गुरुवार, 19 फ़रवरी 2026

बुरातिनो - 24

 24


आखिरकार बुरातिनो पापा कार्लो, मल्वीना, प्येरो और अर्तेमोन के साथ घर लौटता है.

अनुवाद: चारुमति रामदास 


कार्लो के अचानक प्रकट होने से, उसकी छड़ी और चढ़ी हुई भौंहों से बदमाश भयभीत हो गए.

लोमड़ी अलीसा घनी घास में घुस गई और वहां भागने लगी, कभी कभी ठहर जाती, क्योंकि छड़ी की मार से सिहर उठती थी. बिल्ला बज़ीलियो, दस कदम उड कर गुस्से से फुफकारता, साइकिल के पंक्चर टायर की तरह.

दुरेमार ने हरे कोट के पल्ले उठाए और चट्टान से नीचे उतरने लगाबार बार यह दुहराते हुए:

“मैंने कुछ नहीं किया, मैंने कुछ नहीं किया...”

मगर एक चढ़ाई पर वह फिसल गया, भयानक शोर और छपाक के साथ तालाब में औंधे मुंह जा गिरा.

कराबास बराबास जहाँ खड़ा था, वहीं खड़ा रहा. उसने सिर्फ अपना सिर कन्धों तक नीचे खींच लिया; उसकी दाढी किसी चीथड़े की तरह लटक रही थी. बुरातिनो, प्येरो और मल्वीना ऊपर पहुंचे. पापा कार्लो ने एक एक करके उन्हें उठाया और उंगली से धमकाते हुए बोले:

“तुम्हें अभी सबक सिखाता हूँ, शैतानों!”

और उन्हें सीने से लगा लिया.

फिर वह चट्टान से कुछ कदम नीचे उतरा और अभागे कुत्ते के पास बैठ गया. वफ़ादार आर्तेमोन ने थोबड़ा उठाया और कार्लो की नाक को चाटा. बुरातिनो ने फ़ौरन अपना सिर सीने से बाहर निकाला:

“पापा कार्लो, हम बगैर कुत्ते के घर नहीं जायेंगे.”

“ए–हे-हे,” कार्लो ने जवाब दिया, “मुश्किल होगी, खैर, किसी तरह तुम्हारे नन्हे कुत्ते को ले जाऊंगा.”

उसने आर्तेमोन को कंधे पर डाला और, भारी बोझ से दुहरा होते हुए, ऊपर चढ़ा, जहां, उसी तरह अपना सिर ताने, आंखें बाहर निकाले, कराबास बराबास खडा था. – “मेरी प्यारी गुड़ियों...” वह बुदबुदाया.

पापा कार्लो ने उसे गंभीरता से जवाब दिया:

“तुम भी ना! किसके साथ बुढ़ापे में पाला पड़ा है, - सारी दुनिया में मशहूर बदमाशों से, दुरेमार से, बिल्ले से, लोमड़ी से. छोटे लोगों की बेइज्ज़ती करते हो! शर्म आनी चाहिए, डॉक्टर! और कार्लो शहर के रास्ते पर चल पडा.

कराबास बराबास खिंचे हुए सिर से उसके पीछे पीछे चल पडा. “मेरी गुड़ियों को वापस दो!...” – “किसी कीमत पर न देना! – बुरातिनो सीने के पीछे से सिर बाहर निकालते हुए चीखा.

इस तरह चलते रहे, चलते रहे. ‘थ्री मिन्नोज़’ सराय को पार किया, जहां, गंजा मालिक दरवाज़े पर झुक कर खडा दोनों हाथों से भाप निकालते बर्तनों की ओर इशारा कर रहा था.

दरवाज़े के पास आगे-पीछे, आगे-पीछे अपनी नुची हुई पूंछ के साथ घूमते हुए, गुस्से से मुर्गा बुरातिनो की बदमाश हरकत के बारे में बता रहा था. मुर्गियां सहानुभूति से सिर हिला रही थीं:

“आह-आह, कितना डरावना है! ऊख-ऊख, हमारा बेचारा मुर्गा!...”

कार्लो पहाड़ी पर चढ़ गया, जहां से समुद्र दिखाई दे रहा थाजिसमें हवा चलने के कारण कहीं कहीं मटमैले पट्टे दिखाई दे रहे थे, किनारे के पास – छोटा सा पुराना शहर, जो तपते हुए सूरज के कारण रेत के रंग का दिखाई दे रहा था और कठपुतलियों के थियेटर की कैनवास की छत.   

कराबास बराबास कार्लो से तीन कदम पीछे खड़ा होकर गरजा:

“मैं तुम्हें गुड़िया के लिए सौ सोने के सिक्के दूंगा, बेच दे.”

बुरातिनो, मल्वीना और प्येरो की सांस रुक गई -  वे इंतज़ार करने लगे कि कार्लो क्या कहता है.

उसने जवाब दिया:

“नहीं! अगर तू थियेटर के दयालुअच्छे डाइरेक्टर होते, तो मैं तुम्हेंयूं ही इन नन्हे इंसानों को तुम्हें दे देता. मगर तुम – किसी मगरमच्छ से भी ज़्यादा बुरे हो. न तो तुम्हें दूंगा, न ही बेचूंगाभाग जा.”

कार्लो पहाडी से नीचे उतरा और, कराबास बराबास की ओर ध्यान न देते हुए, शहर में गया.  

वहां सुनसान चौक में पुलिसवाला निश्चल खडा था.

गर्मी और उकताहट के मारे उसके कान लटक गए थे, पलकें चिपक गईं थीं, तिकोनी हैट के ऊपर मक्खियाँ उड़ रही थीं.

कराबास बराबास ने अचानक अपनी दाढी को जेब में घुसाया, कार्लो को पीछे से कमीज़ से पकड़ा और पूरे चौक में गरजा:

“चोर को पकड़ो, उसने मेरी गुड़ियों को चुरा लिया है!...”

मगर पुलिस वाला, जिसे गर्मी लग रही थी और उकताहट हो रही थी हिला तक नहीं. कराबास बराबास उसकी तरफ उछला और मांग करने लगा कि कार्लो को गिरफ़्तार किया जाए.

“और तू कौन है?” पुलिसवाले ने आलस से पूछा.

“मैं गुड़ियों के विज्ञान का डॉक्टर, मशहूर थियेटर का डाइरेक्टर, सर्वश्रेष्ठ सम्मानप्राप्त नाईट, तरबार के राजा का निकटतम मित्र, सिन्योर कराबास बराबास हूँ...”

“मगर तुम मुझ पर चिल्लाओ नहीं,” पुलिसवाले ने जवाब दिया.

जब तक कराबास बराबास उससे उलझ रहा था, पापा कार्लो, जल्दी जल्दी  पुल के पत्थरों पर छडी खटखटाते हुए, उस घर के पास पहुंचा, जिसमें वह रहता था. उसने सीढ़ियों के नीचे वाली आधी अंधेरी कोठरी का दरवाज़ा खोला, अर्तेमोन को कंधे से नीचे उतारा, उसे बेंच पर रखा, बगल के पीछे से बुरातिनो, मल्वीना और प्येरो को बाहर निकाला और उम्हें एक दूसरे की बगल में मेज़ पर बिठा दिया. मल्वीना ने फ़ौरन कहा:

“पापा कार्लो, सबसे पहले बीमार कुत्ते पर ध्यान दीजिये. बच्चों, फ़ौरन हाथ-मुंह धो लो...”

अचानक उसने बदहवासी से हाथ हिलाए:

“और मेरे ड्रेसेस! मेरे नए जूते, मेरे रिबन्स खाई के नीचे छूट गए, गोखरुओं के बीच!...”

“कोई बात नहीं, परेशान न हो,” कार्लो ने कहा, “शाम को मैं जाऊंगा, तुम्हारी थैलियाँ ले आऊँगा.”

उसने सावधानी से अर्तेमोन के पंजों की पट्टियां खोल दीं. देखा, कि घाव करीब करीब अच्छे हो गए हैं, और कुत्ता अपनी जगह से इसलिए नहीं हिल पा रहा था, क्योंकि वह भूखा था.

“दलिए की एक प्लेट और दिमाग की हड्डी,” अर्तेमोन कराहा, “और मैं शहर के सारे कुत्तों से लड़ने के लिए तैयार हूँ.”

“आय-आय-आय,” कार्लो ने रोनी आवाज़ में कहा, “और मेरे पास एक भी टुकड़ा नहीं, जेब में एक भी सल्दो नहीं...”

मल्वीना दयनीयता से रो पड़ी. प्येर ने मुट्ठी से माथा पोंछा, कल्पना करते हुए.

“मैं रास्ते पर जाऊंगा, कवितायेँ सुनाऊंगा, आने जाने वाले मुझे मुट्ठियाँ भर के सल्दो देंगे.”

कार्लो ने सिर हिलाया:

“बेटे, तू आवारागर्दी के इल्ज़ाम में पुलिस-थाने में रात गुज़ारेगा. 

बुरातिनो को छोड़कर बाकी सभी उदास थे. वह चालाकी से मुस्कुरा रहा था, इस तरह गोल गोल घूम रहा था, जैसे मेज़ पर नहीं, बल्कि उल्टे बटन पर बैठा हो.

“दोस्तों, - बस हो गया रोना धोना!” वह फर्श पर कूदा और जेब से कुछ निकाला. “पापा कार्लो, फावड़ा लोदीवार से छेद वाले कैनवास को अलग करो.

और उसने अपनी लम्बी नाक से भट्टी की ओर इशारा किया, और भट्टी के ऊपर रखे बर्तन की ओर, और धुएँ की ओर, जो पुराने कैनवास के टुकड़े पर चित्रित थे.

कार्लो को अचरज हुआ.

“बच्चे, तुम दीवार से इस ख़ूबसूरत चित्र को क्यों चीरना चाहते हो? सर्दियों में मैं उसकी ओर देखता हूँ और कल्पना करता हूँ, कि ये असली आग है और हांडी में मटन का असली सालन है, लहसुन डाला हुआ, और मुझे थोड़ी गर्माहट महसूस होती है.”

“पापा कार्लो, गुड़ियों का ईमानदार वादा करता हूँ, -  तुम्हारे पास भट्टी में असली आग होगी, असली लोहे की हांडी होगी और गरम गरम सालन होगा. कैनवास फाड़ दो.”

बुरातिनो ने यह इतने विश्वास से कहा कि पापा कार्लो ने अपनी खोपड़ी खुजलाई, सिर हिलाया, घुरघुराया, घुरघुराया, - चिमटा और हथौड़ा लिया और कैनवास फाड़ने लगा. उसके पीछे, जैसा कि हम जानते हैं, सब कुछ मकड़ी के जालों से ढंका हुआ था और मरी हुई मकड़ियाँ लटक रही थीं.   

कार्लो ने सावधानी से मकड़ी के जाले हटाये. तब काले पड़ चुके चीड़ का छोटा सा दरवाज़ा दिखाई दिया. उस पर चारों कोनों में मुस्कुराते हुए चेहरे खुदे हुए थे, और बीच में – नाचता हुआ, लम्बी नाक वाला छोटा सा आदमी.

जब उसके ऊपर से धूल झाड़ी गई, तो मल्वीना, प्येरो, पापा कार्लो, और यहाँ तक कि भूखा अर्तेमोन भी एक सुर में चहके:

“ये तो खुद बुरातिनो का पोर्ट्रेट है!”

“मैंने ऐसा ही सोचा था,” बुरातिनो ने कहाहालांकि उसने ऐसा कुछ भी नहीं सोचा था और खुद भी चकित हो गया. – “और ये रही दरवाज़े की चाबी. पापा कार्लो, खोलो...”

ये छोटा सा दरवाज़ा और यह सुनहरी चाबी,” कार्लो ने कहा“बहुत पहले बनाए गए थेकिसी बहुत कुशल कारीगर द्वारा. चलो, देखते हैं, कि दरवाज़े के पीछे क्या छुपाया गया है.”

उसने चाबी दरवाज़े के छेद में डाली और उसे घुमाया...एक हल्की सी, प्यारी धुन गूंजी, जैसे कोई हार्मोनियम बज रहा हो...

पापा कार्लो ने दरवाज़े को धक्का दिया. वह चरमराहट के साथ खुलने लगा.

इसी समय खिड़की से बाहर तेज़ तेज़ कदमों की आवाज़ सुनाई दी, और साथ ही गरजी कराबास बराबास की आवाज़:  
“तराबार्स्क के राजा के नाम पर – बूढ़े बदमाश कार्लो को गिरफ्तार कीजिए!”

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