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बुरातिनो सुनहरी चाबी का रहस्य जान जाता है.
अनुवाद: चारुमति रामदास
कराबास बराबास और दुरेमार
तले हुए पिगलेट को खाकर तृप्त हो गए. मालिक ने गिलासों में वाईन डाली.
कराबास बराबास ने पिगलेट की
टांग चूसते हुए मालिक से कहा:
“बकवास वाइन है तेरी, उस सुराही
से डालो!” और उसने हड्डी से सुराही की ओर इशारा किया, जिसमें बुरातिनो बैठा
था.
तब
मालिक ने सुराही उठाई और उसे उलट दिया. बुरातिनो ने पूरी ताकत से कोहनियों को
सुराही के किनारों पर टिका दिया, ताकि बाहर न गिर जाए.
“वहां
कुछ-कुछ काला सा है,” कराबास बराबास भर्राया.
“वहां
कुछ कुछ सफ़ेद सा है,” दुरेमार ने पुष्टि की.
“सिन्योर, मेरी जुबान काट दो, मेरी कमर में गोली मार दो –
सुराही खाली है!”
“तो, उसे यहाँ मेज़ पर रख दे – हम
उसमें हड्डियां डालते जायेंगे.”
सुराही, जिसमें बुरातिनो बैठा था, गुड़ियों के थियेटर के
डाइरेक्टर और औषधीय जोंकों के विक्रेता के बीच में रखी गयी. बुरातिनो के सिर पर
कुतरी हुई हड्डियां और छिलके गिर रहे थे.
बहुत
सारी वाईन पीने के बाद कराबास बराबास ने भट्टी की आग की तरफ़ दाढी फैला दी, ताकि उससे चिपकी हुई राल टपक
जाए.
“बुरातिनो
को हथेली पर रखूंगा,” - उसने शेखी मारते हुए कहा, “दूसरी हथेली से झापड़
मारूंगा,
- उसके नीचे गीला हो जाएगा.”
“बदमाश पूरी तरह इसी के काबिल है,” दुरेमार ने पुष्टि की, “मगर पहले उस पर अच्छी तरह
से जोंकें चिपकाई जाएं, जिससे
वे उसका पूरा खून सोख लें...”
“नहीं!” कराबास बराबास ने मुट्ठी मारते हुए कहा, “पहले मैं उसके पास से
सुनहरी चाबी छीनूंगा...”
मालिक भी बातचीत में शामिल हो गया, - उसे लकड़ी के नन्हे-नन्हे
लोगों के पलायन के बारे में पहले से ही पता चल गया था.
“सिन्योर, आपको खोजने की तकलीफ़ उठाने की कोई ज़रुरत नहीं है. मैं अभी दो फुर्तीले
छोकरों को बुलाता हूँ, - जब तक आप वाईन पीकर तरोताज़ा होते हैं, वे फुर्ती से सारा जंगल छान मारेंगे और
बुरातिनो को घसीटते हुए यहाँ ले आयेंगे.
“अच्छा. भेजो छोकरों को,” कराबास बराबास ने अपने भारी भरकम तलवों को आग
के सामने रखते हुए कहा. और चूंकि वह नशे में धुत हो गया था, तो गला फाड़कर गाना गाने लगा:
मेरे लोग हैं अजीब,
बुद्धू, काठ का,
गुड़ियों का मालिक,
ऐसा हूँ मैं, चलो भी ...
खतरनाक करबास,
शानदार बरबास...
गुड़िया मेरे सामने
बिछ जातीं जैसे घास.
चाहे हो तुम सुन्दर
मेरे पास है चाबुक,
चाबुक सात पूंछों वाला,
चाबुक सात पूंछों वाला.
जैसे ही हिलाऊंगा कोड़ा –
मेरे लोग हैं नम्र
खूब गायेंगे गाने,
जमा करेंगे पैसे
मेरी बड़ी जेब में,
मेरी बड़ी जेब में...
तब
बुरातिनो ने सुराही की गहराई से गरजती हुई आवाज़ में बोला: ‘भेद खोल, अभागे, भेद खोल!...”
कराबास
बराबास ने आश्चर्यचकित होकर अपने जबड़े किटकिटाए और आंखें निकालते हुए दुरेमार की
ओर देखा.
“क्या
ये तुम हो?”
“नहीं,
ये मैं नहीं था...”
“तो
फिर किसने कहा,
कि मैं रहस्य खोल दूं?”
दुरेमार अन्धविश्वासी था, इसके अलावा, उसने बहुत सारी वाईन भी पी ली थी. डर के मारे
उसका चेहरा नीला पड़ गया और उस पर झुर्रियां पड़ गईं, खुरदुरे मशरूम की तरह. उसकी तरफ़ देखते हुए
कराबास बराबास भी दांत किटकिटाने लगा.
“रहस्य खोल,” सुराही की गहराई से फिर से भेदभरी आवाज़ चीखी, “वरना तू इस कुर्सी से उठ
नहीं पायेगा,
अभागे!”
कराबास बराबास ने उछलने की कोशिश की, मगर वह थोड़ा सा भी उठ नहीं
पाया.
“कै-कै-कैसा रा-रह-रहस्य?” उसने हकलाते हुए पूछा.
आवाज़ ने जवाब दिया:
“कछुए तर्तीला का रहस्य.”
डर के मारे दुरेमार धीरे धीरे मेज़ के नीचे रेंग गया.
कराबास बराबास का जबड़ा गिर गया.
“दरवाज़ा कहां है, दरवाज़ा कहां है?”- शरद ऋतु की रात में पाईप में गूँजती हुई हवा
के समान आवाज गरजी...
“बताता हूँ, बताता हूँ, चुप हो जा, चुप हो जा!” कराबास बराबास फुसफुसाया. “दरवाज़ा –
बूढ़े कार्लो की कोठरी में है, चित्र बनी हुई चिमनी के पीछे...”
उसने ये शब्द कहे ही थे, कि आंगन से मालिक भीतर आया.
“ये हैं वफ़ादार छोकरे, पैसों के लिए, सिन्योर, वे आपके पास शैतान को भी ले
आयेंगे...”
और उसने दरवाज़े में खड़ी लोमड़ी अलीसा और बिल्ले बज़ीलियो
की ओर इशारा किया. लोमड़ी ने आदर से पुरानी हैट उतार दी:
“सिन्योर कराबास बराबास आपको गरीबी के कारण दस सोने के
सिक्के देंगे,
और हम आपके हाथों में बदमाश बुरातिनो को सौंप देंगे, इस जगह से बिना हिले.”
कराबास बराबास ने दाढ़ी के नीचे जैकेट की जेब में हाथ
डाला,
दस सोने के सिक्के निकाले.
“ये रहे पैसे, मगर बुरातिनो कहां है?’
लोमड़ी ने कई बार सिक्के गिने, गहरी सांस ली, आधे बिल्ले को दिए, और पंजे से इशारा किया;
“वो इस सुराही में है, सिन्योर, आपकी नाक के नीचे...”
कराबास बराबास ने मेज़ से सुराही उठाई और तैश में उसे
पत्थर के फर्श पर तोड़ दिया. सुराही के टुकड़ों और कुतरी हुई हड्डियों के ढेर से
बुरातिनो बाहर उछला. जब तक सब मुंह खोले खड़े थे, वह, तीर की तरह, सराय से आंगन में भागा – सीधे मुर्गे की ओर, जो बड़ी देर से गर्व से कभी एक आंख से तो कभी
दूसरी आंख से मरे हुए कीड़ों को देख रहा था.
“तो, ये तूने मुझे धोखा दिया है, सड़े हुए खीमे!” तैश में नाक बाहर निकालते हुए बुरातिनो ने उससे कहा. “अब
अपनी पूरी ताकत से मुझे नोंचो...”
और वह उसकी शानदार पूंछ से कसकर चिपक गया. मुर्गे को
कुछ भी समझ में नहीं आया, वह पंख फैलाकर अपनी लम्बी टांगों से भागने लगा. बुरातिनो – तैश में – उसके
पीछे,
- टीले के नीचे,
रास्ते से होकर,
खेत से,
जंगल की ओर.
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