गुरुवार, 19 फ़रवरी 2026

बुरातिनो - 24

 24


आखिरकार बुरातिनो पापा कार्लो, मल्वीना, प्येरो और अर्तेमोन के साथ घर लौटता है.

अनुवाद: चारुमति रामदास 


कार्लो के अचानक प्रकट होने से, उसकी छड़ी और चढ़ी हुई भौंहों से बदमाश भयभीत हो गए.

लोमड़ी अलीसा घनी घास में घुस गई और वहां भागने लगी, कभी कभी ठहर जाती, क्योंकि छड़ी की मार से सिहर उठती थी. बिल्ला बज़ीलियो, दस कदम उड कर गुस्से से फुफकारता, साइकिल के पंक्चर टायर की तरह.

दुरेमार ने हरे कोट के पल्ले उठाए और चट्टान से नीचे उतरने लगाबार बार यह दुहराते हुए:

“मैंने कुछ नहीं किया, मैंने कुछ नहीं किया...”

मगर एक चढ़ाई पर वह फिसल गया, भयानक शोर और छपाक के साथ तालाब में औंधे मुंह जा गिरा.

कराबास बराबास जहाँ खड़ा था, वहीं खड़ा रहा. उसने सिर्फ अपना सिर कन्धों तक नीचे खींच लिया; उसकी दाढी किसी चीथड़े की तरह लटक रही थी. बुरातिनो, प्येरो और मल्वीना ऊपर पहुंचे. पापा कार्लो ने एक एक करके उन्हें उठाया और उंगली से धमकाते हुए बोले:

“तुम्हें अभी सबक सिखाता हूँ, शैतानों!”

और उन्हें सीने से लगा लिया.

फिर वह चट्टान से कुछ कदम नीचे उतरा और अभागे कुत्ते के पास बैठ गया. वफ़ादार आर्तेमोन ने थोबड़ा उठाया और कार्लो की नाक को चाटा. बुरातिनो ने फ़ौरन अपना सिर सीने से बाहर निकाला:

“पापा कार्लो, हम बगैर कुत्ते के घर नहीं जायेंगे.”

“ए–हे-हे,” कार्लो ने जवाब दिया, “मुश्किल होगी, खैर, किसी तरह तुम्हारे नन्हे कुत्ते को ले जाऊंगा.”

उसने आर्तेमोन को कंधे पर डाला और, भारी बोझ से दुहरा होते हुए, ऊपर चढ़ा, जहां, उसी तरह अपना सिर ताने, आंखें बाहर निकाले, कराबास बराबास खडा था. – “मेरी प्यारी गुड़ियों...” वह बुदबुदाया.

पापा कार्लो ने उसे गंभीरता से जवाब दिया:

“तुम भी ना! किसके साथ बुढ़ापे में पाला पड़ा है, - सारी दुनिया में मशहूर बदमाशों से, दुरेमार से, बिल्ले से, लोमड़ी से. छोटे लोगों की बेइज्ज़ती करते हो! शर्म आनी चाहिए, डॉक्टर! और कार्लो शहर के रास्ते पर चल पडा.

कराबास बराबास खिंचे हुए सिर से उसके पीछे पीछे चल पडा. “मेरी गुड़ियों को वापस दो!...” – “किसी कीमत पर न देना! – बुरातिनो सीने के पीछे से सिर बाहर निकालते हुए चीखा.

इस तरह चलते रहे, चलते रहे. ‘थ्री मिन्नोज़’ सराय को पार किया, जहां, गंजा मालिक दरवाज़े पर झुक कर खडा दोनों हाथों से भाप निकालते बर्तनों की ओर इशारा कर रहा था.

दरवाज़े के पास आगे-पीछे, आगे-पीछे अपनी नुची हुई पूंछ के साथ घूमते हुए, गुस्से से मुर्गा बुरातिनो की बदमाश हरकत के बारे में बता रहा था. मुर्गियां सहानुभूति से सिर हिला रही थीं:

“आह-आह, कितना डरावना है! ऊख-ऊख, हमारा बेचारा मुर्गा!...”

कार्लो पहाड़ी पर चढ़ गया, जहां से समुद्र दिखाई दे रहा थाजिसमें हवा चलने के कारण कहीं कहीं मटमैले पट्टे दिखाई दे रहे थे, किनारे के पास – छोटा सा पुराना शहर, जो तपते हुए सूरज के कारण रेत के रंग का दिखाई दे रहा था और कठपुतलियों के थियेटर की कैनवास की छत.   

कराबास बराबास कार्लो से तीन कदम पीछे खड़ा होकर गरजा:

“मैं तुम्हें गुड़िया के लिए सौ सोने के सिक्के दूंगा, बेच दे.”

बुरातिनो, मल्वीना और प्येरो की सांस रुक गई -  वे इंतज़ार करने लगे कि कार्लो क्या कहता है.

उसने जवाब दिया:

“नहीं! अगर तू थियेटर के दयालुअच्छे डाइरेक्टर होते, तो मैं तुम्हेंयूं ही इन नन्हे इंसानों को तुम्हें दे देता. मगर तुम – किसी मगरमच्छ से भी ज़्यादा बुरे हो. न तो तुम्हें दूंगा, न ही बेचूंगाभाग जा.”

कार्लो पहाडी से नीचे उतरा और, कराबास बराबास की ओर ध्यान न देते हुए, शहर में गया.  

वहां सुनसान चौक में पुलिसवाला निश्चल खडा था.

गर्मी और उकताहट के मारे उसके कान लटक गए थे, पलकें चिपक गईं थीं, तिकोनी हैट के ऊपर मक्खियाँ उड़ रही थीं.

कराबास बराबास ने अचानक अपनी दाढी को जेब में घुसाया, कार्लो को पीछे से कमीज़ से पकड़ा और पूरे चौक में गरजा:

“चोर को पकड़ो, उसने मेरी गुड़ियों को चुरा लिया है!...”

मगर पुलिस वाला, जिसे गर्मी लग रही थी और उकताहट हो रही थी हिला तक नहीं. कराबास बराबास उसकी तरफ उछला और मांग करने लगा कि कार्लो को गिरफ़्तार किया जाए.

“और तू कौन है?” पुलिसवाले ने आलस से पूछा.

“मैं गुड़ियों के विज्ञान का डॉक्टर, मशहूर थियेटर का डाइरेक्टर, सर्वश्रेष्ठ सम्मानप्राप्त नाईट, तरबार के राजा का निकटतम मित्र, सिन्योर कराबास बराबास हूँ...”

“मगर तुम मुझ पर चिल्लाओ नहीं,” पुलिसवाले ने जवाब दिया.

जब तक कराबास बराबास उससे उलझ रहा था, पापा कार्लो, जल्दी जल्दी  पुल के पत्थरों पर छडी खटखटाते हुए, उस घर के पास पहुंचा, जिसमें वह रहता था. उसने सीढ़ियों के नीचे वाली आधी अंधेरी कोठरी का दरवाज़ा खोला, अर्तेमोन को कंधे से नीचे उतारा, उसे बेंच पर रखा, बगल के पीछे से बुरातिनो, मल्वीना और प्येरो को बाहर निकाला और उम्हें एक दूसरे की बगल में मेज़ पर बिठा दिया. मल्वीना ने फ़ौरन कहा:

“पापा कार्लो, सबसे पहले बीमार कुत्ते पर ध्यान दीजिये. बच्चों, फ़ौरन हाथ-मुंह धो लो...”

अचानक उसने बदहवासी से हाथ हिलाए:

“और मेरे ड्रेसेस! मेरे नए जूते, मेरे रिबन्स खाई के नीचे छूट गए, गोखरुओं के बीच!...”

“कोई बात नहीं, परेशान न हो,” कार्लो ने कहा, “शाम को मैं जाऊंगा, तुम्हारी थैलियाँ ले आऊँगा.”

उसने सावधानी से अर्तेमोन के पंजों की पट्टियां खोल दीं. देखा, कि घाव करीब करीब अच्छे हो गए हैं, और कुत्ता अपनी जगह से इसलिए नहीं हिल पा रहा था, क्योंकि वह भूखा था.

“दलिए की एक प्लेट और दिमाग की हड्डी,” अर्तेमोन कराहा, “और मैं शहर के सारे कुत्तों से लड़ने के लिए तैयार हूँ.”

“आय-आय-आय,” कार्लो ने रोनी आवाज़ में कहा, “और मेरे पास एक भी टुकड़ा नहीं, जेब में एक भी सल्दो नहीं...”

मल्वीना दयनीयता से रो पड़ी. प्येर ने मुट्ठी से माथा पोंछा, कल्पना करते हुए.

“मैं रास्ते पर जाऊंगा, कवितायेँ सुनाऊंगा, आने जाने वाले मुझे मुट्ठियाँ भर के सल्दो देंगे.”

कार्लो ने सिर हिलाया:

“बेटे, तू आवारागर्दी के इल्ज़ाम में पुलिस-थाने में रात गुज़ारेगा. 

बुरातिनो को छोड़कर बाकी सभी उदास थे. वह चालाकी से मुस्कुरा रहा था, इस तरह गोल गोल घूम रहा था, जैसे मेज़ पर नहीं, बल्कि उल्टे बटन पर बैठा हो.

“दोस्तों, - बस हो गया रोना धोना!” वह फर्श पर कूदा और जेब से कुछ निकाला. “पापा कार्लो, फावड़ा लोदीवार से छेद वाले कैनवास को अलग करो.

और उसने अपनी लम्बी नाक से भट्टी की ओर इशारा किया, और भट्टी के ऊपर रखे बर्तन की ओर, और धुएँ की ओर, जो पुराने कैनवास के टुकड़े पर चित्रित थे.

कार्लो को अचरज हुआ.

“बच्चे, तुम दीवार से इस ख़ूबसूरत चित्र को क्यों चीरना चाहते हो? सर्दियों में मैं उसकी ओर देखता हूँ और कल्पना करता हूँ, कि ये असली आग है और हांडी में मटन का असली सालन है, लहसुन डाला हुआ, और मुझे थोड़ी गर्माहट महसूस होती है.”

“पापा कार्लो, गुड़ियों का ईमानदार वादा करता हूँ, -  तुम्हारे पास भट्टी में असली आग होगी, असली लोहे की हांडी होगी और गरम गरम सालन होगा. कैनवास फाड़ दो.”

बुरातिनो ने यह इतने विश्वास से कहा कि पापा कार्लो ने अपनी खोपड़ी खुजलाई, सिर हिलाया, घुरघुराया, घुरघुराया, - चिमटा और हथौड़ा लिया और कैनवास फाड़ने लगा. उसके पीछे, जैसा कि हम जानते हैं, सब कुछ मकड़ी के जालों से ढंका हुआ था और मरी हुई मकड़ियाँ लटक रही थीं.   

कार्लो ने सावधानी से मकड़ी के जाले हटाये. तब काले पड़ चुके चीड़ का छोटा सा दरवाज़ा दिखाई दिया. उस पर चारों कोनों में मुस्कुराते हुए चेहरे खुदे हुए थे, और बीच में – नाचता हुआ, लम्बी नाक वाला छोटा सा आदमी.

जब उसके ऊपर से धूल झाड़ी गई, तो मल्वीना, प्येरो, पापा कार्लो, और यहाँ तक कि भूखा अर्तेमोन भी एक सुर में चहके:

“ये तो खुद बुरातिनो का पोर्ट्रेट है!”

“मैंने ऐसा ही सोचा था,” बुरातिनो ने कहाहालांकि उसने ऐसा कुछ भी नहीं सोचा था और खुद भी चकित हो गया. – “और ये रही दरवाज़े की चाबी. पापा कार्लो, खोलो...”

ये छोटा सा दरवाज़ा और यह सुनहरी चाबी,” कार्लो ने कहा“बहुत पहले बनाए गए थेकिसी बहुत कुशल कारीगर द्वारा. चलो, देखते हैं, कि दरवाज़े के पीछे क्या छुपाया गया है.”

उसने चाबी दरवाज़े के छेद में डाली और उसे घुमाया...एक हल्की सी, प्यारी धुन गूंजी, जैसे कोई हार्मोनियम बज रहा हो...

पापा कार्लो ने दरवाज़े को धक्का दिया. वह चरमराहट के साथ खुलने लगा.

इसी समय खिड़की से बाहर तेज़ तेज़ कदमों की आवाज़ सुनाई दी, और साथ ही गरजी कराबास बराबास की आवाज़:  
“तराबार्स्क के राजा के नाम पर – बूढ़े बदमाश कार्लो को गिरफ्तार कीजिए!”

मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026

बुरातिनो - 23

 

23


अनुवाद: चारुमति रामदास 


मल्वीना ने पुष्टि की: - वह शेर की तरह लड़ा

उसने प्येरो की गर्दन में हाथ डाल दिए और उसके दोनों गालों को चूम लिया.

“बस हो गया, बस हो गया चूमना,” बुरातिनो भुनभुनाया, “चलो भागते हैं, अर्तेमोन को पूंछ से घसीटेंगे.”

  उन तीनों ने अभागे कुत्ते की पूंछ पकड़ ली और उसे पहाडी पर ऊपर की ओर खींचने लगे.

“छोडिये, मैं खुद चला जाऊंगा, मुझे इतना अपमान लग रहा है,” पट्टियों से बंधा हुआ कुत्ता कराहा.

“नहीं, नहीं, तुम काफ़ी कमजोर हो.”

मगर वे मुश्किल से ढलान का आधा रास्ता पार कर पाए थे, कि ऊपर कराबास बराबास और दुरेमार प्रकट हुए. लोमड़ी अलीसा ने पंजे से भगोड़ों को दिखाया, बिल्ले बज़ीलियो ने अपनी मूंछों पर ताव दिया और हिकारत से गुरगुराया.   

“हा-हा-हा, कितना चालाक है!” कराबास बराबास ने ठहाका मारते हुए कहा. “सुनहरी चाबी अपने आप मेरे हाथों में आ रही है!”

बुरातिनो जल्दी से सोचने लगा कि इस नई मुसीबत से कैसे निकले. प्येरो ने मल्वीना को गले लगाया, वह हर कीमत पर उसका जीवन बचाना चाहता था. इस बार बचने की कोई उम्मीद नहीं थी.

ढलान के ऊपर दुरेमार ठहाके लगा रहा था.

“सिन्योर कराबास बराबास, बीमार कुत्ते को आप मुझे दे दीजिए, मैं उसे तालाब में जोंकों के पास फेंक दूंगा, ताकि मेरी जोंकें मोटी हो जाएँ...”

मोटे कराबास बराबास को नीचे उतरने में आलस आ रहा था, उसने भगोड़ों को अपनी सॉसेज जैसी उंगली से इशारा किया:

“आओ, मेरे पास आओ, बच्चों...”

“अपनी जगह से हिलना नहीं!” बुरातिनो ने हुक्म दिया. “मरना – कितना मजेदार है! प्येरो, अपनी सबसे बुरी कवितायेँ सुनाओ. मल्वीना ज़ोर ज़ोर ठहाके लगाओ...”

कुछ कमियों के बावजूद, मल्वीना एक अच्छी दोस्त थी. उसने आंसू पोंछे और इतने आक्रामक रूप से उनके लिए हंसने लगी जो ढलान के ऊपर खड़े थे.

प्येरो ने फ़ौरन कविता बनाई और अप्रिय आवाज़ में चीखने लगा:

अफसोस है लोमड़ी एलिस के लिए –

डंडा कर रहा उसका इंतज़ार.

बिल्ला बजीलियो है भिखारी –

चोर है, नीच बिल्ला.

दुरेमार, हमारा है बेवकूफ,

फूहड़ कुकुरमुत्ता.

कराबास तू बराबास,

नहीं डरते ज़्यादा तुझसे...

साथ ही बुरातिनो ठुमके लगा रहा था और चिढ़ा रहा था:

“ऐ, तू, गुड़ियों के थियेटर के डाइरेक्टर, बिअर के पुराने पीपे, मोटे बोरे, बेवकूफियों से ठसाठस भरे हुए, नीचे उतर, उतर कर हमारे पास आ, - मैं तेरी कम्बख्त दाढी पर थूकूँगा!”

जवाब में कराबास बराबास खतरनाक ढंग से गुर्राया, दुरेमार ने अपने पतले हाथ आसमान की ओर उठाए.

लोमड़ी अलीसा कुटिलता से हंस पड़ी.

 “इन बदमाशों की गर्दनें मरोड़ने की इजाज़त दीजिये?

बस, एक मिनट और, और सब ख़त्म हो जाता...अचानक सीटियाँ बजाते हुए अबाबीलें आ गईं:

“यहाँ, यहाँ, यहाँ!...”

कराबास बराबास के सिर के ऊपर मैगपाई चक्कर लगाने लगी, ज़ोर से बकबक करते हुए:

“जल्दी, जल्दी, जल्दी!...”

और चट्टान के ऊपर बूढ़े पापा कार्लो प्रकट हुए. आस्तीनें ऊपर किये हुए, हाथ में – नुकीली छड़ी थी, भँवे तनी हुई थीं...

उन्होंने कंधे से कराबास बराबास को धक्का दिया, कुहनी से – दुरेमार को, लोमड़ी अलीसा की पीठ पर डंडा खींच दिया, जूते से बिल्ले बज़ीलिओ को दूर उछाल दिया...

इसके बाद, झुककर और चट्टान से नीचे झांकते हुए, जहां लकड़ी के इन्सान खड़े थे, खुशी से बोले:

“मेरे बच्चे, बुरातिनो, नन्हे बदमाश, तू ज़िंदा है और तंदुरुस्त है, - जल्दी से मेरे पास आ जा!”

 

सोमवार, 16 फ़रवरी 2026

बुरातिनो - 22

 22


बुरातिनो जीवन में पहली बार हताश होता है, मगर सब कुछ अच्छी तरह समाप्त हो जाता है.

अनुवाद: चारुमति रामदास 


बेवकूफ़ मुर्गा पस्त हो गया, अपनी चोंच खोले, वह मुश्किल से भाग रहा था. बुरातिनो ने आखिरकार उसकी मरोड़ी हुई पूंछ छोड़ दी.

“जा, जनरल, अपनी मुर्गियों के पास भाग...”

और अकेला ही चल पड़ा उस ओर जहां पत्तों के बीच से हंसों का तालाब चमक रहा था.

ये रहा चट्टानी पहाड़ी पर देवदार का पेड़, और ये रही गुफा. चारों ओर टूटी हुई टहनियां बिखरी हैं. घास पहियों के निशानों से कुचली हुई है.

बुरातिनो का दिल तेज़ी से धड़कने लगा. वह पहाड़ी से कूद गया, मुड़ी हुई जड़ों के नीचे देखा...

गुफ़ा खाली थी!!!

न तो मल्वीना थी, न प्येरो, ना ही अर्तेमोन.  

सिर्फ दो चीथड़े पड़े थे. उसने उन्हें उठाया,- ये प्येरो की कमीज़ की फटी हुई आस्तीनें थीं.

दोस्तों का किसी ने अपहरण कर लिया है! वे मर चुके हैं! बुरातिनो मुंह के बल गिर गया – उसकी नाक ज़मीन में गहरे धंस गई.

वह केवल अभी समझ पाया थाकि दोस्त उसे कितने प्यारे हैं. मल्वीना चाहे पढ़ाने का काम करती रहे, प्येरो हज़ारों बार निरंतर कविताएँ सुनाता रहे, - बुरातिनो अपने दोस्तों को फिर से देखने के लिए सुनहरी चाबी भी दे देता.

उसके सिर के पास खामोशी से मिट्टी का एक मुलायम टुकड़ा उठा, गुलाबी हथेलियों वाला रोंएदार चूहा रेंगकर बाहर निकला, तीन बार छींककर उसने कहा:

“मैं अंधा हूँ, मगर मैं बढ़िया सुन सकता हूँ. यहाँ एक गाड़ी आई थी, जिसे भेडें खींच रही थीं. उसमें बैठा था लीस, ‘मूर्खों के शहर का गवर्नर, और जासूस. गवर्नर ने हुक्म दिया:

“उन बदमाशों को गिरफ्तार किया जाए, जिन्होंने ड्यूटी करते हुए मेरे सर्वश्रेष्ठ पुलिसवालों को पीटा! गिरफ्तार करो! जासूसों ने जवाब दिया:

“त्याफ!”      

गुफ़ा के भीतर लपके, और वहां बेतहाशा हाथापाई शुरू हो गयी. तुम्हारे दोस्तों को बाँध दियागठरियों समेत गाड़ी में डाल दिया, और चले गए.

नाक ज़मीन में घुसाए पड़े रहने में क्या फ़ायदा था! बुरातिनो उछला और पहियों के निशानों के पीछे पीछे भागने लगा. तालाब का चक्कर लगाया, घनी घास वाले खेत में पहुंचा. चल रहा था, चल रहा था...उसके दिमाग में कोई प्लान नहीं था. साथियों को बचाना है – बस इतना ही. चट्टान तक पहुंचा, जहां से पिछली से पिछली रात को कांटेदार पौधों पर गिर पड़ा था. नीचे एक गंदा तालाब देखा, जिसमें कछुआ रहता था. तालाब के रास्ते पर एक गाड़ी उतर रही थी, जिसे नोचे हुए रोओं वाली, कंकाल जैसी दो कमज़ोर भेड़ें खींच रही थीं.

बॉक्स पर फूले फूले गालों वाला, सोने का चष्मा पहने एक मोटा बिल्ला बैठा था, - उसने गवर्नर के यहां कान में गुप्त रूप से कानाफूसी एजेंट के रूप में काम किया था. उसके पीछे – महत्वपूर्ण लोमड़ी, गवर्नर...बंडलों पर लेटे थे मल्वीना, प्येरो और पूरे बदन पूर पट्टियां बंधा अर्तेमोन, - हमेशा अच्छी तरह कंघी की गयी उसकी पूँछ ब्रश के समान धूल पर घिसट रही थी.

गाड़ी के पीछे चल रहे थे दो जासूस – डॉबरमैन - पिंसर.   

अचानक जासूसी कुत्तों ने अपने थोबड़े उठाए और चट्टान के ऊपर बुरातिनो की सफ़ेद टोपी देखी.

तेज़ छलांगों से पिंसर खड़ी चट्टान पर चढ़ने लगे. मगर इससे पहले कि वे ऊपर तक पहुंचते, बुरातिनो ने, - उसे न तो छुपने के लिए कोई जगह थी, ना ही वहां से भागने की – सिर के ऊपर हाथ रखे और – अबाबील की तरह – सबसे ऊंची जगह से नीचे कूद गया, गंदे तालाब में, जो हरी काई से ढंका था.

उसने हवा में वक्र बनाया, और, अगर तेज़ हवा के झोंके न होते तो निश्चित ही, तालाब में आंटी तर्तीला के संरक्षण में पहुंचता.

हवा ने हल्के, लकड़ी के बुरातिनो को पकड़ लियाउसे घुमाया, दोहरे कॉर्क स्क्रू की तरह घुमाया, एक किनारे फेंक दिया, और वह, गिरते हुए, सीधे गाड़ी में गवर्नर लोमड़ी के सिर पर गिरा.        

सुनहरा चश्मा पहने मोटा बिल्ला अचानक बक्से से गिर पड़ा, और चूंकि वह बदमाश और डरपोक थातो उसने नाटक किया कि बेहोश हो गया है.

लोमड़ी गवर्नरजो खुद भी हताश डरपोक था, चिल्लाते हुए ढलान पर भागा और फ़ौरन बिज्जू के बिल में घुस गया. वहां उसके साथ अच्छा नहीं हुआ : ऐसे मेहमानों से बिज्जू कठोरता से पेश आते है.

भेड़ें भाग गईं, गाड़ी पलट गयी, मल्वीना, प्येरो और अर्तेमोन थैलियों समेत लुढ़कते हुए रंगबिरंगे फूलों पर लुढ़क गए.

ये सब इतनी तेज़ी से हुआ, कि आप, प्यारे पाठकों, अपने हाथों की सारी उंगलियाँ भी न गिन पाते.

डॉबरमैन – पिंसर बड़ी बड़ी छलांगें लगाते हुए, चट्टान से नीचे कूद गए. पलटी हुई गाड़ी के पास पहुँचने पर उन्होंने मोटे बिल्ले को बेहोश देखा. पौधों पर गिरे हुए लकड़ी के छोटे छोटे आदमियों को और पट्टियां बंधे हुए झबरे कुत्ते को देखा.

मगर लोमड़ी गवर्नर का कहीं अता पता नहीं था.

वह गायब हो गया – जैसे ज़मीन में गड़प हो गया वो, जिसकी जासूसों को हिफाज़त करनी थी, आंख की पुतली की तरह.

पहले जासूस ने अपना थोबड़ा उठाकर, निराशाभरी चीख निकाली.

दूसरे जासूस ने भी वैसा ही किया:

“आय-आय-आय, आय-ऊ-ऊ-ऊ!...”

वे लपके और पूरी ढलान छान मारी. फिर से निराशा से विलाप करने लगे, क्योंकि उन्हें दिखाई दे रहे थे चाबुक और लोहे की जाली.

अपमान से अपना पिछला भाग हिलाते हुए, वे ‘मूर्खों के शहर पहुंचे, ताकि पुलिस विभाग में झूठ बोल दें, कि गवर्नर को ज़िंदा ही आसमान में उठा लिया गया था, - तो रास्ते में सोच रहे थे कि अपनी सफ़ाई में क्या कहेंगे. बुरातिनो ने हौले से अपने जिस्म को टटोला – हाथ, पैर, सलामत थे. वह पौधों के बीच रेंग गया और मल्वीना तथा प्येरो को रस्सियों से आज़ाद कर दिया.

मल्वीना ने एक भी लब्ज़ कहे बिना, बुरातिनो के कंधे पर हाथ रखा, मगर उसे चूम नहीं पाई – उसकी लम्बी नाक बाधा डाल रही थी.

प्येरो की बाँहें कुहनियों तक फटी हुई थीं, गालों से सफ़ेद पाउडर गिर रहा था, और पता चला कि उसके गाल सामान्य ही हैं – गुलाबी, कविताओं के प्रति उसके प्यार के बावजूद.

“मैं बहादुरी से लड़ा,” कर्कश आवाज़ में उसने कहा. “अगर टांग अडाकार मुझे न रोका गया होता – तो वे मुझे पकड़ नहीं पाते.”