सोमवार, 2 फ़रवरी 2026

बुरातिनो - 16

 

16


बुरातिनो ‘मूर्खों के देस’ से भागता है और दुर्दैवी कॉम्रेड से मिलता है.


अनुवाद: चारुमति रामदास


कछुए तर्तीला ने ‘मूर्खों के देस से जाने का रास्ता नहीं बताया.

बुरातिनो जहां सींग समाएं भागा जा रहा था. काले पेड़ों के पीछे तारे चमक रहे थे. रास्ते के ऊपर चट्टानें लटक रही थीं. संकरे रास्ते पर कोहरे का बादल था.

अचानक बुरातिनो के सामने एक भूरी गाँठ उछलने लगी. तभी कुत्ते का भौंकना भी सुनाई दिया.

बुरातिनो चट्टान से चिपक गया. उसकी बगल में ‘मूर्खों के शहर की पुलिस के दो बुलडॉग क्रूरता से, सूंघते हुए भागकर निकल गए.  

भूरी गांठ रास्ते से बगल में छिटक गई – ढलान पर. बुलडॉग – उसके पीछे पीछे.

जब पैरों की धमधम और कुत्तों के भौंकने की आवाज़ दूर चली गयी तो बुरातिनो ने इतनी तेज़ी से भागना शुरू कर दिया कि काली टहनियों के पीछे तारे जल्दी-जल्दी तैरने लगे.

अचानक भूरी गाँठ फिर से उछल कर रास्ते पर आ गयी. बुरातिनो ने देख लिया, कि यह एक ख़रगोश है, और उसके ऊपर, उसके कान पकडे, एक कमजोर छोटा आदमी बैठा है.

ढलान से कंकड़ गिर रहे थे, - बुलडॉग खरगोश के पीछे पीछे रास्ते पर उछले, और फिर सब कुछ शांत हो गया.

बुरातिनो इतनी तेज़ी से भाग रहा था, कि अब तारे, मानो गुस्से से काली टहनियों के पीछे भाग रहे थे. 

तीसरी बार भूरे खरगोश ने उछल कर रास्ता पार किया. छोटे आदमी का सिर टहनी से टकराया, वह उसकी पीठ से फिसला और सीधे बुरातिनो के पैरों के पास गिरा.

“र्रर्रर्र – गाफ़! पकड़ो उसे!” खरगोश के पीछे पीछे पुलिस के बुलडॉग तेज़ी से भाग रहे थे: उनकी आँखों में इतना गुस्सा भरा था, कि उन्होंने न तो बुरातिनो को देखा , न ही कमजोर, पीले आदमी को.

“माफ़ करना माल्विना, हमेशा के लिए अलबिदा!” रोनी आवाज़ में आदमी बिसूर रहा था.

बुरातिनो उसके ऊपर झुका और उसने अचरज से देखा, कि ये तो प्येरो है लम्बी आस्तीनों वाली सफ़ेद कमीज़ में.

वह पहियों वाली नाली में सिर के बल पड़ा था और, ज़ाहिर है, स्वयं को मरा हुआ समझ रहा था और ज़िंदगी से जुदा होते हुए रहस्यमय वाक्य दुहरा रहा था: “ अलबिदा, मल्विना, अलबिदा हमेशा के लिए!” 

बुरातिनो ने उसे हिलाना शुरू किया, उसकी टांग पकड़ कर खींची, - प्येरो के शरीर में कोई हलचल नहीं हुई. तब बुरातिनो ने जेब में पड़ी हुई जोंक को निकाला और बेजान आदमी की नाक के पास रखा.

जोंक ने ज़्यादा कुछ सोचे बिना उसकी नाक पर काट लिया. प्येरो फ़ौरन उठकर बैठ गया, उसने सिर हिलाया, जोंक को बाहर खींचा और कराहा:

“आह, लगता है कि अभी मैं ज़िंदा हूँ!”

बुरातिनो ने उसे गालों से पकड़ लिया, सफ़ेद, टूथ पावडर जैसे, उन्हें चूमा और पूछा:

“तुम यहाँ कैसे आये? तुम भूरे खरगोश पर क्यों सवार थे?

“बुरातिनो, बुरातिनो,” – प्येरो ने भय से चारों ओर देखते हुए जवाब दिया, - “मुझे फ़ौरन छुपा दो...क्योंकि कुत्ते भूरे खरगोश का पीछा नहीं कर रहे थे, - वे मेरा पीछा कर रहे थे...सिन्योर कराबास बराबास दिन रात मेरा पीछा करता रहता है. उसने ‘मूर्खों के शहर में पुलिस के कुत्तों को किराए पर लिया है और कसम खाई है कि मुझे ज़िंदा या मुर्दा – हर हाल में पकड़ेगा.”

दूर कहीं फिर से कुत्ते भौंके. बुरातिनो ने प्येरो को आस्तीन से पकड़ लिया और उसे खींच कर मिमोज़ा (छुई मुई का पेड़ – अनु.) की बेलों में ले गया, जो पीले, सुगन्धित, गोल गोल बटन जैसे फूलों से ढंकी हुई थीं.

वहां सड़े हुए पत्तों पर लेटे हुए, प्येरो ने फुसफुसाते हुए उससे कहना शुरू किया:  

“जानते हो, बुरातिनो, एक बार रात को हवा चिंघाड़ रही थी, घनघोर बारिश हो रही थी...”

प्येरो बताता है, कि वह कैसे खरगोश पर सवार होकर ‘मूर्खों के देस पहुँच गया.

“जानते हों बुरातिनो, एक बार रात को हवा चिंघाड़ रही थी, घनघोर बारिश हो रही थी. सिन्योर कराबास बराबास भट्टी  के पास बैठा पाईप के कश ले रहा था. सभी गुडिया सो गई थीं. मैं अकेला ही नहीं सोया था. मैं नीले बालों वाली लड़की के बारे में सोच रहा था...”

“सोचा भी तो किसके बारे में, बेवकूफ!” बुरातिनो ने उसकी बात काटी. “मैं कल रात को इस लड़की के पास से भाग आया – मकड़ियों वाली कोठरी से...”

“क्या? क्या तुमने नीले बालों वाली लड़की को देखा है? तुमने मेरी मल्वीना को देखा है?

“सोचो – गज़ब की है! रोतली और सताने वाली...”

प्येरो हाथ नचाते हुए उछल पड़ा.

“मुझे उसके पास ले चल...अगर तुम मल्वीना को ढूंढने में मेरी मदद करोगे, तो मैं तुम्हें सुनहरी चाबी का रहस्य बताऊंगा...”

“क्या!” बुरातिनो खुशी से चीखा. – “तुम सुनहरी चाबी का रहस्य जानते हो?

“जानता हूँ कि चाबी कहां है,  कैसे उसे हासिल करना है, जानता हूँ, कि उससे एक ख़ास दरवाज़ा खोलना है...मैंने उस रहस्य के बारे में सुन लिया था, और इसलिए सिन्योर कराबास बराबास मुझे पुलिस के कुत्तों के साथ ढूंढ रहा है.”

बुरातिनो फ़ौरन डींग मारना चाहता था, कि रहस्यमय चाबी उसकी जेब में है. कहीं बक न दे, इसलिए उसने सिर से अपना टोप खींचा और उसे मुंह में ठूंस लिया.

प्येरो उसे मल्वीना के पास ले चलने के लिए विनती कर रहा था. बुरातिनो ने ऊंगलियों की सहायता से इस बेवकूफ को समझाया, कि अभी अन्धेरा है और खतरा है, और जब सुबह होगी तो वे भागकर बच्ची के पास जायेंगे.        

प्येरो को फिर से मिमोसा की झाड़ियों के नीचे छिपने पर मजबूर करने के बाद, बुरातिनो खरखरी आवाज़ में बोला, क्योंकि उसका मुंह टोपी से बंद था:

“शुशुनाओ...”

“तो, - एक बार रात को हवा खूब शोर मचा रही थी...”

“इस बारे में तुम पहले ही शुशुना चुके हो...”

“तो,”- प्येरो कहता रहा, “ मैं, समझ रहे हो, सो नहीं रहा हूं, और अचानक सुनता हूँ: खिड़की पर किसी ने जोर से दस्तक दी.”

सिन्योर कराबास बराबास गरजा:

“ऐसे कुत्ते मौसम में कौन कडमडाया है?

“ये मैं हूँ – दुरेमार,” खिड़की के बाहर से जवाब आया, “औषधीय जोंक बेचने वाला. मुझे आग के पास अपने आप को सुखाने की इजाज़त दीजिये.”

“मुझे, समझ रहे हो ना, खूब इच्छा हो रही थी ये देखने की, कि औषधीय जोंकों के विक्रेता कैसे होते हैं. और – देखता हूँ:

सिन्योर कराबास बराबास कुर्सी से उठा, हमेशा की तरह उसने दाढ़ी पर पैर रखा, गालियाँ दीं, और दरवाज़ा खोला.

भीतर आया एक लंबा, गीला-गीला आदमी, छोटे-बेहद छोटे चेहरे वाला, इतना झुर्रियों वाला, जैसे गुच्ची मशरूम. उसने पुराना हरा ओवरकोट पहना था, बेल्ट से चिमटे, हुक और हेयरपिंस लटक रहे थे. उसने हाथों में टीन का डिब्बा और जाल पकड़ रखा था.

“अगर आपके पेट में दर्द है,” उसने इस तरह झुकते हुए कहा मानो उसकी कमर बीच से टूटी हो, “अगर आपको तेज़ सिर दर्द हो रहा हो अगर कानों में तेज़ खटखट हो रही हो, तो मैं कानों के पीछे आधा दर्जन बढ़िया जोंकें रख सकता हूँ.”

सिन्योर कराबास बराबास  गरजा:

“शैतान ले जाए, कोई जोंकें-वोंकें नहीं चाहिए! आग के पास जितना चाहो, गरमा सकते हो.”

दुरेमार भट्टी की ओर पीठ किये खड़ा था.

तभी उसके हरे कोट से भाप निकलने लगी और उसमें से कीचड़ की बू आने लगी.

“जोंकों का व्यापार बहुत बुरा चल रहा है,” उसने फिर से कहा. “अगर आपकी हड्डियों में दर्द है तो...ठन्डे पोर्क के एक टुकड़े और एक ग्लास वाईन के लिए मैं आपकी जांघ पर एक दर्जन बेहद बढ़िया जोंकें रखने के लिए तैयार हूँ...”    

“शैतान ले जाए, कोई जोंकें-वोंकें नहीं चाहिए!” कराबास बराबास चीखा. “ पोर्क खाओ और वाईन पी लो.”

दुरेमार ने पोर्क खाना शुरू किया, उसका चेहरा सिकुड़ रहा था और फ़ैल रहा था, रेज़िन की तरह. खाने और पीने के बाद, उसने एक चुटकी तम्बाकू मांगी.

“सिन्योर, मैं तृप्त हूँ और गरमा गया हूँ,” उसने कहा. “आपकी मेहमाननवाज़ी चुकाने के लिए मैं आपको एक रहस्य बताऊंगा.”

सिन्योर कराबास बराबास ने पाईप का कश लिया और जवाब दिया:

“दुनिया में सिर्फ एक ऐसा रहस्य है, जो मैं जानना चाहता हूँ. बाकी सब पर तो मैं थूकता हूँ.”

“सिन्योर,” दुरेमार ने फिर कहा, “मैं एक महान रहस्य जानता हूँ, कछुए तर्तीला ने उसे मुझे बताया था.”

इन शब्दों को सुनते ही कराबास बराबास ने आँखें बाहर निकालीं, उछला, दाढी में उलझ गया, सीधा घबराए हुए दुरेमार की ओर उछला, उसे अपने पेट से चिपका लिया और सांड की तरह गरजा:

“प्यारे दुरेमार, बेशकीमती दुरेमार, बोल, जल्दी बोल कि तुझे कछुए तर्तीला ने क्या बताया था!”

तब दुरेमार ने ये किस्सा सुनाया:

“मैं ‘मूर्खों के शहर के पास एक गंदे तालाब में जोंकें पकड़ रहा था. चार सोल्दा रोज़ की मजूरी पर मैंने एक गरीब आदमी को किराए पर रखा, - वह अपने कपड़े उतार देता, तालाब में गर्दन तक जाता और वहां खड़ा रहता जब तक कि उसके नंगे बदन से जोंकें न चिपक जातीं.

तब वह बाहर किनारे पर आता, मैं उसके बदन से जोंकें इकट्ठा करता और उसे फिर से तालाब में भेज देता.

जब इस तरह से हमने काफी सारी जोंकें इकट्ठा कर लीं, तो अचानक पानी के भीतर से सांप का सिर दिखाई दिया.

“सुन, दुरेमार,” सिर ने कहा, “तूने हमारे ख़ूबसूरत तालाब की सारी आबादी को डरा दिया है, तुम पानी को गंदा कर रहो हो, तुम मुझे नाश्ते के बाद चैन से आराम नहीं करने देते...ये बेहूदगी कब बंद होगी?...”

मैंने देखा कि वह साधारण कछुआ है, और, ज़रा भी डरे बिना मैंने जवाब दिया:

“जब तक आपके गंदे डबरे की सारी जोंकें नहीं पकड़ लेता...”

मैं आपको खरीदने के लिए तैयार हूँ, दुरेमार, ताकि तुम हमारे तालाब को अकेला छोड़ दो, और फिर कभी वापस न आओ.”

“तब मैं कछुए का मज़ाक उड़ाने लगा:

“आह, तू, बूढ़ी तैरने वाली सूटकेस, बेवकूफ आंटी तर्तीला, तुम मुझे क्या देकर खरीदोगी? क्या अपनी हडीली छत से, जहां अपने पंजे और सिर छुपाती हो...मैं तुम्हारी छत स्कैलप्स के लिए बेच दूंगा...” 

कछुआ गुस्से से हरा हो गया और मुझसे बोला:

“तालाब के तल पर जादू की चाबी पड़ी है...मैं एक आदमी को जानता हूँ, - वह इस चाबी को पाने के लिए दुनिया में कुछ भी करने को तैयार है...”

दुरेमार इन शब्दों को कह भी नहीं पाया था, कि कराबास बराबास पूरी ताकत से चीखा:

“वो आदमी – मैं हूँ! मैं! मैं! मेरे प्यारे दुरेमार, तो तुमने कछुए से चाबी क्यों नहीं ली?

“लो, और सुनो!” – दुरेमार ने जवाब दिया और अपने चेहरे की झुर्रियों को इकट्ठा किया, जिससे वह उबले हुए कुकुरमुत्ते की तरह हो गया. – “ये भी सुनो! - सबसे बेहतरीन जोकों के बदले कोई एक चाबी...”

संक्षेप में मेरा कछुए से झगड़ा हो गया, और उसने, पानी से पंजा निकाल कर कहा:

“कसम खाता हूँ – न तो तुमको , न ही कोई और जादू की चाबी को पा सकेगा. कसम खाता हूँ – वह उसी आदमी को मिलेगी, जो तालाब की पूरी आबादी को उसे मुझसे मांगने के लिए मना लेगा...”

ऊपर उठे पंजे से कछुआ पानी में डूब गया.”

एक भी पल खोये बिना ‘मूर्खों के देस’ भागो!” कराबास बराबास ने जल्दी जल्दी अपनी टोपी और लालटेन पकड़ते हुए दाढ़ी के सिरे को अपनी जेब में घुसा लिया. “मैं तालाब के किनारे बैठ जाऊंगा. मैं प्यार से मुस्कुराऊंगा. मैं मेंढकों से, टेडपोल से, पानी के भौंरों से भीख मांगूंगा...मैं हिचकियाँ लूंगा, किसी अकेली गाय की तरह, कराहूँगा, बीमार मुर्गी की तरह, रोऊँगा मगरमच्छ की तरह. मैं सबसे छोटे मेंढक के सामने घुटनों पर बैठ जाऊंगा...चाबी मेरे ही पास होनी चाहिए! मैं शहर जाऊंगा, मैं एक घर में जाऊंगा, मैं सीढ़ियों के नीचे वाले कमरे में झाकूंगा...मैं छोटा सा दरवाज़ा ढूंढूंगा, - उसके करीब से सब गुज़रते हैं, और किसी की भी उस पर नज़र नहीं पड़ती. चाबी को ‘की होल में घुसाऊंगा...”

“इस समय, समझ रहे हो, बुरातिनो,” – मिमोसा के पेड़ के नीचे सुन्दर पत्तियों पर बैठकर प्येरो कह रहा था, - “मुझे यह सब इतना दिलचस्प लगा, कि मैं परदे के पीछे से पूरा बाहर निकल आया.”


शुक्रवार, 30 जनवरी 2026

बुरातिनो - 15

 

15

पुलिस वाले बुरातिनो को पकड़ लेते हैं और अपनी सफ़ाई में एक भी शब्द नहीं कहने देते. 

 

अनुवाद: चारुमति रामदास 


लोमड़ी अलीसा सोच रही थी कि बुरातिनो सोने के लिए जाएगा, मगर वह कचरे के ढेर पर बैठा रहा, इत्मीनान से नाक बाहर खींचे.

तब अलीसा ने बिल्ले को उस पर नज़र रखने के लिए कहा, और खुद नज़दीक के पुलिस स्टेशन में भागी.

वहां, धुएं से भरे कमरे में, स्याही के धब्बों से ढंकी मेज़ के पीछे, ड्यूटी पर तैनात बुलडॉग खूब खर्राटे ले रहा था। लोमड़ी ने भलमनसाहत से कहा:

“महाशय, साहसी ड्यूटी ऑफिसर, क्या एक सड़कछाप चोर को गिरफ्तार कर सकते हैं? इस शहर के सभी अमीर और आदरणीय निवासियों के सिर पर भयानक खतरा मंडरा रहा है.

ड्यूटी वाला बुलडॉग, जो आधी नींद से जाग गया, इतनी ज़ोर से भौंका कि लोमड़ी के नीचे डर के मारे एक डबरा बन गया.

“चोर! हूँ!”

लोमड़ी ने स्पष्ट किया, कि खतरनाक चोर-बुरातिनो को एक खाली जगह पर देखा गया.

ड्यूटी ऑफिसर ने, अभी भी गुर्राते हुए, घंटी बजाई.     

दो डॉबरमैने-पिंसर जासूस कमरे में घुस गए, जो कभी भी नहीं सोते थे, किसी पर भी भरोसा नहीं करते थे, और खुद अपने आप पर भी आपराधिक इरादों में लिप्त होने का संदेह करते थे.

ड्यूटी ऑफिसर ने उन्हें विभाग में खतरनाक अपराधी को ज़िंदा या मुर्दा लाने का हुक्म दिया. 

जासूसों ने संक्षेप में उत्तर दिया:

“त्याफ!”

और ख़ास चालाक अंदाज़ में, पिछले पैरों को बगल में रखते हुए, बंजर भूमि की ओर सरपट भागे.

आख़िरी सौ कदम वे अपने पेटों पर रेंग कर गए और अचानक बुरातिनो पर कूदे, उसे बगल के नीचे से पकड़ लिया और खींचते हुए डिपार्टमेंट ले गए. बुरातिनो पैर पटकता रहा, उनसे बताने की विनती करता रहा – किसलिए? किसलिए?

जासूसों ने जवाब दिया:

“वहां सब सुलझा लेंगे...”

लोमड़ी और बिल्ले ने, बिना समय गंवाए खोदकर सोने के चार सिक्के बाहर निकाले. लोमड़ी इतनी होशियारी से  पैसे बांटने लगी, कि बिल्ले को बस एक ही सिक्का मिला, और उसे – तीन.

बिल्ले ने खामोशी से अपने पंजे उसके मुंह पर गड़ा दिए.

लोमड़ी ने उसे अपने पंजों से कसकर पकड़ लिया. और वे दोनों कुछ देर बंजर ज़मीन पर गोले की तरह लुढ़कते रहे. बिल्ले और लोमड़ी के बालों के गुच्छे चाँद की रोशनी में उड़ रहे थे.

किनारे से एक दूसरे की चमड़ी नोंचकर, उन्होंने आपस में सिक्के आधे-आधे बांट लिए और उसी रात को शहर से गायब हो गए.

इस बीच जासूस बुरातिनो को पुलिस स्टेशन ले आए.

ड्यूटी पर तैनात बुलडॉग मेज़ के पीछे से बाहर आया और उसने खुद बुरातिनो की जेबों की तलाशी ली.

सिर्फ शकर के एक छोटे से टुकड़े और बादाम केक के चूरे के अलावा और कुछ भी न पाकर, ड्यूटी पर तैनात अफसर ने बुरातिनो को खून की प्यासी नज़रों से देखा:

“तूने तीन अपराध किये हैं, कमीने : तू - बेघर है, बगैर पासपोर्ट के है और बेकार है. इसे शहर के बाहर ले जाकर तालाब में डुबो दिया जाए.”  

जासूसों ने जवाब दिया:

“त्याफ!”

बुरातिनो ने पापा कार्लो के बारे में, अपने कारनामों के बारे में बताना चाहा. मगर, सब बेकार! जासूसों ने उसे पकड़ लिया, सरपट खींचते हुए शहर के बाहर ले गए और पुल से गहरे, गंदे तालाब में फेंक दिया, जो मेंढकों से, जोंकों से और पानी के भौंरों की गन्दगी से लबालब भरा था.   

बुरातिनो पानी में गोते लगाने लगा, और हरे रंग की बेलों ने उसे लपेट लिया.

बुरातिनो तालाब में रहने वालों से दोस्ती करता है, चार सोने के सिक्कों के गुम होने के बारे में जानता है और कछुए तोर्तिला से सुनहरी चाबी प्राप्त करता है.  

ये नहीं भूलना चाहिए कि बुरातिनो लकड़ी का था, और इसलिए डूब नहीं सकता था. फिर भी, वह इतना डर गया था, कि हरी काई से लिपटा, बड़ी देर तक पानी पर पड़ा रहा.

उसके चारों ओर तालाब में रहने वाले प्राणी इकट्ठा हो गए: अपनी बेवकूफियों की वजह से मशहूर काले पेट वाले मेंढक, चप्पुओं जैसे पिछले पंजों वाले पानी के भंवरे, जोंकें, लार्वा, जो सामने पड़ी हर चीज़ खा लेते हैं, यहां तक कि अपने आप को भी, और अंत में विभिन्न प्रकार के छोटे छोटे तन्तुयुक्त कीड़े.

मेंढक अपने कड़े होठों से उसे गुदगुदी कर रहे थे और खुशी से हुड की लटकन चबा रहे थे. लीचें उसके जैकेट की जेब में घुस गईं. एक पानी का भौंरा कई बार उसकी नाक पर चढ़ गया, जो पानी के काफ़ी ऊपर निकली हुई थी, और वहां से पानी में कूद जाता – पंछी की तरह.   

छोटे छोटे तन्तुयुक्त कीड़े, अपने बालों में उलझते, जो हाथों और पैरों के बदले उनके शरीरों पर थे, उनसे मुक्त होने की कोशिश करते, खाने के लिए कोई चीज़ ढूँढने की कोशिश कर रहे थे, मगर खुद ही पानी के भौरों के मुंह में गिर रहे थे.

बुरातिनो, आखिरकार इस सबसे उकता गया, वह पानी पर अपने पंजे चलाने लगा:

“भाग जाओ! मैं आपके लिए कोई मरी हुई बिल्ली नहीं हूँ.”

पानी में रहने वाले तितर-बितर हो गए. वह पेट के बल मुड़ा और तैरने लगा.

पानी की लिली के गोल-गोल पत्तों पर चाँद की रोशनी में बड़े मुंह वाले मेंढक बैठे थे, वे आंखें बाहर निकाले बुरातिनो की और देख रहे थे.

“कोई कटलफिश तैर रही है,” एक मेंढक टर्राया.

“नाक, सारस की तरह है,” दूसरा टर्राया.

“यह समुद्री मेंढक है,” तीसरा टर्राया.

बुरातिनो, कुछ देर आराम करने के लिए, वाटर-लिली के बड़े पत्ते पर बाहर आया. उसके ऊपर बैठ गया, घुटनों को कसकर पकड़ लिया और दांत किटकिटाते हुए बोला:

“सारे लड़के और लड़कियां जी भर के दूध पी चुके, गरम बिस्तरों में सो रहे हैं, सिर्फ मैं अकेला गीले पत्ते पर बैठा हूँ...मेंढकों, मुझे खाने के लिए कुछ दो.”

मेंढक, जैसा सबको मालूम है, बेरहम होते हैं. मगर ये सोचना गलत है कि उनका दिल नहीं होता. जब बुरातिनो ने दांत किटकिटाते हुए अपने दुर्भाग्यपूर्ण कारनामों के बारे में बताना शुरू किया, तो मेंढक एक के बाद एक उछलने लगे, अपने पिछले पैर उछालते हुए तालाब की तली में कूद गए.

वहां से वे एक मरा हुआ भौंरा, ड्रैगनफ्लाय का पंख, मिट्टी का टुकड़ा, ‘क्रस्तेशियन रो’ का एक दाना और कुछ सड़ी हुई जड़ें लाए.

ये सारी खाने की चीजें बुरातिनो के सामने रखकर मेंढक फिर से ‘वाटर लिली’ के पत्तों पर चढ़ गए और पत्थर जैसे बैठ गए, बाहर निकली आंखें और बड़े मुख वाले सिर उठाये.  

बुरातिनो ने सूंघा और मेंढकों की लाई हुई चीज़ों को मुंह में डाला.

“मुझे उल्टी आ रही है,” उसने कहा, “कैसा घिनौना खाना है!...”

तब सारे मेंढक फिर से एक साथी पानी में घुस गए...

तालाब की सतह पर हरे रंग का पट्टा सरसराया, और एक बड़ा, भयानक सांप का सिर प्रकट हुआ. वह उस पत्ते की और तैरने लगा, जिस पर बुरातिनो बैठा था.

उसकी टोपी के ऊपर वाली लटकन सिर के बल खड़ी हो गयी. खौफ़ के मारे वह पानी में गिरते-गिरते बचा.

मगर यह सांप नहीं था. यह एक आधी अंधी आंखों वाला, अधेड़ कछुआ तर्तीला था, जो ज़रा भी खतरनाक नहीं था. 

आह तू, बुद्धिहीन, हर किसी पर विश्वास करने वाला, छोटे विचारों वाला!” तर्तीला ने कहा. “तुझे तो घर में बैठकर खूब मेहनत से पढ़ना चाहिए! और तू पहुँच गया ‘मूर्खों के देस में!”

“क्योंकि मैं पापा कार्लो के लिए और ज़्यादा सोने के सिक्के प्राप्त करना चाहता हूँ...मैं बहुहुहुहुत अच्छा और समझदार बालक हूँ...”

“तेरे पैसे बिल्ले और लोमड़ी ने चुराए हैं,” कछुए ने कहा. “वे तालाब के पास से भाग कर जा रहे थे, पानी पीने के लिए रुके थे, और मैंने उन्हें डींग मारते हुए सुना, कि तुम्हारे पैसे ज़मीन से खोद कर निकाले हैं, और उनके कारण वे आपस में झगड़ पड़े...ओह, तू बुद्धिहीन, हरेक पर विश्वास करने वाले, छोटे विचारों वाले!”

“डांटना नहीं चाहिए,” बुरातिनो बुदबुदाया, “ऐसी हालत में इंसान की मदद करना चाहिए...अब मैं क्या करूंगा? ओय-ओय-ओय!...पापा कार्लो के पास लौटकर कैसे जाऊंगा? आय-आय-आय!...”

उसने मुट्ठियों से आंखें पोंछी, और इतनी दयनीयता से कराहा, कि सारे मेंढकों एकदम गहरी आह भरी:

“ऊह-ऊह... तर्तीला, इंसान की मदद करो.”

कछुआ बड़ी देर तक चांद की ओर देखता रहा, उसे कुछ याद आया...

“एक बार मैंने इसी तरह इंसान की मदद की थी, मगर उसने बाद में मेरी दादी और दादा की खाल से कछुए  की कंघियाँ बनाईं,” उसने कहा. और फिर से बड़ी देर तक चांद की तरफ़ देखता रहा. “ अच्छा, यहाँ बैठ, नन्हे इंसान, और मैं रेंगते हुए तालाब के तल तक जाता हूँ, - हो सकता है, एक काम की चीज़ मिल जाए.”

उसने सांप जैसे सिर को भीतर खींच लिया और धीरे धीरे पानी के नीचे चला गया.

मेंढक फुसफुसा रहे थे:

“कछुआ तर्तीला कोई बड़ा रहस्य जानता है.”       

बहुत सारा समय बीत गया.

चाँद पहाड़ियों के पीछे डूबने लगा था.

हरी काई फिर से हिलने लगी, कछुआ प्रकट हुआ, मुंह में छोटी सी सोने की चाबी पकड़े.

उसने उसे बुरातिनो के पैरों के पास एक पत्ते पर रख दिया.

“बुद्धिहीन, मूर्खों पर भरोसा करने वाले, छोटे विचारों के,” – तर्तीला ने कहा, “दुखी न हो, कि लोमड़ी और बिल्ले ने तुम्हारे सोने के सिक्के चुरा लिए. मैं तुम्हें ये चाबी देता हूँ. उसे तालाब के तल पर एक आदमी ने गिरा दिया था, जिसकी दाढ़ी इतनी लम्बी थी कि वह उसे जेब में घुसा देता था, जिससे दाढी उसके चलने में बाधा न डाले. आह, कितनी मिन्नत कर रहा था, कि मैं तालाब के तल से ये चाबी खोज कर लाऊँ!...’

तर्तीला ने आह भरी, कुछ देर खामोश रहा, और फिर से ऐसी गहरी सांस ली कि पानी से बुलबुले उठने लगे...

“मगर मैंने उसकी मदद नहीं की, मैं तब लोगों पर बेहद गुस्सा था मेरी दादी और दादा की वजह से, जिनकी खाल से कछुए की कंघियां बनाई गयी थीं. दाढी वाले आदमी ने इस चाबी के बारे में बहुत कुछ बताया था, मगर मैं सब कुछ भूल गया. सिर्फ़ इतना याद है, कि इससे कोई दरवाज़ा खोला जा सकता है और इससे खुशी मिलेगी...”

बुरातिनो का दिल धड़कने लगा, आंखें जलने लगीं. वह अपने सभी दु:खों के बारे में भूल गया. उसने जैकेट की जेब से जोंकें निकालीं, वहां चाबी रखी, नम्रता से कछुए तर्तीला और मेंढकों को धन्यवाद दिया, पानी में कूद गया और किनारे की तरफ़ तैरने लगा.

जब वह काली छाया की तरह किनारे पर दिखाई दिया, तो मेंढकों ने पीछे से चिल्लाकर कहा:

“बुरातिनो, चाबी न खोना!”