शनिवार, 21 फ़रवरी 2026

बुरातिनो - 25

  


25


कराबास बराबास सीढ़ी के नीचे वाली कोठरी में घुसता है.


अनुवाद: चारुमति रामदास 


कराबास बराबास ने, जैसा कि हम जानते हैं, बहुत कोशिश की ऊंघते हुए पुलिसवाले को मनाने की, कि वह कार्लो को गिरफ़्तार करे. कुछ भी हासिल न होने पर, कराबास बराबास रास्ते पर भागने लगा.

उसकी लहराती हुई दाढ़ी आने जाने वालों के बटन और छतरियों में उलझ रही थी.

वह धक्के दे रहा था और दांत किटकिटा रहा था. उसके पीछे लडके तीखी सीटियां बजा रहे थे, उसकी पीठ पर सड़े हुए सेब फेंक रहे थे.

कराबास बराबास शहर-प्रमुख के यहाँ गया. इस दोपहर के गर्म समय में प्रमुख बगीचे में बैठा था, फ़व्वारे के निकट, सिर्फ अंडरवियर पहने और लेमोनेड पी रहा था.

प्रमुख की छः ठोडियां थीं, उसकी नाक गुलाबी गालों में डूब गई  थी. उसकी पीठ के पीछे, चीड़ के नीचे, चार उदास पुलिसवाले बार बार लेमोनेड़ की बोतलें खोल रहे थे.

कराबास बराबास प्रमुख के सामने घुटनों पर गिर गया और, दाढी से चेहरे पर आये आंसू फैलाते हुए चिल्लाने लगा:

“मैं अभागा अनाथ हूँ, मेरा अपमान किया गया, मेरा सब कुछ लूट लिया गया, मुझे मारा गया...”

“अनाथ बच्चे, तेरा किसने अपमान किया है?” प्रमुख ने मुश्किल से सांस लेते हुए पूछा.

“सबसे दुष्ट शत्रु, घुमक्कड़, बाजा बजाने वाला कार्लो. उसने मेरी तीन सबसे बढ़िया गुड़ियों को चुरा लिया, वह मेरे मशहूर थियेटर को आग लगाना चाहता है, अगर उसे फ़ौरन गिरफ्तार न किया गया, तो वह पूरे शहर को जला देगा और लूट लेगा.

अपने शब्दों को प्रभावशाली बनाने के लिए कराबास बराबास ने मुट्ठी भर सोने के सिक्के बाहर खीँचे और प्रमुख के जूते में डाल दिए.  

संक्षेप में, उसने ऐसी शिकायतें कीं, इतना झूठ बोला, कि डरे हुए प्रमुख ने चीड़ के नीचे खड़े चार पुलिसवालों को हुक्म दिया:

“आदरणीय अनाथ के साथ जाओ और क़ानून के नाम पर जो भी आवश्यक हो, करो.”

कराबास बराबास चारों पुलिसवालों के साथ कार्लो की कोठरी की ओर भागा और चिल्लाया:

“गिबरीश के राजा के नाम पर – चोर और बदमाश को गिरफ़्तार करो!”

मगर दरवाज़े बंद थे. कोठरी में किसी ने जवाब नहीं दिया. कराबास बराबास ने हुक्म दिया:

“गिबरीश के राजा के नाम से – दरवाज़ा तोड़ दो!”

पुलिसवालों ने दरवाज़ा दबाया, दरवाज़े के सड़े हुए पल्ले कुंदों से गिर गए, और चारों बहादुर पुलिसवाले, अपनी तलवारें खनखनाते हुए, सीढ़ी के नीचे वाली कोठरी में घुस गए.

यह ठीक उसी पल हुआ, जब दीवार में छुपे गुप्त दरवाज़े से, झुककर कार्लो निकल रहा था.   

वह सबसे अंत में छुपा. दरवाज़ा – झन्!...धडाम से बंद हो गया. हल्का संगीत भी बंद हो गया. सीढ़ी के नीचे कोठरी में सिर्फ गंदी पट्टियां और फटा हुआ कैनवास पड़े हुए थे, जिस पर भट्टी का चित्र था...

कराबास बराबास गुप्त दरवाज़े की ओर कूद गया, उसे मुट्ठियों और जूतों से मारने लगा:

“त्रा-ता–ता-ता !”

मगर दरवाज़ा मज़बूत था.

कराबास बराबास भाग कर आया और दरवाज़े पर अपनी पीठ से धक्का मारा.

दरवाज़ा नहीं खुला.

वह पैर पटकते हुए पुलिसवालों के पास गया:

तराबार्स्की सम्राट के नाम पर इस नासपीटे दरवाज़े को तोड़ दो!...”

पुलिसवाले एक दूसरे को टटोल रहे थे – कोई नाक के धब्बे देख रहा था, कोई सिर का घूमड़. 

“नहीं, यहां काम बहुत भारी है,” – उन्होंने जवाब दिया और शहरप्रमुख के पास यह कहने के लिए गए, कि उन्होंने सब कुछ क़ानून के अनुसार किया है, मगर लगता है, कि बूढ़े घुमक्कड़ ऑर्गन वादक की खुद शैतान मदद कर रहा है, क्योंकि वह दीवार के आरपार निकल गया.

कराबास बराबास ने अपनी दाढ़ी नोंची, फर्श पर लोट गया और पागल की तरह सीढ़ी के नीचे वाली खाली कोठरी में बिसूरने लगा, चीखने-चिल्लाने लगा और लोट पोट होने लगा.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

टिप्पणी: केवल इस ब्लॉग का सदस्य टिप्पणी भेज सकता है.