सोमवार, 23 फ़रवरी 2026

बुरातिनो - 26

 26


गुप्त दरवाज़े के पीछे उन्हें क्या मिला.

अनुवाद: चारुमति रामदास


जब कराबास बराबास पागल की तरह भाग रहा था और अपनी दाढ़ी खीच रहा था, तब बुरातिनो – सबसे आगे, और उसके पीछे मल्वीना, प्येरो, अर्तेमोन और – सबसे अंत में – पापा कार्लो पत्थर की खड़ी सीढी से नीचे अंधेरे में उतर रहे थे.

पापा कार्लो ने जलती हुई मोमबत्ती का टुकड़ा पकड़ रखा था. उसकी फडफडाती लौ अर्तेमोन के झबरे सिर से या प्येरो के फैले हुए हाथ से बड़ी बड़ी परछाईयाँ डाल रही थी, मगर अँधेरे को प्रकाशमान नहीं कर रही थी, जहां सीढ़ी जा रही थी.

डर के मारे रो न पड़े, इसलिए मल्वीना अपने कानों में चुटकी काट रही थी.

प्येरो, - हमेशा की तरह, हर चीज़ से बेखबर,- कवितायेँ गुनगुना रहा था:

 

 

नाचती परछाईयाँ दीवार पर, -

नहीं है मुझे कोई डर.

सीढ़ी हो चाहे खड़ी,

या हो खतरनाक अन्धेरा, -

फिर भी भूमिगत रास्ता

ले जाएगा कहीं न कहीं...

बुरातिनो अपने साथियों से आगे चल रहा था, - नीचे गहराई में उसकी सफ़ेद टोपी मुश्किल से दिखाई दे रही थी.

अचानक किसी चीज़ के फुफकारने की, गिरने की, लुढ़कने की आवाज़ आई, और उसकी शिकायत भरी आवाज़ सुनाई दी:

“मेरी मदद करो!”

अर्तेमोन फ़ौरन, अपने ज़ख्मों और भूख को भूलकर, मल्वीना और प्येरो को फांदकर, काली आंधी की तरह सीढ़ियों से नीचे लपका.

उसके दांत किटकिटा रहे थे. कोई प्राणी घिनौनी आवाज़ में चिल्लाया.

सब कुछ शांत हो गया. सिर्फ मल्वीना का दिल अलार्म घड़ी की तरह ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था.

प्रकाश की एक चौड़ी किरण नीचे से सीढी टकराई. मोमबत्ती की लौ, जिसे पापा कार्लो ने पकड़ा था, पीली हो गई.     

“देखिये, जल्दी देखिए!” बुरातिनो ने ज़ोर से पुकारा.

मल्वीना पलट कर जल्दी जल्दी एक एक सीढ़ी उतरने लगी, उसके पीछे उछल रहा था प्येरो. आख़िर में, झुककर, उतर रहा था कार्लो, जिसके लकड़ी के जूते बार बार पैरों से फिसल जा रहे थे.  

नीचे, वहां, जहां सीधी सीढ़ी समाप्त हो रही थी, पत्थर के चौक पर अर्तेमोन बैठा था. वह अपने होंठ चाट रहा था. उसके पैरों के पास गला घोंटा हुआ चूहा शुशारा पड़ा था.

बुरातिनो दोनों हाथों से सडा हुआ नमदे का परदा हटा रहा था, - उससे पत्थर की दीवार में बने छेद को ढांका गया था. वहां से नीला प्रकाश निकल रहा था. 

जब वे छेद से होकर निकले, तो सबसे पहली चीज़ जो उन्होंने देखी – वे थीं सूरज की बिखरती हुई किरणें. वे मेहराबदार छत से गिरकर गोल खिड़की से होते हुए आ रही थीं.   

चौड़ी फ़ैली हुई किरणें, उनमें नृत्य करते हुए धूलकणों समेत पीले संगमरमर के गोल कमरे को प्रकाशित कर रही थीं. कमरे के बीचोंबीच आश्चर्यजनक रूप से सुन्दर गुड़ियों का थियेटर था. उसके परदे पर बिजली की आड़ी तिरछी रेखा चमचमा रही थी.  

परदे के किनारों से दो वर्गाकार टॉवर्स उभरे, जिन्हें इस तरह रंगा गया था, मानो वे छोटी छोटी ईंटों से बने हों. टीन की ऊंची छतें चमचम चमक रही थीं.

बाएं टॉवर पर तांबे की सुईयों वाली घड़ी थी. डायल पर हर अंक के सामने एक लड़के और लड़की के हंसते हुए चेहरे थे.

दाएं टॉवर पर – रंगबिरंगे शीशों की गोल खिड़की थी.

इस खिड़की के ऊपर, हरे टीन की छत के ऊपर, बोलने वाला झींगुर बैठा था. जब सब लोग अपने मुंह खोले, इस अद्भुत थियेटर के सामने रुक गए, तो झींगुर ने स्पष्टता से धीरे धीरे कहा:

“मैंने चेतावनी दी थी, कि तुम्हें भयानक खतरों का सामना करना पडेगा, बुरातिनो. अच्छा हुआ कि सब कुछ अच्छी तरह समाप्त हो गया, मगर भयानक तरीके से भी समाप्त हो सकता था...तो...”

झींगुर की आवाज़ बूढ़ी और कुछ आहत थी, क्योंकि बोलने वाले झींगुर को अपने ज़माने में हथौड़े की मार पड़ी थी, और अपनी सौ साल की आयु और स्वाभाविक भलमनसाहत के बावजूद, वह अवांछित अपमान को भूल नहीं पाया था. इसलिए उसने आगे कुछ नहीं कहा, - अपनी मूंछें खींची, मानो उनसे धूल झाड़ रहा हो, और धीरे से कहीं अकेली दरार में रेंग गया – गहमा गहमी से दूर.

तब पापा कार्लो ने कहा:

“और मैं तो सोच रहा था, कि हमें यहाँ, हद से हद, सोने और चांदी का ढेर मिलेगा, - मगर मिला बस एक पुराना खिलौना.

वो टॉवर में बनी घड़ी के पास आए, डायल पर टकटक किया, और चूंकि घड़ी के किनारे तांबे की कील पर चाबी लटक रही थी, उन्होंने उसे लेकर घड़ी में चाबी भर दी...

ज़ोर से टिकटिक होने लगी. काटे चलने लगे. बड़ा काटा, बारह के पास पहुंचा, छोटा – छः के पास. टॉवर के भीतर कुछ गुनगुनाहट और फुसफुसाहट होने लगी. घड़ी ने खनखनाते हुए छः घंटे बजाये...

तभी दाएं टॉवर में रंगबिरंगे कांच से बनी छोटी सी खिड़की खुल गयी, घड़ी की चाबी का रंगबिरंगा पंछी बाहर कूदा और, अपने पंखों को फडफडाते कर उसने छः बार गाया:

“- यहाँ-यहाँ, यहाँ-यहाँ, यहाँ-यहाँ...”

पंछी छुप गया, खिड़की धडाम से बंद हो गई, सुरीला संगीत बजने लगा. और परदा उठ गया...

किसी ने भी, पापा कार्लो ने भी कभी इतनी सुन्दर सजावट नहीं देखी थी.  

स्टेज पर एक बाग़ था. चांदी और सोने के पत्तों वाले छोटे छोटे पेड़ों पर नाखून जितने आकार की चाबी वाली मैनाएँ गा रही थीं. एक पेड़ पर सेब लटक रहे थे, जिनमें से हरेक कूटू के दाने से बड़ा नहीं था. पेड़ों के नीचे मोर घूम रहे थे और, पंजों के बल उठकर सेबों पर चोंच मार रहे थे. लॉन पर दो बकरी के बच्चे, उछल रहे थे और एक दूसरे को धक्के मार रहे थे, और हवा में मुश्किल से दिखाई देने वाली तितलियाँ उड़ रही थीं.

इस तरह एक मिनट बीत गया. मैनाएँ खामोश हो गईं, मोर और बकरी के मेमने बगल वाली विंग्स के पीछे हट गए. पेड़ स्टेज के फर्श के नीचे गुप्त तहखानों में गायब हो गए.   

पीछे वाली सजावट से बारीक कपड़े के बादल छटने लगे. ऐसा लगा कि रेगिस्तान के ऊपर लाल सूरज आ गया है. दाएं और बाएं, बगल वाली विंग्स से लताओं की सांपों जैसी शाखाएं बाहर झाँकने लगीं, - उनमें से एक के ऊपर तो वाकई में सांप था. दूसरी पर अपनी पूंछें पकड़ कर बंदरों का परिवार झूल रहा था.

ये अफ्रीका था.

रेगिस्तान की रेत पर लाल सूरज के नीचे जानवर गुज़र रहे थे.

तीन छलांगों में अयाल वाला सिंह गुज़र गया, हांलाकि वह बिल्ली के बच्चे से बड़ा नहीं था, मगर डरावना था.

गिरते-पड़ते टेडी बेयर छाता लिए अपने पिछले पंजों पर चलकर निकल गया.

घिनौना मगरमच्छ रेंगते हुए आया, - उसकी घिनौनी आँखों ने दयालु होने का दिखावा किया. मगर फिर भी अर्तेमोन ने विश्वास नहीं किया और उस पर गुर्राने लगा.

एक गैंडा सरपट दौड़ते हुए आया – सुरक्षा के लिए उसके नुकीले सींग पर रबर की गेंद पहनाई गयी थी.

जिराफ भागते हुए गुज़रा, जो धारियों वाले, सींगों वाले ऊँट के समान था, पूरी ताकत से गर्दन बाहर निकाले हुए. फिर गुज़रा हाथी, - बच्चों का दोस्त, - बुद्धिमान, भले स्वभाव का, - अपनी सूंड हिला रहा था, जिसमें उसने सोया की कैंडी पकड़ रखी थी.   

सबसे अंत में एक बहुत ही गंदा जंगली कुत्ता – सियार निकला. अर्तेमोन भौंकते हुए उस पर उछला, - पापा कार्लो को उसकी पूछ पकड़ कर मुश्किल से उसे खींचना पडा.

जानवर गुज़र गए. सूरज अचानक बुझ गया. अँधेरे में कुछ चीज़ें, ऊपर से नीचे आईं, कुछ चीज़ें बगल से सरका दी गईं. एक आवाज़ आई, जैसे तारों पर कमान खींची जा रही हो.   

मटमैले स्ट्रीट लाईट्स जल उठे. स्टेज पर था शहर का चौक. घरों के दरवाज़े खुल गए, नन्हे इंसान बाहर भागे, खिलौनों की ट्राम में चढ़ गए. कंडक्टर ने घंटी बजाई, ड्राईवर ने हैंडल घुमाया, नन्हा बच्चा फ़ौरन सॉसेज से चिपक गया, पुलिस वाले ने सीटी बजाई, - ट्रामगाड़ी ऊंचे ऊंचे घरों के बीच से बगल वाली सड़क पर चली गई.               

एक साइकिल सवार गुज़रा – जिसके पहिये जैम वाली प्लेट से बड़े नहीं थे. अखबार वाला भागा, - फाड़े हुए कैलेण्डर के पन्ने चौकोर आकार में रखे हुए – इतना ही आकार था उसके अखबारों का.     

आईसक्रीम वाला चौक से आईसक्रीम की गाडी चला रहा था. घरों की छोटी छोटी बालकनियों में छोटी बच्चियां आईं और उसे देखकर हाथ हिलाने लगीं, मगर आईसक्रीम वाले ने हाथ हिला दिए और बोला:

“सब खा गए, अगली बार आना.”

अब परदा गिर गया, और उसके ऊपर फिर से बिजली की आड़ी- तिरछी, सुनहरी रेखा चमक गई.  

पापा कार्लो, मल्वीना, प्येरो उत्तेजना के बाद अपने होश नहीं संभाल सके. बुरातिनो, जेबों में हाथ डाले, नाक हवा में उठाकर शेखी से बोला:

“तो – देखा? मतलब. मैं यूं ही आंटी तोर्तीला की दलदल में नहीं भीगा था...इस थियेटर में हम कॉमेडी प्रस्तुत करेंगे – पता है कौनसी? – ‘सुनहरी चाबी या बुरातिनो और उसके दोस्तों के असाधारण कारनामे’कराबास बराबास निराशा से टूट जाएगा.”

प्येरो ने मुट्ठियों से झुर्रियों वाला माथा पोंछा:

“मैं शानदार पदों में ये कॉमेडी लिखूंगा.”

“मैं आईस्क्रीम और टिकट बेचूंगी,” मल्वीना ने कहा. – “अगर आपको मुझमें योग्यता नज़र आए, तो अच्छी लड़कियों की भूमिका करने की कोशिश करूंगी...”

“ठहरो, बच्चों, और पढाई कब करोगे?” पापा कार्लो ने पूछा.

सबने फ़ौरन जवाब दिया:

“पढाई करेंगे सुबह...और शाम को काम करेंगे थियेटर में...”

“अच्छा, ठीक हैं बच्चों,” पापा कार्लो ने कहा, “और बच्चों, मैं भी हारमोनियम बजाऊंगा, सम्माननीय पब्लिक के मनोरंजन के लिए, और अगर इटली में शहर-शहर घूमेंगे, तो मैं घोड़ा संभालूँगा और लहसुन के साथ मटन पकाऊंगा...”

अर्तेमोन ने अपना कान उठाकर सुना, चमकीली आंखों से दोस्तों की ओर देखा, पूछा: उसे क्या करना है?

बुरातिनो ने कहा:

“अर्तेमोन थियेटर की संपत्ति की और नाटकों की वेशभूषा की हिफाज़त करेगा, हम उसे स्टोर रूम की चाबी देंगे. थियेटर में ‘शो के समय वह परदे के पीछे शेर की गर्जना, गैंडे की धमधम, मगरमच्छ के दांतों की किटकिटाहट,   अपनी पूंछ को तेज़ी से घुमाते हुए हवा की साँय साँय या अन्य आवश्यक आवाजों का प्रभाव पैदा करेगा.

“और तुम, और तुम, बुरातिनो?” सबने पूछा. “थियेटर में क्या बनोगे?

“प्यारों, मैं कॉमेडी में अपने आप को ही पेश करूंगा और पूरी दुनिया में मशहूर हो जाऊंगा!”

शनिवार, 21 फ़रवरी 2026

बुरातिनो - 25

  


25


कराबास बराबास सीढ़ी के नीचे वाली कोठरी में घुसता है.


अनुवाद: चारुमति रामदास 


कराबास बराबास ने, जैसा कि हम जानते हैं, बहुत कोशिश की ऊंघते हुए पुलिसवाले को मनाने की, कि वह कार्लो को गिरफ़्तार करे. कुछ भी हासिल न होने पर, कराबास बराबास रास्ते पर भागने लगा.

उसकी लहराती हुई दाढ़ी आने जाने वालों के बटन और छतरियों में उलझ रही थी.

वह धक्के दे रहा था और दांत किटकिटा रहा था. उसके पीछे लडके तीखी सीटियां बजा रहे थे, उसकी पीठ पर सड़े हुए सेब फेंक रहे थे.

कराबास बराबास शहर-प्रमुख के यहाँ गया. इस दोपहर के गर्म समय में प्रमुख बगीचे में बैठा था, फ़व्वारे के निकट, सिर्फ अंडरवियर पहने और लेमोनेड पी रहा था.

प्रमुख की छः ठोडियां थीं, उसकी नाक गुलाबी गालों में डूब गई  थी. उसकी पीठ के पीछे, चीड़ के नीचे, चार उदास पुलिसवाले बार बार लेमोनेड़ की बोतलें खोल रहे थे.

कराबास बराबास प्रमुख के सामने घुटनों पर गिर गया और, दाढी से चेहरे पर आये आंसू फैलाते हुए चिल्लाने लगा:

“मैं अभागा अनाथ हूँ, मेरा अपमान किया गया, मेरा सब कुछ लूट लिया गया, मुझे मारा गया...”

“अनाथ बच्चे, तेरा किसने अपमान किया है?” प्रमुख ने मुश्किल से सांस लेते हुए पूछा.

“सबसे दुष्ट शत्रु, घुमक्कड़, बाजा बजाने वाला कार्लो. उसने मेरी तीन सबसे बढ़िया गुड़ियों को चुरा लिया, वह मेरे मशहूर थियेटर को आग लगाना चाहता है, अगर उसे फ़ौरन गिरफ्तार न किया गया, तो वह पूरे शहर को जला देगा और लूट लेगा.

अपने शब्दों को प्रभावशाली बनाने के लिए कराबास बराबास ने मुट्ठी भर सोने के सिक्के बाहर खीँचे और प्रमुख के जूते में डाल दिए.  

संक्षेप में, उसने ऐसी शिकायतें कीं, इतना झूठ बोला, कि डरे हुए प्रमुख ने चीड़ के नीचे खड़े चार पुलिसवालों को हुक्म दिया:

“आदरणीय अनाथ के साथ जाओ और क़ानून के नाम पर जो भी आवश्यक हो, करो.”

कराबास बराबास चारों पुलिसवालों के साथ कार्लो की कोठरी की ओर भागा और चिल्लाया:

“गिबरीश के राजा के नाम पर – चोर और बदमाश को गिरफ़्तार करो!”

मगर दरवाज़े बंद थे. कोठरी में किसी ने जवाब नहीं दिया. कराबास बराबास ने हुक्म दिया:

“गिबरीश के राजा के नाम से – दरवाज़ा तोड़ दो!”

पुलिसवालों ने दरवाज़ा दबाया, दरवाज़े के सड़े हुए पल्ले कुंदों से गिर गए, और चारों बहादुर पुलिसवाले, अपनी तलवारें खनखनाते हुए, सीढ़ी के नीचे वाली कोठरी में घुस गए.

यह ठीक उसी पल हुआ, जब दीवार में छुपे गुप्त दरवाज़े से, झुककर कार्लो निकल रहा था.   

वह सबसे अंत में छुपा. दरवाज़ा – झन्!...धडाम से बंद हो गया. हल्का संगीत भी बंद हो गया. सीढ़ी के नीचे कोठरी में सिर्फ गंदी पट्टियां और फटा हुआ कैनवास पड़े हुए थे, जिस पर भट्टी का चित्र था...

कराबास बराबास गुप्त दरवाज़े की ओर कूद गया, उसे मुट्ठियों और जूतों से मारने लगा:

“त्रा-ता–ता-ता !”

मगर दरवाज़ा मज़बूत था.

कराबास बराबास भाग कर आया और दरवाज़े पर अपनी पीठ से धक्का मारा.

दरवाज़ा नहीं खुला.

वह पैर पटकते हुए पुलिसवालों के पास गया:

तराबार्स्की सम्राट के नाम पर इस नासपीटे दरवाज़े को तोड़ दो!...”

पुलिसवाले एक दूसरे को टटोल रहे थे – कोई नाक के धब्बे देख रहा था, कोई सिर का घूमड़. 

“नहीं, यहां काम बहुत भारी है,” – उन्होंने जवाब दिया और शहरप्रमुख के पास यह कहने के लिए गए, कि उन्होंने सब कुछ क़ानून के अनुसार किया है, मगर लगता है, कि बूढ़े घुमक्कड़ ऑर्गन वादक की खुद शैतान मदद कर रहा है, क्योंकि वह दीवार के आरपार निकल गया.

कराबास बराबास ने अपनी दाढ़ी नोंची, फर्श पर लोट गया और पागल की तरह सीढ़ी के नीचे वाली खाली कोठरी में बिसूरने लगा, चीखने-चिल्लाने लगा और लोट पोट होने लगा.

गुरुवार, 19 फ़रवरी 2026

बुरातिनो - 24

 24


आखिरकार बुरातिनो पापा कार्लो, मल्वीना, प्येरो और अर्तेमोन के साथ घर लौटता है.

अनुवाद: चारुमति रामदास 


कार्लो के अचानक प्रकट होने से, उसकी छड़ी और चढ़ी हुई भौंहों से बदमाश भयभीत हो गए.

लोमड़ी अलीसा घनी घास में घुस गई और वहां भागने लगी, कभी कभी ठहर जाती, क्योंकि छड़ी की मार से सिहर उठती थी. बिल्ला बज़ीलियो, दस कदम उड कर गुस्से से फुफकारता, साइकिल के पंक्चर टायर की तरह.

दुरेमार ने हरे कोट के पल्ले उठाए और चट्टान से नीचे उतरने लगाबार बार यह दुहराते हुए:

“मैंने कुछ नहीं किया, मैंने कुछ नहीं किया...”

मगर एक चढ़ाई पर वह फिसल गया, भयानक शोर और छपाक के साथ तालाब में औंधे मुंह जा गिरा.

कराबास बराबास जहाँ खड़ा था, वहीं खड़ा रहा. उसने सिर्फ अपना सिर कन्धों तक नीचे खींच लिया; उसकी दाढी किसी चीथड़े की तरह लटक रही थी. बुरातिनो, प्येरो और मल्वीना ऊपर पहुंचे. पापा कार्लो ने एक एक करके उन्हें उठाया और उंगली से धमकाते हुए बोले:

“तुम्हें अभी सबक सिखाता हूँ, शैतानों!”

और उन्हें सीने से लगा लिया.

फिर वह चट्टान से कुछ कदम नीचे उतरा और अभागे कुत्ते के पास बैठ गया. वफ़ादार आर्तेमोन ने थोबड़ा उठाया और कार्लो की नाक को चाटा. बुरातिनो ने फ़ौरन अपना सिर सीने से बाहर निकाला:

“पापा कार्लो, हम बगैर कुत्ते के घर नहीं जायेंगे.”

“ए–हे-हे,” कार्लो ने जवाब दिया, “मुश्किल होगी, खैर, किसी तरह तुम्हारे नन्हे कुत्ते को ले जाऊंगा.”

उसने आर्तेमोन को कंधे पर डाला और, भारी बोझ से दुहरा होते हुए, ऊपर चढ़ा, जहां, उसी तरह अपना सिर ताने, आंखें बाहर निकाले, कराबास बराबास खडा था. – “मेरी प्यारी गुड़ियों...” वह बुदबुदाया.

पापा कार्लो ने उसे गंभीरता से जवाब दिया:

“तुम भी ना! किसके साथ बुढ़ापे में पाला पड़ा है, - सारी दुनिया में मशहूर बदमाशों से, दुरेमार से, बिल्ले से, लोमड़ी से. छोटे लोगों की बेइज्ज़ती करते हो! शर्म आनी चाहिए, डॉक्टर! और कार्लो शहर के रास्ते पर चल पडा.

कराबास बराबास खिंचे हुए सिर से उसके पीछे पीछे चल पडा. “मेरी गुड़ियों को वापस दो!...” – “किसी कीमत पर न देना! – बुरातिनो सीने के पीछे से सिर बाहर निकालते हुए चीखा.

इस तरह चलते रहे, चलते रहे. ‘थ्री मिन्नोज़’ सराय को पार किया, जहां, गंजा मालिक दरवाज़े पर झुक कर खडा दोनों हाथों से भाप निकालते बर्तनों की ओर इशारा कर रहा था.

दरवाज़े के पास आगे-पीछे, आगे-पीछे अपनी नुची हुई पूंछ के साथ घूमते हुए, गुस्से से मुर्गा बुरातिनो की बदमाश हरकत के बारे में बता रहा था. मुर्गियां सहानुभूति से सिर हिला रही थीं:

“आह-आह, कितना डरावना है! ऊख-ऊख, हमारा बेचारा मुर्गा!...”

कार्लो पहाड़ी पर चढ़ गया, जहां से समुद्र दिखाई दे रहा थाजिसमें हवा चलने के कारण कहीं कहीं मटमैले पट्टे दिखाई दे रहे थे, किनारे के पास – छोटा सा पुराना शहर, जो तपते हुए सूरज के कारण रेत के रंग का दिखाई दे रहा था और कठपुतलियों के थियेटर की कैनवास की छत.   

कराबास बराबास कार्लो से तीन कदम पीछे खड़ा होकर गरजा:

“मैं तुम्हें गुड़िया के लिए सौ सोने के सिक्के दूंगा, बेच दे.”

बुरातिनो, मल्वीना और प्येरो की सांस रुक गई -  वे इंतज़ार करने लगे कि कार्लो क्या कहता है.

उसने जवाब दिया:

“नहीं! अगर तू थियेटर के दयालुअच्छे डाइरेक्टर होते, तो मैं तुम्हेंयूं ही इन नन्हे इंसानों को तुम्हें दे देता. मगर तुम – किसी मगरमच्छ से भी ज़्यादा बुरे हो. न तो तुम्हें दूंगा, न ही बेचूंगाभाग जा.”

कार्लो पहाडी से नीचे उतरा और, कराबास बराबास की ओर ध्यान न देते हुए, शहर में गया.  

वहां सुनसान चौक में पुलिसवाला निश्चल खडा था.

गर्मी और उकताहट के मारे उसके कान लटक गए थे, पलकें चिपक गईं थीं, तिकोनी हैट के ऊपर मक्खियाँ उड़ रही थीं.

कराबास बराबास ने अचानक अपनी दाढी को जेब में घुसाया, कार्लो को पीछे से कमीज़ से पकड़ा और पूरे चौक में गरजा:

“चोर को पकड़ो, उसने मेरी गुड़ियों को चुरा लिया है!...”

मगर पुलिस वाला, जिसे गर्मी लग रही थी और उकताहट हो रही थी हिला तक नहीं. कराबास बराबास उसकी तरफ उछला और मांग करने लगा कि कार्लो को गिरफ़्तार किया जाए.

“और तू कौन है?” पुलिसवाले ने आलस से पूछा.

“मैं गुड़ियों के विज्ञान का डॉक्टर, मशहूर थियेटर का डाइरेक्टर, सर्वश्रेष्ठ सम्मानप्राप्त नाईट, तरबार के राजा का निकटतम मित्र, सिन्योर कराबास बराबास हूँ...”

“मगर तुम मुझ पर चिल्लाओ नहीं,” पुलिसवाले ने जवाब दिया.

जब तक कराबास बराबास उससे उलझ रहा था, पापा कार्लो, जल्दी जल्दी  पुल के पत्थरों पर छडी खटखटाते हुए, उस घर के पास पहुंचा, जिसमें वह रहता था. उसने सीढ़ियों के नीचे वाली आधी अंधेरी कोठरी का दरवाज़ा खोला, अर्तेमोन को कंधे से नीचे उतारा, उसे बेंच पर रखा, बगल के पीछे से बुरातिनो, मल्वीना और प्येरो को बाहर निकाला और उम्हें एक दूसरे की बगल में मेज़ पर बिठा दिया. मल्वीना ने फ़ौरन कहा:

“पापा कार्लो, सबसे पहले बीमार कुत्ते पर ध्यान दीजिये. बच्चों, फ़ौरन हाथ-मुंह धो लो...”

अचानक उसने बदहवासी से हाथ हिलाए:

“और मेरे ड्रेसेस! मेरे नए जूते, मेरे रिबन्स खाई के नीचे छूट गए, गोखरुओं के बीच!...”

“कोई बात नहीं, परेशान न हो,” कार्लो ने कहा, “शाम को मैं जाऊंगा, तुम्हारी थैलियाँ ले आऊँगा.”

उसने सावधानी से अर्तेमोन के पंजों की पट्टियां खोल दीं. देखा, कि घाव करीब करीब अच्छे हो गए हैं, और कुत्ता अपनी जगह से इसलिए नहीं हिल पा रहा था, क्योंकि वह भूखा था.

“दलिए की एक प्लेट और दिमाग की हड्डी,” अर्तेमोन कराहा, “और मैं शहर के सारे कुत्तों से लड़ने के लिए तैयार हूँ.”

“आय-आय-आय,” कार्लो ने रोनी आवाज़ में कहा, “और मेरे पास एक भी टुकड़ा नहीं, जेब में एक भी सल्दो नहीं...”

मल्वीना दयनीयता से रो पड़ी. प्येर ने मुट्ठी से माथा पोंछा, कल्पना करते हुए.

“मैं रास्ते पर जाऊंगा, कवितायेँ सुनाऊंगा, आने जाने वाले मुझे मुट्ठियाँ भर के सल्दो देंगे.”

कार्लो ने सिर हिलाया:

“बेटे, तू आवारागर्दी के इल्ज़ाम में पुलिस-थाने में रात गुज़ारेगा. 

बुरातिनो को छोड़कर बाकी सभी उदास थे. वह चालाकी से मुस्कुरा रहा था, इस तरह गोल गोल घूम रहा था, जैसे मेज़ पर नहीं, बल्कि उल्टे बटन पर बैठा हो.

“दोस्तों, - बस हो गया रोना धोना!” वह फर्श पर कूदा और जेब से कुछ निकाला. “पापा कार्लो, फावड़ा लोदीवार से छेद वाले कैनवास को अलग करो.

और उसने अपनी लम्बी नाक से भट्टी की ओर इशारा किया, और भट्टी के ऊपर रखे बर्तन की ओर, और धुएँ की ओर, जो पुराने कैनवास के टुकड़े पर चित्रित थे.

कार्लो को अचरज हुआ.

“बच्चे, तुम दीवार से इस ख़ूबसूरत चित्र को क्यों चीरना चाहते हो? सर्दियों में मैं उसकी ओर देखता हूँ और कल्पना करता हूँ, कि ये असली आग है और हांडी में मटन का असली सालन है, लहसुन डाला हुआ, और मुझे थोड़ी गर्माहट महसूस होती है.”

“पापा कार्लो, गुड़ियों का ईमानदार वादा करता हूँ, -  तुम्हारे पास भट्टी में असली आग होगी, असली लोहे की हांडी होगी और गरम गरम सालन होगा. कैनवास फाड़ दो.”

बुरातिनो ने यह इतने विश्वास से कहा कि पापा कार्लो ने अपनी खोपड़ी खुजलाई, सिर हिलाया, घुरघुराया, घुरघुराया, - चिमटा और हथौड़ा लिया और कैनवास फाड़ने लगा. उसके पीछे, जैसा कि हम जानते हैं, सब कुछ मकड़ी के जालों से ढंका हुआ था और मरी हुई मकड़ियाँ लटक रही थीं.   

कार्लो ने सावधानी से मकड़ी के जाले हटाये. तब काले पड़ चुके चीड़ का छोटा सा दरवाज़ा दिखाई दिया. उस पर चारों कोनों में मुस्कुराते हुए चेहरे खुदे हुए थे, और बीच में – नाचता हुआ, लम्बी नाक वाला छोटा सा आदमी.

जब उसके ऊपर से धूल झाड़ी गई, तो मल्वीना, प्येरो, पापा कार्लो, और यहाँ तक कि भूखा अर्तेमोन भी एक सुर में चहके:

“ये तो खुद बुरातिनो का पोर्ट्रेट है!”

“मैंने ऐसा ही सोचा था,” बुरातिनो ने कहाहालांकि उसने ऐसा कुछ भी नहीं सोचा था और खुद भी चकित हो गया. – “और ये रही दरवाज़े की चाबी. पापा कार्लो, खोलो...”

ये छोटा सा दरवाज़ा और यह सुनहरी चाबी,” कार्लो ने कहा“बहुत पहले बनाए गए थेकिसी बहुत कुशल कारीगर द्वारा. चलो, देखते हैं, कि दरवाज़े के पीछे क्या छुपाया गया है.”

उसने चाबी दरवाज़े के छेद में डाली और उसे घुमाया...एक हल्की सी, प्यारी धुन गूंजी, जैसे कोई हार्मोनियम बज रहा हो...

पापा कार्लो ने दरवाज़े को धक्का दिया. वह चरमराहट के साथ खुलने लगा.

इसी समय खिड़की से बाहर तेज़ तेज़ कदमों की आवाज़ सुनाई दी, और साथ ही गरजी कराबास बराबास की आवाज़:  
“तराबार्स्क के राजा के नाम पर – बूढ़े बदमाश कार्लो को गिरफ्तार कीजिए!”