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गुप्त दरवाज़े के पीछे उन्हें क्या मिला.
अनुवाद: चारुमति रामदास
जब कराबास बराबास पागल की तरह भाग रहा था और अपनी दाढ़ी खीच रहा था, तब बुरातिनो – सबसे आगे, और उसके पीछे मल्वीना, प्येरो, अर्तेमोन और – सबसे अंत में – पापा कार्लो पत्थर की खड़ी सीढी से नीचे अंधेरे में उतर रहे थे.
पापा कार्लो ने जलती हुई मोमबत्ती का टुकड़ा पकड़ रखा था. उसकी फडफडाती लौ अर्तेमोन के झबरे सिर से या प्येरो के फैले हुए हाथ से बड़ी बड़ी परछाईयाँ डाल रही थी, मगर अँधेरे को प्रकाशमान नहीं कर रही थी, जहां सीढ़ी जा रही थी.
डर के मारे रो न पड़े, इसलिए मल्वीना अपने कानों में चुटकी काट रही थी.
प्येरो, - हमेशा की तरह, हर चीज़ से बेखबर,- कवितायेँ गुनगुना रहा था:
नाचती परछाईयाँ दीवार पर, -
नहीं है मुझे कोई डर.
सीढ़ी हो चाहे खड़ी,
या हो खतरनाक अन्धेरा, -
फिर भी भूमिगत रास्ता
ले जाएगा कहीं न कहीं...
बुरातिनो अपने साथियों से आगे चल रहा था, - नीचे गहराई में उसकी सफ़ेद टोपी मुश्किल से दिखाई दे रही थी.
अचानक किसी चीज़ के फुफकारने की, गिरने की, लुढ़कने की आवाज़ आई, और उसकी शिकायत भरी आवाज़ सुनाई दी:
“मेरी मदद करो!”
अर्तेमोन फ़ौरन, अपने ज़ख्मों और भूख को भूलकर, मल्वीना और प्येरो को फांदकर, काली आंधी की तरह सीढ़ियों से नीचे लपका.
उसके दांत किटकिटा रहे थे. कोई प्राणी घिनौनी आवाज़ में चिल्लाया.
सब कुछ शांत हो गया. सिर्फ मल्वीना का दिल अलार्म घड़ी की तरह ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था.
प्रकाश की एक चौड़ी किरण नीचे से सीढी टकराई. मोमबत्ती की लौ, जिसे पापा कार्लो ने पकड़ा था, पीली हो गई.
“देखिये, जल्दी देखिए!” बुरातिनो ने ज़ोर से पुकारा.
मल्वीना पलट कर जल्दी जल्दी एक एक सीढ़ी उतरने लगी, उसके पीछे उछल रहा था प्येरो. आख़िर में, झुककर, उतर रहा था कार्लो, जिसके लकड़ी के जूते बार बार पैरों से फिसल जा रहे थे.
नीचे, वहां, जहां सीधी सीढ़ी समाप्त हो रही थी, पत्थर के चौक पर अर्तेमोन बैठा था. वह अपने होंठ चाट रहा था. उसके पैरों के पास गला घोंटा हुआ चूहा शुशारा पड़ा था.
बुरातिनो दोनों हाथों से सडा हुआ नमदे का परदा हटा रहा था, - उससे पत्थर की दीवार में बने छेद को ढांका गया था. वहां से नीला प्रकाश निकल रहा था.
जब वे छेद से होकर निकले, तो सबसे पहली चीज़ जो उन्होंने देखी – वे थीं सूरज की बिखरती हुई किरणें. वे मेहराबदार छत से गिरकर गोल खिड़की से होते हुए आ रही थीं.
चौड़ी फ़ैली हुई किरणें, उनमें नृत्य करते हुए धूलकणों समेत पीले संगमरमर के गोल कमरे को प्रकाशित कर रही थीं. कमरे के बीचोंबीच आश्चर्यजनक रूप से सुन्दर गुड़ियों का थियेटर था. उसके परदे पर बिजली की आड़ी तिरछी रेखा चमचमा रही थी.
परदे के किनारों से दो वर्गाकार टॉवर्स उभरे, जिन्हें इस तरह रंगा गया था, मानो वे छोटी छोटी ईंटों से बने हों. टीन की ऊंची छतें चमचम चमक रही थीं.
बाएं टॉवर पर तांबे की सुईयों वाली घड़ी थी. डायल पर हर अंक के सामने एक लड़के और लड़की के हंसते हुए चेहरे थे.
दाएं टॉवर पर – रंगबिरंगे शीशों की गोल खिड़की थी.
इस खिड़की के ऊपर, हरे टीन की छत के ऊपर, बोलने वाला झींगुर बैठा था. जब सब लोग अपने मुंह खोले, इस अद्भुत थियेटर के सामने रुक गए, तो झींगुर ने स्पष्टता से धीरे धीरे कहा:
“मैंने चेतावनी दी थी, कि तुम्हें भयानक खतरों का सामना करना पडेगा, बुरातिनो. अच्छा हुआ कि सब कुछ अच्छी तरह समाप्त हो गया, मगर भयानक तरीके से भी समाप्त हो सकता था...तो...”
झींगुर की आवाज़ बूढ़ी और कुछ आहत थी, क्योंकि बोलने वाले झींगुर को अपने ज़माने में हथौड़े की मार पड़ी थी, और अपनी सौ साल की आयु और स्वाभाविक भलमनसाहत के बावजूद, वह अवांछित अपमान को भूल नहीं पाया था. इसलिए उसने आगे कुछ नहीं कहा, - अपनी मूंछें खींची, मानो उनसे धूल झाड़ रहा हो, और धीरे से कहीं अकेली दरार में रेंग गया – गहमा गहमी से दूर.
तब पापा कार्लो ने कहा:
“और मैं तो सोच रहा था, कि हमें यहाँ, हद से हद, सोने और चांदी का ढेर मिलेगा, - मगर मिला बस एक पुराना खिलौना.
वो टॉवर में बनी घड़ी के पास आए, डायल पर टकटक किया, और चूंकि घड़ी के किनारे तांबे की कील पर चाबी लटक रही थी, उन्होंने उसे लेकर घड़ी में चाबी भर दी...
ज़ोर से टिकटिक होने लगी. काटे चलने लगे. बड़ा काटा, बारह के पास पहुंचा, छोटा – छः के पास. टॉवर के भीतर कुछ गुनगुनाहट और फुसफुसाहट होने लगी. घड़ी ने खनखनाते हुए छः घंटे बजाये...
तभी दाएं टॉवर में रंगबिरंगे कांच से बनी छोटी सी खिड़की खुल गयी, घड़ी की चाबी का रंगबिरंगा पंछी बाहर कूदा और, अपने पंखों को फडफडाते कर उसने छः बार गाया:
“- यहाँ-यहाँ, यहाँ-यहाँ, यहाँ-यहाँ...”
पंछी छुप गया, खिड़की धडाम से बंद हो गई, सुरीला संगीत बजने लगा. और परदा उठ गया...
किसी ने भी, पापा कार्लो ने भी कभी इतनी सुन्दर सजावट नहीं देखी थी.
स्टेज पर एक बाग़ था. चांदी और सोने के पत्तों वाले छोटे छोटे पेड़ों पर नाखून जितने आकार की चाबी वाली मैनाएँ गा रही थीं. एक पेड़ पर सेब लटक रहे थे, जिनमें से हरेक कूटू के दाने से बड़ा नहीं था. पेड़ों के नीचे मोर घूम रहे थे और, पंजों के बल उठकर सेबों पर चोंच मार रहे थे. लॉन पर दो बकरी के बच्चे, उछल रहे थे और एक दूसरे को धक्के मार रहे थे, और हवा में मुश्किल से दिखाई देने वाली तितलियाँ उड़ रही थीं.
इस तरह एक मिनट बीत गया. मैनाएँ खामोश हो गईं, मोर और बकरी के मेमने बगल वाली विंग्स के पीछे हट गए. पेड़ स्टेज के फर्श के नीचे गुप्त तहखानों में गायब हो गए.
पीछे वाली सजावट से बारीक कपड़े के बादल छटने लगे. ऐसा लगा कि रेगिस्तान के ऊपर लाल सूरज आ गया है. दाएं और बाएं, बगल वाली विंग्स से लताओं की सांपों जैसी शाखाएं बाहर झाँकने लगीं, - उनमें से एक के ऊपर तो वाकई में सांप था. दूसरी पर अपनी पूंछें पकड़ कर बंदरों का परिवार झूल रहा था.
ये अफ्रीका था.
रेगिस्तान की रेत पर लाल सूरज के नीचे जानवर गुज़र रहे थे.
तीन छलांगों में अयाल वाला सिंह गुज़र गया, हांलाकि वह बिल्ली के बच्चे से बड़ा नहीं था, मगर डरावना था.
गिरते-पड़ते टेडी बेयर छाता लिए अपने पिछले पंजों पर चलकर निकल गया.
घिनौना मगरमच्छ रेंगते हुए आया, - उसकी घिनौनी आँखों ने दयालु होने का दिखावा किया. मगर फिर भी अर्तेमोन ने विश्वास नहीं किया और उस पर गुर्राने लगा.
एक गैंडा सरपट दौड़ते हुए आया – सुरक्षा के लिए उसके नुकीले सींग पर रबर की गेंद पहनाई गयी थी.
जिराफ भागते हुए गुज़रा, जो धारियों वाले, सींगों वाले ऊँट के समान था, पूरी ताकत से गर्दन बाहर निकाले हुए. फिर गुज़रा हाथी, - बच्चों का दोस्त, - बुद्धिमान, भले स्वभाव का, - अपनी सूंड हिला रहा था, जिसमें उसने सोया की कैंडी पकड़ रखी थी.
सबसे अंत में एक बहुत ही गंदा जंगली कुत्ता – सियार निकला. अर्तेमोन भौंकते हुए उस पर उछला, - पापा कार्लो को उसकी पूछ पकड़ कर मुश्किल से उसे खींचना पडा.
जानवर गुज़र गए. सूरज अचानक बुझ गया. अँधेरे में कुछ चीज़ें, ऊपर से नीचे आईं, कुछ चीज़ें बगल से सरका दी गईं. एक आवाज़ आई, जैसे तारों पर कमान खींची जा रही हो.
मटमैले स्ट्रीट लाईट्स जल उठे. स्टेज पर था शहर का चौक. घरों के दरवाज़े खुल गए, नन्हे इंसान बाहर भागे, खिलौनों की ट्राम में चढ़ गए. कंडक्टर ने घंटी बजाई, ड्राईवर ने हैंडल घुमाया, नन्हा बच्चा फ़ौरन सॉसेज से चिपक गया, पुलिस वाले ने सीटी बजाई, - ट्रामगाड़ी ऊंचे ऊंचे घरों के बीच से बगल वाली सड़क पर चली गई.
एक साइकिल सवार गुज़रा – जिसके पहिये जैम वाली प्लेट से बड़े नहीं थे. अखबार वाला भागा, - फाड़े हुए कैलेण्डर के पन्ने चौकोर आकार में रखे हुए – इतना ही आकार था उसके अखबारों का.
आईसक्रीम वाला चौक से आईसक्रीम की गाडी चला रहा था. घरों की छोटी छोटी बालकनियों में छोटी बच्चियां आईं और उसे देखकर हाथ हिलाने लगीं, मगर आईसक्रीम वाले ने हाथ हिला दिए और बोला:
“सब खा गए, अगली बार आना.”
अब परदा गिर गया, और उसके ऊपर फिर से बिजली की आड़ी- तिरछी, सुनहरी रेखा चमक गई.
पापा कार्लो, मल्वीना, प्येरो उत्तेजना के बाद अपने होश नहीं संभाल सके. बुरातिनो, जेबों में हाथ डाले, नाक हवा में उठाकर शेखी से बोला:
“तो – देखा? मतलब. मैं यूं ही आंटी तोर्तीला की दलदल में नहीं भीगा था...इस थियेटर में हम कॉमेडी प्रस्तुत करेंगे – पता है कौनसी? – ‘सुनहरी चाबी या बुरातिनो और उसके दोस्तों के असाधारण कारनामे’. कराबास बराबास निराशा से टूट जाएगा.”
प्येरो ने मुट्ठियों से झुर्रियों वाला माथा पोंछा:
“मैं शानदार पदों में ये कॉमेडी लिखूंगा.”
“मैं आईस्क्रीम और टिकट बेचूंगी,” मल्वीना ने कहा. – “अगर आपको मुझमें योग्यता नज़र आए, तो अच्छी लड़कियों की भूमिका करने की कोशिश करूंगी...”
“ठहरो, बच्चों, और पढाई कब करोगे?” पापा कार्लो ने पूछा.
सबने फ़ौरन जवाब दिया:
“पढाई करेंगे सुबह...और शाम को काम करेंगे थियेटर में...”
“अच्छा, ठीक हैं बच्चों,” पापा कार्लो ने कहा, “और बच्चों, मैं भी हारमोनियम बजाऊंगा, सम्माननीय पब्लिक के मनोरंजन के लिए, और अगर इटली में शहर-शहर घूमेंगे, तो मैं घोड़ा संभालूँगा और लहसुन के साथ मटन पकाऊंगा...”
अर्तेमोन ने अपना कान उठाकर सुना, चमकीली आंखों से दोस्तों की ओर देखा, पूछा: उसे क्या करना है?”
बुरातिनो ने कहा:
“अर्तेमोन थियेटर की संपत्ति की और नाटकों की वेशभूषा की हिफाज़त करेगा, हम उसे स्टोर रूम की चाबी देंगे. थियेटर में ‘शो’ के समय वह परदे के पीछे शेर की गर्जना, गैंडे की धमधम, मगरमच्छ के दांतों की किटकिटाहट, अपनी पूंछ को तेज़ी से घुमाते हुए हवा की साँय साँय या अन्य आवश्यक आवाजों का प्रभाव पैदा करेगा.”
“और तुम, और तुम, बुरातिनो?” सबने पूछा. “थियेटर में क्या बनोगे?”
“प्यारों, मैं कॉमेडी में अपने आप को ही पेश करूंगा और पूरी दुनिया में मशहूर हो जाऊंगा!”