मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026

बुरातिनो - 23

 

23


अनुवाद: चारुमति रामदास 


मल्वीना ने पुष्टि की: - वह शेर की तरह लड़ा

उसने प्येरो की गर्दन में हाथ डाल दिए और उसके दोनों गालों को चूम लिया.

“बस हो गया, बस हो गया चूमना,” बुरातिनो भुनभुनाया, “चलो भागते हैं, अर्तेमोन को पूंछ से घसीटेंगे.”

  उन तीनों ने अभागे कुत्ते की पूंछ पकड़ ली और उसे पहाडी पर ऊपर की ओर खींचने लगे.

“छोडिये, मैं खुद चला जाऊंगा, मुझे इतना अपमान लग रहा है,” पट्टियों से बंधा हुआ कुत्ता कराहा.

“नहीं, नहीं, तुम काफ़ी कमजोर हो.”

मगर वे मुश्किल से ढलान का आधा रास्ता पार कर पाए थे, कि ऊपर कराबास बराबास और दुरेमार प्रकट हुए. लोमड़ी अलीसा ने पंजे से भगोड़ों को दिखाया, बिल्ले बज़ीलियो ने अपनी मूंछों पर ताव दिया और हिकारत से गुरगुराया.   

“हा-हा-हा, कितना चालाक है!” कराबास बराबास ने ठहाका मारते हुए कहा. “सुनहरी चाबी अपने आप मेरे हाथों में आ रही है!”

बुरातिनो जल्दी से सोचने लगा कि इस नई मुसीबत से कैसे निकले. प्येरो ने मल्वीना को गले लगाया, वह हर कीमत पर उसका जीवन बचाना चाहता था. इस बार बचने की कोई उम्मीद नहीं थी.

ढलान के ऊपर दुरेमार ठहाके लगा रहा था.

“सिन्योर कराबास बराबास, बीमार कुत्ते को आप मुझे दे दीजिए, मैं उसे तालाब में जोंकों के पास फेंक दूंगा, ताकि मेरी जोंकें मोटी हो जाएँ...”

मोटे कराबास बराबास को नीचे उतरने में आलस आ रहा था, उसने भगोड़ों को अपनी सॉसेज जैसी उंगली से इशारा किया:

“आओ, मेरे पास आओ, बच्चों...”

“अपनी जगह से हिलना नहीं!” बुरातिनो ने हुक्म दिया. “मरना – कितना मजेदार है! प्येरो, अपनी सबसे बुरी कवितायेँ सुनाओ. मल्वीना ज़ोर ज़ोर ठहाके लगाओ...”

कुछ कमियों के बावजूद, मल्वीना एक अच्छी दोस्त थी. उसने आंसू पोंछे और इतने आक्रामक रूप से उनके लिए हंसने लगी जो ढलान के ऊपर खड़े थे.

प्येरो ने फ़ौरन कविता बनाई और अप्रिय आवाज़ में चीखने लगा:

अफसोस है लोमड़ी एलिस के लिए –

डंडा कर रहा उसका इंतज़ार.

बिल्ला बजीलियो है भिखारी –

चोर है, नीच बिल्ला.

दुरेमार, हमारा है बेवकूफ,

फूहड़ कुकुरमुत्ता.

कराबास तू बराबास,

नहीं डरते ज़्यादा तुझसे...

साथ ही बुरातिनो ठुमके लगा रहा था और चिढ़ा रहा था:

“ऐ, तू, गुड़ियों के थियेटर के डाइरेक्टर, बिअर के पुराने पीपे, मोटे बोरे, बेवकूफियों से ठसाठस भरे हुए, नीचे उतर, उतर कर हमारे पास आ, - मैं तेरी कम्बख्त दाढी पर थूकूँगा!”

जवाब में कराबास बराबास खतरनाक ढंग से गुर्राया, दुरेमार ने अपने पतले हाथ आसमान की ओर उठाए.

लोमड़ी अलीसा कुटिलता से हंस पड़ी.

 “इन बदमाशों की गर्दनें मरोड़ने की इजाज़त दीजिये?

बस, एक मिनट और, और सब ख़त्म हो जाता...अचानक सीटियाँ बजाते हुए अबाबीलें आ गईं:

“यहाँ, यहाँ, यहाँ!...”

कराबास बराबास के सिर के ऊपर मैगपाई चक्कर लगाने लगी, ज़ोर से बकबक करते हुए:

“जल्दी, जल्दी, जल्दी!...”

और चट्टान के ऊपर बूढ़े पापा कार्लो प्रकट हुए. आस्तीनें ऊपर किये हुए, हाथ में – नुकीली छड़ी थी, भँवे तनी हुई थीं...

उन्होंने कंधे से कराबास बराबास को धक्का दिया, कुहनी से – दुरेमार को, लोमड़ी अलीसा की पीठ पर डंडा खींच दिया, जूते से बिल्ले बज़ीलिओ को दूर उछाल दिया...

इसके बाद, झुककर और चट्टान से नीचे झांकते हुए, जहां लकड़ी के इन्सान खड़े थे, खुशी से बोले:

“मेरे बच्चे, बुरातिनो, नन्हे बदमाश, तू ज़िंदा है और तंदुरुस्त है, - जल्दी से मेरे पास आ जा!”

 

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