मंगलवार, 10 फ़रवरी 2026

बुरातिनो - 19

  

19

गुफ़ा में


अनुवाद: चारुमति रामदास 


मल्वीना और प्येरो सरकंडों के बीच एक नम, गर्म टीले पर बैठे थे. मकड़ी के जाल ने उन्हें ऊपर से ढांक दिया था, जो अटा पडा था पतंगों के पंखों, और बेहाल मच्छरों से.

छोटे छोटे नीले पंछी, जो एक टीले से दूसरे पर उड़ रहे थे, प्रसन्न अचरज से फूट फूट कर रोती हुई बच्ची को देख रहे थे.

दूर से हताशापूर्ण सिसकियाँ और चीखें सुनाई दे रही थीं, - ये अर्तेमोन और बुरातिनो थे, ज़ाहिर है, उन्होंने अपने जीवन की बहुत बड़ी कीमत लगाई थी.

“डर लग रहा है, डर लग रहा है!” मल्वीना बार बार दुहरा रही थी और हताशा से बर्डोक के पत्ते से अपना मुंह ढांक रही थी. 

प्येरो अपनी कविता से उसे सांत्वना देने की कोशिश कर रहा था :

 

बैठे हैं हम टीले पर,

जहां खिलते हैं फूल, -

पीले, प्यारे,

बेहद खुशबू वाले.

गुजारेंगे पूरी गर्मियां

हम इसी टीले पर,

आह – एकांत में,

सबको चकित करते हुए...

मल्वीना उस पर पांव पटकने लगी:

“आपने मुझे बेज़ार कर दिया, बेज़ार कर दिया है, बच्चे! ताज़ा फूल तोड़ो, - देख तो रहे हो, कि ये पूरा गीला है और इसमें छेद हैं.”

अचानक दूर से शोर और चीखें रुक गईं, मल्वीना ने धीरे से हाथ हिलाए:

“अर्तेमोन और बुरातिनो मर गए...”   

और वह मुंह के बल टीले से हरी काई में कूद गई.

प्येरो उसके चारों ओर बेवकूफी से लड़खड़ा रहा था. हवा बांसों से गुज़रते हुए हौले हौले सीटी बजा रही थी. आखिरकार कदमों की आहट सुनाई दी. निःसंदेह ये कराबास बराबास चल रहा था, जिससे मल्वीना और प्येरो को बेदर्दी से पकड़कर अपनी अंतहीन जेबों में डाल दे. बांस दूर दूर हो गए, - और बुरातिनो प्रकट हुआ: नाक ऊपर को उठी हुई, मुंह कानों तक खींचा हुआ. उसके पीछे पीछे लंगडाते हुए चल रहा था अर्तेमोन, दो थैलियों के बोझ से बेहाल....

“और, - मुझसे लड़ाई करना चाहते थे!” मल्वीना और प्येरो की प्रसन्नता पर ध्यान दिए बिना बुरातिनो ने कहा, - “मेरे लिए बिल्ली क्या, लोमड़ी क्या, पुलिस के कुत्ते क्या, और खुद कराबास बराबास भी क्या – थू! बच्ची, कुत्ते की पीठ पर चढ़ जा, बच्चे, पूंछ पकड़ ले. चलें...”

कुहनियों से बांस हटाते हुए वह बहादुरी से टीलों पर चल पडा - तालाब का चक्कर लगाते हुए उस पार...

मल्वीना और प्येरो उससे पूछने की हिम्मत भी न कर सके कि पुलिस के कुत्तों के साथ लड़ाई कैसे ख़त्म हुई और कराबास बराबास उनका पीछा क्यों नहीं कर रहा है.

जब तालाब के दूसरे किनारे पर पहुंचे, तो भला अर्तेमोन कराहने और चारों पंजों पर लंगड़ाने लगा. उसकी ज़ख्मों पर पट्टी बांधने के लिए रुकना ज़रूरी था. पथरीली चट्टान पर खड़े चीड़ की विशाल जड़ों के नीचे, उन्होंने एक गुफ़ा देखी. वहां सभी गांठों को घसीटा और उसीमें अर्तेमोन भी रेंग गया. शानदार कुत्ते ने पहले अपने हरेक पंजे को जीभ से चाटा फिर उसे मल्वीना के आगे बढ़ा दिया. बुरातिनो ने मल्वीना की पुरानी कमीज़ फाड़कर पट्टियां बना दीं, प्येरो उन्हें पकड़े रहा, मल्वीना ने पंजों पर पट्टियां बाँध दीं.

पट्टियां बांधने के बाद अर्तेमोन को थर्मामीटर लगाया गया, और कुत्ता शान्ति से सो गया.

बुरातिनो ने कहा,
“प्येरो
, तालाब पर जा, पानी ले आ.”

प्येरो आज्ञाधारक की भांति चल पड़ा, कवितायेँ गुनगुनाते हुए और ठोकर खाते हुए, रास्ते में उसने ढक्कन खो दिया, मुश्किल से चायदानी की तली में पानी लाया.

बुरातिनो ने कहा:

“मल्वीना, भागकर जा और अलाव के लिए टहनियां ले आ.”

मल्वीना ने हिकारत से बुरातिनो की ओर देखा, कंधा उचकाया – और कुछ सूखे डंठल ले आई.

बुरातिनो ने कहा:

“ ये है सज़ा, इन शरीफ़ लोगों के साथ...”

वह खुद पानी लाया, खुद ही टहनियां और चीड़ के शंकु इकट्ठा किये, गुफा के प्रवेशद्वार के पास अलाव जलाया, जो इतना शोर मचा रहा था, कि ऊँचे देवदार की टहनियां झूलने लगीं...खुद ही पानी में कोको बनाया.

“तैयार है! अब नाश्ते के लिए आ जाओ...”

अपने होंठ भींचे, मल्वीना पूरे समय चुप थी. मगर अब, उसने दृढता से, बड़ों जैसी आवाज़ में कहा:

“ऐसा न सोचना, बुरातिनो, कि अगर तुमने कुत्तों से लड़ाई की और जीत गए, हमें कराबास बराबास से बचाया और उसके बाद भी बहादुरी से काम करते रहे, तो तुम्हें खाने से पहले हाथों और दांतों को साफ़ करने से छुट्टी मिल जायेगी...”

बुरातिनो बैठा रह गया : ये लो!” उसने दृढ चरित्र वाली लड़की की ओर आंखें निकाल कर देखा.

मल्वीना गुफा से बाहर निकली और उसने ताली बजाई:

“तितलियों, इल्लियों, भौंरों, मेंढकों....”

एक मिनट भी नहीं बीता, कि बड़ी बड़ी तितलियां उड़ती हुई आ गईं, जो फूलों के पराग से ढंकी थीं. रेंगते हुए इल्लियां और गोबर की गंभीर मक्खियां भी आ पहुँची. पेट पर टपटपाते मेंढक भी आ गए...  

तितलियाँ, पंखों से आहें भरते हुए, गुफ़ा की दीवारों पर बैठ गईं, ताकि भीतर सुन्दर लगे और गिरती हुई मिट्टी खाने की चीज़ों में न गिरे.

गोबर के भौंरे गुफ़ा के फर्श से पूरे कचरे को गेंद की तरह गोल गोल घुमाते हुए बाहर ले गए और उसे दूर फेंक दिया.

मोटी सफ़ेद इल्ली बुरातिनो के सिर पर चढ़ गयी और, उसकी नाक से लटकते हुए, उसके दांतों पर थोड़ी पेस्ट गिरा दी. चाहो, ना चाहो, दांतों को साफ़ करना ही पडा.

दूसरी इल्ली ने प्येरो के दांत साफ़ कर दिए.

एक उनींदा बिज्जू प्रकट हुआ, जो झबरे सूअर की तरह लग रहा था. ..उसने अपने पंजे से भूरी इल्लियों को उठाया, उन्हें दबाकर जूतों पर भूरी पेस्ट निकाली और अपनी पूंछ से जूतों के तीनों जोड़े बढ़िया साफ़ कर दिए – मल्वीना के, बुरातिनो के और प्येरो के. साफ़ करके उसने उबासी ली:

“आ-हा-हा” – और ठुमकते हुए चला गया.         

एक हंसमुख, चुलबुला चटकीला हूपो (एक पक्षी- अनु,) लाल कलगी के साथ उड़ते हुए आया, जो सीधी खड़ी हो जाती थी, जब वह किसी बात से हैरान हो जाता.

“किसके बाल बनाने हैं?

“मेरे,” मल्वीना ने कहा. “बालों में कंघी करो और उन्हें घुंघराले बना दो, मैं अव्यवस्थित हूँ...”

“मगर आईना कहाँ है? सुनो, प्यारी...”

तब बाहर निकली आंखों वाले मेंढकों ने कहा:

“हम लाएंगे...”

दस मेंढक पेट के बल तालाब की ओर भागे. दर्पण के बदले वे दर्पण जैसी कार्प मछली को घसीटते हुए लाये, जो इतनी मोटी और उनींदी थी कि उसे पंखों से खींचते हुए कहाँ घसीट रहे हैं, इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता था. कार्प को मल्वीना के सामने पूंछ पर रखा गया. ताकि उसका दम न घुट जाए, उसके मुंह में केतली से पानी उंडेला गया. नखरेबाज हूपो ने मल्वीना के बालों को घुंघराले बनाकर उनमें कंघी कर दी. सावधानी से दीवार से एक तितली ली और उससे बच्ची की नाक पर पावडर लगा दिया.

“हो गया, प्यारी...”

और – फुर्रर्रर्र! चटकीली गेंद के समान वह गुफ़ा से बाहर उड़ गया.   

मेंढक दर्पण जैसी कार्प मछली को वापस तालाब ले गए. बुरातिनो और प्येरो ने – चाहो, न चाहो – हाथ दो लिए और गर्दन भी. मल्वीना ने नाश्ता करने की इजाज़त दे दी.

नाश्ते के बाद, घुटनों से टुकड़ों को झटक कर, उसने कहा:

“बुरातिनो, मेरे दोस्त, पिछली बार हम और तुम डिक्टेशन पर रुके थे. पाठ आगे बढ़ाते हैं....”

बुरातिनो का मन हुआ कि गुफ़ा से बाहर कूद जाए – जहां सींग समाएं. मगर अपने असहाय साथियों और बीमार कुत्ते को तो छोड़ा नहीं जा सकता था! वह बुदबुदाया:

“लिखने का सामान नहीं लाये हैं...”

“झूठ है, लाये हैं,” अर्तेमोन कराहा. वह थैली तक रेंग गया, दांतों से उसे खोला और स्याही की दावात, पेन्सिल बॉक्स, नोट बुक और छोटा सा ग्लोब भी बाहर निकाला.

कलम को नोक के बिल्कुल नज़दीक से न पकड़ें, वरना आपकी उँगलियों पर स्याही लग जायेगी,” – मल्वीना ने कहा. उसने अपनी ख़ूबसूरत आंखें गुफ़ा की छत पर तितलियों की ओर उठाईं और...

इसी समय टहनियों की सरसराहट और असभ्य आवाज़ें सुनाई दीं, - गुफ़ा के पास से औषधीय जोंकों का विक्रेता दुरेमार और पैरों को घसीटता कराबास बराबास जा रहे थे.

गुड़ियों के थियेटर के डाइरेक्टर के माथे पर बड़ी लाल गाँठ थी, उसकी नाक सूज गई थी, दाढी – उलझ गई थी  और डामर से पुती हुई थी.

आहें भरते हुए और थूकते हुए वह बोला:

“वे ज़्यादा दूर तक नहीं भागे होंगे. वे यहीं कहीं, जंगल में ही हैं.”

बुरातिनो हर हाल में कराबास बराबास से सुनहरी चाबी का भेद उगलवाना चाहता था.

कराबास बराबास और दुरेमार धीरे धीरे गुफा के सामने से गुज़ारे.

मैदान में हुई लड़ाई के समय औषधीय जोंकों का विक्रेता डर के मारे झाड़ी के पीछे छुप गया था. जब सब कुछ समाप्त हो गया, तो उसने इंतज़ार किया, जब तक कि अर्तेमोन और बुरातिनो घनी घास में छुप न गए, और तभी बड़ी मुश्किलों से उसने इटालियन चीड़ के तने से कराबास बराबास की दाढ़ी को खींच कर अलग किया.

“तो, बच्चे ने तुम्हारी अच्छी खबर ली!” दुरेमार ने कहा. “आपको अपनी खोपडी पर दो दर्जन सबसे बढ़िया जोंकें रखनी होंगी....”

कराबास बराबास चीखा:

“एक सौ हज़ार शैतान! चलो, उन शैतानों का पीछा करें!...”

कराबास बराबास और दुरेमार भगोड़ों को ढूँढने निकले. उन्होंने हाथों से घास को हटाया, हर झाड़ी को अच्छी तरह देखा, हर टीले को टटोला.

उन्होंने बूढ़े चीड़ की जड़ों के पास अलाव का धुआं देखा, मगर उनके दिमाग में भी यह बात न आई, कि इस गुफा में लकड़ी के इंसान छुपे हैं और उन्होंने अलाव भी जलाया है. 

“इस बदमाश बुरातिनो के कलम वाले चाकू से टुकडे टुकडे कर दूंगा!” कराबास बराबास बडबडाया.

रविवार, 8 फ़रवरी 2026

बुरातिनो - 18


18


जंगल के किनारे पर भयानक युद्ध

अनुवाद: चारुमति रामदास 

 

सिन्योर कराबास ने पुलिस के दो कुत्तों को पट्टे से पकड़ रखा था. समतल मैदान पर भगोड़ों को देखकर उसने अपना दांतेदार मुंह खोला.

“आहा!” वह चीखा और उसने कुत्तों को छोड़ दिया.

क्रूर कुत्ते पहले तो पिछले पंजों से मिट्टी कुरेदने लगे. वे गुर्राए भी नहीं, बल्कि वे दूसरी ही तरफ़ देख रहे थे, न कि भगोड़ों की ओर – इतना घमंड था उन्हें अपनी ताकत पर.

फिर कुत्ते धीरे धीरे उस जगह की ओर चले, जहां बुरातिनो, अर्तेमोन, प्येरो और मल्वीना खौफ़ से रुक गए थे.

ऐसा लगा कि सब ख़त्म हो गया है. कराबास बराबास टेढ़े पैरों से पुलिस के कुत्तों के पीछे चल रहा था. उसकी दाढी हर पल जैकेट की जेब से बाहर निकल जाती और पैरों के नीचे आ जाती और उनमें उलझ जाती थी.

अर्तेमोन ने अपनी पूंछ दबा ली और गुस्से से गुर्राने लगा. मल्वीना के हाथ थरथरा रहे थे:

“डर लग रहा है, डर लग रहा है!”

प्येरो ने आस्तीनें नीचे खींची और मल्वीना की तरफ़ देखा, उसे यकीन हो गया था कि सब कुछ ख़त्म हो गया है.

सबसे पहले बुरातिनो संभला.

“प्येरो,” वह चीखा, “लड़की का हाथ पकडो, तालाब के पास भागो, जहां हंस हैं!...अर्तेमोन, थैले उतार दो, घड़ी निकाल दो, - तुम लड़ोगे!...”

मल्वीना ने जैसे ही इस साहसी आदेश को सुना, वह अर्तेमोन की पीठ से कूद गयी और, अपनी ड्रेस उठाकर तालाब की ओर भागने लगी. प्येरो – उसके पीछे पीछे.

अर्तेमोन ने सामान की थैलियाँ फेंक दीं, पंजे से घड़ी उतार दी और पूंछ की नोक से फीता फेंक दिया. अपने सफ़ेद दांत दिखाए और दाएँ कूदा, बाएँ कूदा, अपनी मांसपेशियों को ठीक किया, और पिछले पैरों से मिट्टी फेंकने लगा.

बुरातिनो इटालियन देवदार के रालदार तने पर चढ़ गया, जो मैदान में अकेला खड़ा था, और वहां से चीखा, कराहा, और गला फाड़ कर चिल्लाया:

“जानवरों, पंछियों, कीड़ों! हमारे लोगों को मार रहे हैं! हम लकड़ी के बेगुनाह लोगों को बचाईये!...”

अर्तेमोन को देखते ही पुलिस के बुलडॉग उस पर लपके. चतुर कुत्ता मुडा और उसने एक कुत्ते की पूंछ का ठूंठ काट लिया और दूसरे को जांघ पर काट लिया.

बुलडॉग फूहड़पन से मुड़े और फिर से कुत्ते पर झपटे. वह ऊंचे उछला, उन्हें अपने नीचे से जाने दिया, और फिर से एक की कमर और दूसरे की पीठ को नोंच लिया.

बुलडॉग तीसरी बार उस पर लपके, तब अर्तेमोन पूंछ को नीचे लटकाकर मैदान में गोल गोल चक्कर लगाने लगा, कभी पुलिस कुत्तों को अपने पास आने देता तो कभी ठीक उनकी नाक के सामने एक किनारे कूद जाता...     

चपटी नाक वाले बुलडॉग्स को अब सचमुच में गुस्सा आ गया, वे सूंघ रहे थे, वे अर्तेमोन के पीछे बिना जल्दबाज़ी किये भाग रहे थे, ज़िद से, वे फुर्तीले कुत्ते के गले तक पहुँचने के बजाय मर जाना ज़्यादा अच्छा समझ रहे थे. 

इस बीच कराबास बराबास इटालियन देवदार के पास पहुंचा, उसने तने को पकड़ा और उसे झकझोरने लगा:                                                   

“नीचे उतर, नीचे उतर!”

बुरातिनो ने हाथों से, पैरों से, दांतों से टहनी को ऐसे कसकर पकड़ लिया, की टहनियों पर लटकते सभी शंकु हिलने लगे.

इटालियन देवदार के शंकु – नुकीले और भारी होते हैं, छोटे तरबूज जितने. ऐसे शंकु की चोट सिर पर झेलना – तो ओय-ओय!

बुरातिनो मुश्किल से हिलती हुई टहनी को पकड़े हुए था. उसने देखा कि अर्तेमोन ने अपनी लाल चीथड़े जैसी जीभ बाहर निकाली और धीरे धीरे भाग रहा है.   

“चाबी दे!” कराबास बराबास अपना जबड़ा खोलकर गरजा.    

बुरातिनो टहनी पर रेंगने लगा, एक मोटे शंकु तक पहुंचा और उसका डंठल चबाने लगा, जिस पर वह लटका हुआ था. कराबास बराबास ने उसे और ज़ोर से हिलाया, और भारी शंकु नीचे उड़ा – बाख! – सीधे उसके दांतेदार जबड़े में.

कराबास बराबास धम् से नीचे बैठ गया.

बुरातिनो ने दूसरा शंकु तोड़ा और वह – बाख! – धडाम् से कराबास बराबास के सिर पर गिरा, मानो ड्रम पर गिरा हो.

“हमारे लोगों को मार रहे हैं,” बुरातिनो फिर चिल्लाया. “बेगुनाह लकड़ी के इंसानों की मदद करो!”

सबसे पहले मदद करने के लिए आए उड़ते हुए स्विफ्ट पक्षी, - निचले स्तर पर उड़ते हुए उन्होंने बुलडॉग्स की नाक के सामने हवा को काटना शुरू कर दिया.

बुलडॉग्स बेकार ही दांत हिलाते रहे – स्विफ्ट पक्षी कोई मक्खी नहीं है: बिजली की भूरी कड़क के समान -  नाक की बगल से गुज़र गए!

बादल से, जो बिल्ली के सिर जैसा था, काली चील गिरी – वो, जो आम तौर से मल्वीना के लिए शिकार लाती थी; उसने पुलिस के कुत्ते की पीठ में पंजे चुभो दिए, अपने शानदार पंखों पर चढ़ गई, कुत्ते को उठाया और उसे छोड़ दिया...

कुत्ता, चीखते हुए, पंजे ऊपर किये धडाम् से ढेर हो गया.

अर्तेमोन एक किनारे से दूसरे कुत्ते पर उछला, उसे अपने सीने से मारा, गिरा दिया, काटा, उछल कर दूर हट गया...

और फिर से मैदान में इकलौते देवदार के पेड़ के चारों ओर अर्तेमोन और उसके पीछे पस्त, नोंचे गए पुलिस के कुत्ते भागने लगे.

अर्तेमोन की मदद के लिए दो मेंढक आये. वे दो सांपों को खींच रहे थे, जो बुढापे के कारण अंधे हो गए थे. सांपों को तो वैसे भी मरना ही था – चाहे सड़े हुए तने के नीचे, या बगुले के पेट में. मेंढकों ने उन्हें एक शानदार मौत मरने के लिए मनाया.

शानदार अर्तेमोन ने अब खुल्लम खुल्ला लड़ाई में शामिल होने का फैसला कर लिया.

वह अपनी पूंछ पर बैठ गया, दांत दिखाने लगा.

बुलडॉग उस पर झपटे, और वे तीनों ही गेंद जैसे लुढ़कने लगे.  

अर्तेमोन अपने जबड़े किटकिटा रहा था, पंजों से लड़ रहा था. बुलडॉग घावों और खरोंचों पर ध्यान दिए बिना, एक बात की प्रतीक्षा कर रहे थे : अर्तेमोन के गले तक पहुंचने की – खतरनाक पकड़ के साथ. पूरा मैदान आहों और कराहों से भर गया था.

अर्तेमोन की सहायता के लिए साही का परिवार आया: खुद साही, साही की बीबी, साही की सास, साही की दो अविवाहित बुआएं और साही के नन्हे पिल्ले.

सुनहरे लबादों में मोटे काले-मखमली भौंरे उड़ रहे थे, गुस्सैल बरैया अपने पंखों से फ़ुफकार रही थीं. मिट्टी के कीड़े और लम्बी मूंछों वाले काटने वाले कीड़े रेंग रहे थे.

सारे जानवर, पंछी और कीटक निःस्वार्थ भाव से पुलिस के घृणित कुत्तों पर टूट पड़े.      

साही, साही की बीबी, साही की सास, साही की दो अविवाहित बुआएं और साही के नन्हे पिल्ले गोल-गोल होकर क्रोकेट बॉल की रफ्तार से अपनी सुईयों से बुलडॉगों के थोबड़ों पर मार रहे थे.

मक्खियाँ और भंवरे तेज़ी से उड़कर आते और उन्हें ज़हरीले डंक मारते. गंभीर चीटियां आराम से उनकी नाकों में घुस जातीं और वहां ज़हरीला फॉर्मिक  एसिड छोड़तीं.

 जमीनी भँवरे और खटमल नाभि पर काट रहे थे.

 चील कभी एक कुत्ते को चोंच मारती, तो कभी दूसरे की खोपड़ी पर टेढ़ी चोंच मारती.

तितलियां और मक्खियां घना काला बादल बनकर उनकी आंखों के सामने छा गईं, जिससे रोशनी धुंधली हो गई.

मेंढकों ने दो सांपों को तैयार रखा जो शहीद होने के लिए तैयार थे.             

और जब एक बुलडॉग ने अपना जबड़ा चौड़ा खोला, जिससे कि चींटियों का फॉर्मिक एसिड बाहर उगल दे, तो अंधा बूढ़ा सांप सिर के बल उछल कर उसके गले के सामने आया और स्क्रू की तरह अन्ननलिका में घुस गया. ऐसा ही दूसरे बुलडॉग के साथ भी हुआ : दूसरा अंधा सांप उसके जबड़े की ओर लपका. दोनों कुत्ते फटेहालखरोचों के साथहांफते हुए असहाय ज़मीन पर लुढ़कने लगे. भला अर्तेमोन युद्ध में विजयी हुआ.

इस बीच कराबास बराबास ने आखिरकार अपने विशाल मुंह से कंटीले शंकु को बाहर निकाल दिया.

सिर पर मार लगने की वजह से उसकी आंखें बाहर निकल आई थीं. लड़खड़ाते हुए, उसने फिर से इटालियन देवदार के तने को पकड़ लिया. हवा उसकी दाढ़ी को उड़ा रही थी.

बुरातिनो ने, बिल्कुल ऊपर बैठे बैठे गौर किया कि कराबास बराबास की दाढ़ी का सिरा, जो हवा के कारण ऊपर उठा हुआ था, राल वाले तने से चिपक गया है.

बुरातिनो एक टहनी पर लटक गया और, चिढ़ाते हुए चिल्लाया:

“चचा, नहीं पकड़ पाओगे, चचा, नहीं पकड़ पाओगे!...”

वह ज़मीन पर कूदा और चीड़ के चारों ओर भागने लगा. कराबास बराबासलड़खड़ाते हुएहाथ फैलाए, ताकि बच्चे को पकड़ सकेपेड़ के चारों ओर उसके पीछे दौड़ने लगा.

एक बार भागा, ऐसा लगा कि उसने अपनी टेढ़ी मेढ़ी उँगलियों से छिटक गए बच्चे को पकड़ लिया, दूसरी बार भागा, तीसरी बार भागने के बाद...उसकी दाढ़ी तने के चारों ओर लिपट गयी, राल से पक्की चिपक गई.

जब दाढ़ी समाप्त हो गई और कराबास बराबास नाक के बल पेड़ का आधार ले रहा था, तो बुरातिनो ने उसे लम्बी जीभ दिखाई और हंसों वाले तालाब की ओर भागा – मल्वीना और प्येरो को ढूँढने के लिए. बदहाल अर्तेमोन तीन पंजों परचौथे को मोड़े हुएलंगड़ाते हुए उनके पीछे चलने लगा.

मैदान में पुलिस के दो कुत्ते रह गए, जिनकी ज़िंदगी के लिए, ज़ाहिर है, एक मरी हुई सूखी मक्खी भी नहीं दी जा सकती थी, और परेशान गुडिया विज्ञान का डॉक्टर सिनीऑर कराबास बराबास, जिसकी दाढ़ी इटालियन देवदार से पक्की चिपक गई थी. 

बुधवार, 4 फ़रवरी 2026

बुरातिनो - 17

  

17

सिन्योर कराबास बराबास ने मुझे देख लिया.

अनुवाद: चारुमति रामदास 


“तू छुपकर सुन रहा है, कमीने!” और वह मुझे पकड़ने के लिए उछला,, ताकि आग में फेंक दे, मगर फिर से अपनी दाढ़ी में उलझ गया और भयानक धडाम के साथ, कुर्सियों को तितर बितर करते हुए, फर्श पर गिर पडा.

“याद नहीं है, कि मैं खिड़की के बाहर कैसे पहुंचा, कैसे फेंसिंग पर चढ़कर उससे बाहर आया. अँधेरे में हवा शोर मचा रही थी और बारिश थपेड़े मार रही थी.

“मेरे सिर के ऊपर काला बादल बिजली से चमक गया, और दस कदम पीछे मैंने भागते हुए कराबास बराबास और जोंकें बेचने वाले को देखा....मैंने सोचा: ‘मर गया, लड़खड़ाया और किसी मुलायम और गर्माहट भरी चीज़ पर गिरा, किसी के कानों को पकड़ लिया...

“ये भूरा खरगोश था. वह भय से चीखा, ऊंची छलांग लगाई, मगर मैं उसके कानों को पकड़े रहा, और हम अँधेरे खेतों से, अंगूर के बागों से, सब्जियों के बगीचों से होते हुए भागते रहे.

“जब खरगोश थक गया और बैठ गया, अपमान से अपना कटा हुआ होंठ चबाते हुए, मैंने उसका माथा चूम लिया.

“प्लीज़, थोड़ा और, थोड़ा और भागेंगे, प्यारे भूरे खरगोश...”

“खरगोश ने गहरी सांस ली, और हम फिर से उछलते हुए जाने लगे, न जाने कहीं दायें, तो कहीं बाएं...

 “जब बादल छट गये और चाँद निकल आया, तो मैंने पहाड़ के नीचे एक छोटा सा शहर देखा जिसमें अलग अलग दिशाओं में घंटाघर थे.

शहर वाले रास्ते पर कराबास बराबास और जोंकों का विक्रेता भाग रहे थे.

खरगोश ने कहा:

“एहे हे, ये है खरगोश की खुशी! वे ‘मूर्खों के शहर जा रहे हैं, ताकि पुलिस के कुत्ते किराए पर लें. हो गया, और हम गए काम से!”   

खरगोश उदास हो गया. उसने पंजों में नाक घुसा ली और कान लटका लिए.

मैंने उसकी विनती की, मैं रो रहा था, मैं उसके पैरों पर भी झुका. खरगोश टस से मस नहीं हुआ.

मगर जब शहर से दो चपटी नाक वाले बुलडॉग, जिनके दायें पंजों पर काली पट्टियां बंधी थीं, भागते हुए आए, तो खरगोश की पूरी काया थरथरा गई , - मैं मुश्किल से उछलकर उसकी पीठ पर बैठ गया, और वह बेतहाशा जंगल में भागने लगा...

बाकी तो तुम देख ही चुके हो, बुरातिनो.”

प्येरो ने अपनी कहानी ख़त्म की, और बुरातिनो ने उससे सावधानी से पूछा:

“और किस घर में, सीढ़ियों के नीचे किस कमरे में वह छोटा सा दरवाज़ा है, जिसे चाबी खोलती है?

“कराबास बराबास इस बारे में नहीं बता पाया...आह, क्या हमें इससे कोई फरक पड़ता है, - चाबी तालाब के तल पर है...हम कभी भी सुख नहीं देख पायेंगे...”

“और क्या तुमने ये देखा है?” बुरातिनो उसके कान में चीखा. और जेब से चाबी निकालकर प्येरो की नाक के सामने नचाई. – “ये रही चाबी!”

बुरातिनो और प्येरो मल्वीना के पास आये, मगर उन्हें मल्वीना और कुत्ते अर्तेमोन के साथ भागना पड़ता है.

जब सूरज पर्वत के चट्टानी शिखर पर आया, तो बुरातिनो और प्येरो झाड़ी के नीचे से बाहर आये और खेत से होते हुए भागे, जिस पर कल रात को चमगादड़ बुरातिनो को नीले बालों वाली लड़की के घर से ‘मूर्खों के देस ले गया था.

प्येरो की ओर देखने से हंसी आ रही थी, - वह फ़ौरन मल्वीना को देखने के लिए उतावला हो रहा था.

“सुनो,” वह हर पंद्रह सेकण्ड बाद पूछता, “बुरातिनो, क्या वह मुझे देखकर खुश होगी?

“मुझे क्या मालूम...”

पंद्रह सेकण्ड बाद फिर पूछता है:

“सुनो, बुरातिनो, और अगर उसे खुशी न हुई तो?

“मुझे क्या मालूम...”

आखिरकार उन्हें सफ़ेद घर दिखाई दिया, जिसके दरवाजों पर सूरज, चाँद औए सितारे बने हुए थे.

चिमनी से धुँआ निकल रहा था. उसके ऊपर एक छोटा सा, बिल्ली के सिर जैसा बादल तैर रहा था.

कुत्ता अर्तेमोन पोर्च पर बैठा था और रह रहकर बादल की तरफ़ देखकर भौंक रहा था.

बुरातिनो का नीले बालों वाली लड़की के पास लौटने का ज़रा भी मन नहीं था. मगर वह भूखा था और दूर से ही उबले हुए दूध की गंध सूंघ रहा था.

“अगर लड़की फिर से हमें पढ़ाने का निश्चय करे, तो दूध पी लेंगे, - और मैं किसी भी कीमत पर यहाँ नहीं रुकूंगा.”

इसी समय मल्वीना घर से बाहर आई. उसके एक हाथ में चीनी मिट्टी का कॉफी पॉट था और दूसरे में – कुकीज़ की डलिया.

अभी तक उसकी आखें रोई हुई लग रही थीं, - उसे यकीन था कि चूहे बुरातिनो को कोठरी से खीचकर ले गए और उसे खा गए थे.

वह रेत की पगडंडी पर गुड़ियों की मेज़ पर बैठी ही थी, कि नीले फूल हिलने लगे, उनके ऊपर सफ़ेद और पीली पत्तियों की तरह तितलियाँ उड़ने लगीं, और बुरातिनो और प्येरो प्रकट हुए.

मल्वीना ने अपनी आंखें इतनी चौड़ी खोलीं कि दोनों लकड़ी के लडके आराम से उनमें उछल सकते थे.

मल्वीना को देखते ही प्येरो अनाप-शनाप बडबडाने लगा, उसके शब्द इतने असंबद्ध और बेवकूफ़ी भरे थे, कि हम उन्हें यहाँ नहीं बताएंगे.

बुरातिनो ने इस तरह कहा, मानो कुछ हुआ ही न हो:

“ये, लो, मैं इसे ले आया, - इसे संभालो...”

मल्वीना आखिरकार समझ गई कि ये सपना नहीं है.

“आह, कैसी खुशी है!” वह फुसफुसाई, मगर फौरन बड़ों जैसी आवाज़ में आगे बोली: - “बच्चों, फौरन जाकर नहाओ और दांत साफ़ करो. अर्तेमोन, बच्चों को कुंए पर ले जाओ.”

“तूने देखा,” बुरातिनो बडबडाया, “उसके दिमाग़ में पागलपन है – नहाना, दांत साफ़ करना! दुनिया में हर कोई सफ़ाई से ही रहता है...”

फिर भी वे नहाए. अर्तेमोन ने अपनी पूंछ के पीछे बंधे हुए ब्रश से उनके जैकेट साफ़ किए...

मेज़ पर बैठे. बुरातिनो दोनों गालों में खाना भर रहा था. प्येरो ने केक का एक टुकड़ा भी नहीं चखा था; वह मल्वीना की तरफ़ ऐसे देख रहा था, जैसे वह बादाम के आटे से बनी हो. आखिर वह इससे उकता गई.

“अरे,” उसने उससे कहा, “आपने मेरे चेहरे पर ऐसा क्या देख लिया? शान्ति से नाश्ता कीजिए, प्लीज़.”

“मल्वीना,” प्येरो ने जवाब दिया, “मैं काफ़ी समय से कुछ भी नहीं खा रहा हूँ, मैं कवितायेँ रचता हूँ...”

बुरातिनो हंसी से थरथराने लगा.

मल्वीना को आश्चर्य हुआ और उसने फिर से आंखें पूरी खोल दीं.

“तो – अपनी कवितायेँ पढ़िए.”

अपने सुन्दर हाथ से उसने गाल पोंछा और अपनी ख़ूबसूरत आंखें बादल की ओर उठाईं, जो बिल्ली के सिर जैसा था.  

प्येरो ने इस तरह बिसूरते हुए कविता पढ़ना शुरू किया, जैसे वह गहरे कुएं के तल पर हो:

मल्वीना भाग गई पराए देस

मल्वीना खो गयी, दुल्हन मेरी...

बिसूरता हूँ, नहीं जानता – कहाँ जाऊं...

क्या अलबिदा कहूं, गुड़ियों की ज़िंदगी को?

प्येरो पूरा पढ़ भी नहीं पाया, मल्वीना कविता की तारीफ़ भी नहीं कर पाई, जो उसे बहुत अच्छी लगी थी, कि रेत की पगडंडी पर भौंरा प्रकट हुआ.  

भयानक रूप से आंखें बाहर निकाल कर उसने बताया;

“आज रात को पागल कछुए तर्तीला ने कराबास बराबास को सुनहरी चाबी के बारे में सब कुछ बताया...”

मल्वीना भय से चिल्लाई, हांलाकि वह कुछ भी नहीं समझ पाई थी. सभी कवियों की तरह भुलक्कड़ प्येरो ने कुछ बेमतलब उद्गार प्रकट किये, जिन्हें हम यहाँ नहीं बताएँगे. मगर बुरातिनो फौरन उछला और उसने अपनी जेबों में बिस्कुट, शकर और मिठाई ठूंसना शुरू कर दिया.

“जितनी जल्दी हो, यहाँ से भाग जायेंगे. अगर पुलिस के कुत्ते कराबास बराबास को यहाँ ले आये – तो समझो हम मर गए.”

मल्वीना का चेहरा बदरंग हो गया, सफ़ेद तितली के पंख की तरह. प्येरो ने सोचा कि वह मर रही है, उस पर कॉफी पॉट गिरा दिया, और मल्वीना की बढ़िया ड्रेस पर कोको से ढँक गयी.

ज़ोर से भौंकते हुए उछलकर अर्तेमोन ने, - क्योंकि उसे ही तो मल्वीना की ड्रेस धोनी पड़ती थी, प्येरो की कॉलर पकड़ ली और उसे हिलाने लगा, जब तक कि प्येरो ने तुतलाते हुए कह नहीं दिया:

“बस, बहुत हो गया, प्लीज़...”

भौंरा आंखें फाड़े इस गड़बड़ को देखता रहा और उसने फिर कहा:

“कराबास बराबास पुलिस के कुत्तों के साथ पंद्रह मिनट में यहाँ पहुँच जाएगा.”

मल्वीना कपड़े बदलने के लिए भागी. प्येरो बदहवासी से अपने हाथ नचा रहा था और उसने स्वयं को पीछे से रेत की पगडंडी पर फेंकने की कोशिश की. अर्तेमोन घरेलू सामान की थैलियाँ खीँच रहा था. दरवाज़े धडाम-धडाम कर रहे थे. कबूतर झाड़ी पर बैठे, बदहवासी से चिल्लाए जा रहे थे, गोरैयों ने ज़मीन से ऊपर उड़ान भरी. आतंक बढाने के लिए उल्लू जंगलीपन से अटारी के ऊपर ठहाके लगा रहा था. 

सिर्फ बुरातिनो ही परेशान नहीं था. उसने अर्तेमोन के ऊपर आवश्यक सामानों से भरे दो बैग लाद दिए. बैगों के ऊपर मल्वीना को बिठा दिया, जिसने बढ़िया सफ़र वाली ड्रेस पहनी थी. प्येरो को उसने कुत्ते की दुम पकड़े रहने का हुक्म दिया. खुद सामने खडा हो गया:

“घबराने की ज़रुरत नहीं है! चलो, भागें!”

जब वे – याने बुरातिनो, जो बहादुरी से कुत्ते के आगे आगे चल रहा था, मल्वीना, जो बैगों पर उछल रही थी, और पीछे पीछे प्येरो, जो सामान्य ज्ञान के बदले बेवकूफी भरी कविताओं से लबालब भरा था, - जब वे घनी घास से बाहर निकल कर एक समतल मैदान में आये, तो – जंगल से कराबास बराबास की उलझी हुई दाढ़ी दिखाई दी. उसने सूरज से बचने के लिए आंखों पर हथेली रखी थी और आसपास के नज़ारे को देख रहा था.