुरातिनो ने देख लिया, कि यह एक ख़रगोश है, और उसके ऊपर, उसके कान पकडे, एक कमजोर छोटा आदमी बैठा है.

ढलान से कंकड़ गिर रहे थे, - बुलडॉग खरगोश के पीछे पीछे रास्ते पर उछले, और फिर सब कुछ शांत हो गया.

बुरातिनो इतनी तेज़ी से भाग रहा था, कि अब तारे, मानो गुस्से से काली टहनियों के पीछे भाग रहे थे. 

तीसरी बार भूरे खरगोश ने उछल कर रास्ता पार किया. छोटे आदमी का सिर टहनी से टकराया, वह उसकी पीठ से फिसला और सीधे बुरातिनो के पैरों के पास गिरा.

“र्रर्रर्र – गाफ़! पकड़ो उसे!” खरगोश के पीछे पीछे पुलिस के बुलडॉग तेज़ी से भाग रहे थे: उनकी आँखों में इतना गुस्सा भरा था, कि उन्होंने न तो बुरातिनो को देखा , न ही कमजोर, पीले आदमी को.

“माफ़ करना माल्विना, हमेशा के लिए अलबिदा!” रोनी आवाज़ में आदमी बिसूर रहा था.

बुरातिनो उसके ऊपर झुका और उसने अचरज से देखा, कि ये तो प्येरो है लम्बी आस्तीनों वाली सफ़ेद कमीज़ में.

वह पहियों वाली नाली में सिर के बल पड़ा था और, ज़ाहिर है, स्वयं को मरा हुआ समझ रहा था और ज़िंदगी से जुदा होते हुए रहस्यमय वाक्य दुहरा रहा था: “ अलबिदा, मल्विना, अलबिदा हमेशा के लिए!” 

बुरातिनो ने उसे हिलाना शुरू किया, उसकी टांग पकड़ कर खींची, - प्येरो के शरीर में कोई हलचल नहीं हुई. तब बुरातिनो ने जेब में पड़ी हुई जोंक को निकाला और बेजान आदमी की नाक के पास रखा.

जोंक ने ज़्यादा कुछ सोचे बिना उसकी नाक पर काट लिया. प्येरो फ़ौरन उठकर बैठ गया, उसने सिर हिलाया, जोंक को बाहर खींचा और कराहा:

“आह, लगता है कि अभी मैं ज़िंदा हूँ!”

बुरातिनो ने उसे गालों से पकड़ लिया, सफ़ेद, टूथ पावडर जैसे, उन्हें चूमा और पूछा:

“तुम यहाँ कैसे आये? तुम भूरे खरगोश पर क्यों सवार थे?

“बुरातिनो, बुरातिनो,” – प्येरो ने भय से चारों ओर देखते हुए जवाब दिया, - “मुझे फ़ौरन छुपा दो...क्योंकि कुत्ते भूरे खरगोश का पीछा नहीं कर रहे थे, - वे मेरा पीछा कर रहे थे...सिन्योर कराबास बराबास दिन रात मेरा पीछा करता रहता है. उसने ‘मूर्खों के शहर में पुलिस के कुत्तों को किराए पर लिया है और कसम खाई है कि मुझे ज़िंदा या मुर्दा – हर हाल में पकड़ेगा.”

दूर कहीं फिर से कुत्ते भौंके. बुरातिनो ने प्येरो को आस्तीन से पकड़ लिया और उसे खींच कर मिमोज़ा (छुई मुई का पेड़ – अनु.) की बेलों में ले गया, जो पीले, सुगन्धित, गोल गोल बटन जैसे फूलों से ढंकी हुई थीं.

वहां सड़े हुए पत्तों पर लेटे हुए, प्येरो ने फुसफुसाते हुए उससे कहना शुरू किया:  

“जानते हो, बुरातिनो, एक बार रात को हवा चिंघाड़ रही थी, घनघोर बारिश हो रही थी...”

प्येरो बताता है, कि वह कैसे खरगोश पर सवार होकर ‘मूर्खों के देस पहुँच गया.

“जानते हों बुरातिनो, एक बार रात को हवा चिंघाड़ रही थी, घनघोर बारिश हो रही थी. सिन्योर कराबास बराबास भट्टी  के पास बैठा पाईप के कश ले रहा था. सभी गुडिया सो गई थीं. मैं अकेला ही नहीं सोया था. मैं नीले बालों वाली लड़की के बारे में सोच रहा था...”

“सोचा भी तो किसके बारे में, बेवकूफ!” बुरातिनो ने उसकी बात काटी. “मैं कल रात को इस लड़की के पास से भाग आया – मकड़ियों वाली कोठरी से...”

“क्या? क्या तुमने नीले बालों वाली लड़की को देखा है? तुमने मेरी मल्वीना को देखा है?

“सोचो – गज़ब की है! रोतली और सताने वाली...”

प्येरो हाथ नचाते हुए उछल पड़ा.

“मुझे उसके पास ले चल...अगर तुम मल्वीना को ढूंढने में मेरी मदद करोगे, तो मैं तुम्हें सुनहरी चाबी का रहस्य बताऊंगा...”

“क्या!” बुरातिनो खुशी से चीखा. – “तुम सुनहरी चाबी का रहस्य जानते हो?

“जानता हूँ कि चाबी कहां है,  कैसे उसे हासिल करना है, जानता हूँ, कि उससे एक ख़ास दरवाज़ा खोलना है...मैंने उस रहस्य के बारे में सुन लिया था, और इसलिए सिन्योर कराबास बराबास मुझे पुलिस के कुत्तों के साथ ढूंढ रहा है.”

बुरातिनो फ़ौरन डींग मारना चाहता था, कि रहस्यमय चाबी उसकी जेब में है. कहीं बक न दे, इसलिए उसने सिर से अपना टोप खींचा और उसे मुंह में ठूंस लिया.

प्येरो उसे मल्वीना के पास ले चलने के लिए विनती कर रहा था. बुरातिनो ने ऊंगलियों की सहायता से इस बेवकूफ को समझाया, कि अभी अन्धेरा है और खतरा है, और जब सुबह होगी तो वे भागकर बच्ची के पास जायेंगे.        

प्येरो को फिर से मिमोसा की झाड़ियों के नीचे छिपने पर मजबूर करने के बाद, बुरातिनो खरखरी आवाज़ में बोला, क्योंकि उसका मुंह टोपी से बंद था:

“शुशुनाओ...”

“तो, - एक बार रात को हवा खूब शोर मचा रही थी...”

“इस बारे में तुम पहले ही शुशुना चुके हो...”

“तो,”- प्येरो कहता रहा, “ मैं, समझ रहे हो, सो नहीं रहा हूं, और अचानक सुनता हूँ: खिड़की पर किसी ने जोर से दस्तक दी.”

सिन्योर कराबास बराबास गरजा:

“ऐसे कुत्ते मौसम में कौन कडमडाया है?

“ये मैं हूँ – दुरेमार,” खिड़की के बाहर से जवाब आया, “औषधीय जोंक बेचने वाला. मुझे आग के पास अपने आप को सुखाने की इजाज़त दीजिये.”

“मुझे, समझ रहे हो ना, खूब इच्छा हो रही थी ये देखने की, कि औषधीय जोंकों के विक्रेता कैसे होते हैं. और – देखता हूँ:

सिन्योर कराबास बराबास कुर्सी से उठा, हमेशा की तरह उसने दाढ़ी पर पैर रखा, गालियाँ दीं, और दरवाज़ा खोला.

भीतर आया एक लंबा, गीला-गीला आदमी, छोटे-बेहद छोटे चेहरे वाला, इतना झुर्रियों वाला, जैसे गुच्ची मशरूम. उसने पुराना हरा ओवरकोट पहना था, बेल्ट से चिमटे, हुक और हेयरपिंस लटक रहे थे. उसने हाथों में टीन का डिब्बा और जाल पकड़ रखा था.

“अगर आपके पेट में दर्द है,” उसने इस तरह झुकते हुए कहा मानो उसकी कमर बीच से टूटी हो, “अगर आपको तेज़ सिर दर्द हो रहा हो अगर कानों में तेज़ खटखट हो रही हो, तो मैं कानों के पीछे आधा दर्जन बढ़िया जोंकें रख सकता हूँ.”

सिन्योर कराबास बराबास  गरजा:

“शैतान ले जाए, कोई जोंकें-वोंकें नहीं चाहिए! आग के पास जितना चाहो, गरमा सकते हो.”

दुरेमार भट्टी की ओर पीठ किये खड़ा था.

तभी उसके हरे कोट से भाप निकलने लगी और उसमें से कीचड़ की बू आने लगी.

“जोंकों का व्यापार बहुत बुरा चल रहा है,” उसने फिर से कहा. “अगर आपकी हड्डियों में दर्द है तो...ठन्डे पोर्क के एक टुकड़े और एक ग्लास वाईन के लिए मैं आपकी जांघ पर एक दर्जन बेहद बढ़िया जोंकें रखने के लिए तैयार हूँ...”    

“शैतान ले जाए, कोई जोंकें-वोंकें नहीं चाहिए!” कराबास बराबास चीखा. “ पोर्क खाओ और वाईन पी लो.”

दुरेमार ने पोर्क खाना शुरू किया, उसका चेहरा सिकुड़ रहा था और फ़ैल रहा था, रेज़िन की तरह. खाने और पीने के बाद, उसने एक चुटकी तम्बाकू मांगी.

“सिन्योर, मैं तृप्त हूँ और गरमा गया हूँ,” उसने कहा. “आपकी मेहमाननवाज़ी चुकाने के लिए मैं आपको एक रहस्य बताऊंगा.”

सिन्योर कराबास बराबास ने पाईप का कश लिया और जवाब दिया:

“दुनिया में सिर्फ एक ऐसा रहस्य है, जो मैं जानना चाहता हूँ. बाकी सब पर तो मैं थूकता हूँ.”

“सिन्योर,” दुरेमार ने फिर कहा, “मैं एक महान रहस्य जानता हूँ, कछुए तर्तीला ने उसे मुझे बताया था.”

इन शब्दों को सुनते ही कराबास बराबास ने आँखें बाहर निकालीं, उछला, दाढी में उलझ गया, सीधा घबराए हुए दुरेमार की ओर उछला, उसे अपने पेट से चिपका लिया और सांड की तरह गरजा:

“प्यारे दुरेमार, बेशकीमती दुरेमार, बोल, जल्दी बोल कि तुझे कछुए तर्तीला ने क्या बताया था!”

तब दुरेमार ने ये किस्सा सुनाया:

“मैं ‘मूर्खों के शहर के पास एक गंदे तालाब में जोंकें पकड़ रहा था. चार सोल्दा रोज़ की मजूरी पर मैंने एक गरीब आदमी को किराए पर रखा, - वह अपने कपड़े उतार देता, तालाब में गर्दन तक जाता और वहां खड़ा रहता जब तक कि उसके नंगे बदन से जोंकें न चिपक जातीं.

तब वह बाहर किनारे पर आता, मैं उसके बदन से जोंकें इकट्ठा करता और उसे फिर से तालाब में भेज देता.

जब इस तरह से हमने काफी सारी जोंकें इकट्ठा कर लीं, तो अचानक पानी के भीतर से सांप का सिर दिखाई दिया.

“सुन, दुरेमार,” सिर ने कहा, “तूने हमारे ख़ूबसूरत तालाब की सारी आबादी को डरा दिया है, तुम पानी को गंदा कर रहो हो, तुम मुझे नाश्ते के बाद चैन से आराम नहीं करने देते...ये बेहूदगी कब बंद होगी?...”

मैंने देखा कि वह साधारण कछुआ है, और, ज़रा भी डरे बिना मैंने जवाब दिया:

“जब तक आपके गंदे डबरे की सारी जोंकें नहीं पकड़ लेता...”

मैं आपको खरीदने के लिए तैयार हूँ, दुरेमार, ताकि तुम हमारे तालाब को अकेला छोड़ दो, और फिर कभी वापस न आओ.”

“तब मैं कछुए का मज़ाक उड़ाने लगा:

“आह, तू, बूढ़ी तैरने वाली सूटकेस, बेवकूफ आंटी तर्तीला, तुम मुझे क्या देकर खरीदोगी? क्या अपनी हडीली छत से, जहां अपने पंजे और सिर छुपाती हो...मैं तुम्हारी छत स्कैलप्स के लिए बेच दूंगा...” 

कछुआ गुस्से से हरा हो गया और मुझसे बोला:

“तालाब के तल पर जादू की चाबी पड़ी है...मैं एक आदमी को जानता हूँ, - वह इस चाबी को पाने के लिए दुनिया में कुछ भी करने को तैयार है...”

दुरेमार इन शब्दों को कह भी नहीं पाया था, कि कराबास बराबास पूरी ताकत से चीखा:

“वो आदमी – मैं हूँ! मैं! मैं! मेरे प्यारे दुरेमार, तो तुमने कछुए से चाबी क्यों नहीं ली?

“लो, और सुनो!” – दुरेमार ने जवाब दिया और अपने चेहरे की झुर्रियों को इकट्ठा किया, जिससे वह उबले हुए कुकुरमुत्ते की तरह हो गया. – “ये भी सुनो! - सबसे बेहतरीन जोकों के बदले कोई एक चाबी...”

संक्षेप में मेरा कछुए से झगड़ा हो गया, और उसने, पानी से पंजा निकाल कर कहा:

“कसम खाता हूँ – न तो तुमको , न ही कोई और जादू की चाबी को पा सकेगा. कसम खाता हूँ – वह उसी आदमी को मिलेगी, जो तालाब की पूरी आबादी को उसे मुझसे मांगने के लिए मना लेगा...”

ऊपर उठे पंजे से कछुआ पानी में डूब गया.”

एक भी पल खोये बिना ‘मूर्खों के देस’ भागो!” कराबास बराबास ने जल्दी जल्दी अपनी टोपी और लालटेन पकड़ते हुए दाढ़ी के सिरे को अपनी जेब में घुसा लिया. “मैं तालाब के किनारे बैठ जाऊंगा. मैं प्यार से मुस्कुराऊंगा. मैं मेंढकों से, टेडपोल से, पानी के भौंरों से भीख मांगूंगा...मैं हिचकियाँ लूंगा, किसी अकेली गाय की तरह, कराहूँगा, बीमार मुर्गी की तरह, रोऊँगा मगरमच्छ की तरह. मैं सबसे छोटे मेंढक के सामने घुटनों पर बैठ जाऊंगा...चाबी मेरे ही पास होनी चाहिए! मैं शहर जाऊंगा, मैं एक घर में जाऊंगा, मैं सीढ़ियों के नीचे वाले कमरे में झाकूंगा...मैं छोटा सा दरवाज़ा ढूंढूंगा, - उसके करीब से सब गुज़रते हैं, और किसी की भी उस पर नज़र नहीं पड़ती. चाबी को ‘की होल में घुसाऊंगा...”

“इस समय, समझ रहे हो, बुरातिनो,” – मिमोसा के पेड़ के नीचे सुन्दर पत्तियों पर बैठकर प्येरो कह रहा था, - “मुझे यह सब इतना दिलचस्प लगा, कि मैं परदे के पीछे से पूरा बाहर निकल आया.”