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बुरातिनो वर्णमाला की किताब बेच देता है और गुड़ियों के थियेटर का टिकिट खरीद
लेता है.
अनुवाद: आ. चारुमति रामदास
बुरातिनो ने सुबह
जल्दी-जल्दी वर्णमाला की किताब बैग में रख ली और छलांग लगाते हुए स्कूल भाग गया.
रास्ते में उसने उन मिठाईयों
की ओर भी नहीं देखा, जिन्हें दुकानों में सजा कर रखा गया था, - शहद में लिपटी खसखस की
तिकोनी मिठाईयाँ, मीठी पाई, और डंडों पर लगे मुर्गों के आकार के लॉलीपॉप.
वह उन लड़कों की तरफ़ भी नहीं
देखना चाहता था, जो कागज़ के सांप उड़ा रहे थे.
धारियों वाली बिल्ली बज़ीलियो,
जिसकी पूंछ पकड़ी जा सकती थी, रास्ता पार कर रही थी. मगर बुरातिनो ने ऐसा करने से
अपने आप को रोक लिया.
जैसे जैसे वह स्कूल के पास
पहुँच रहा था, उतने ही ज़्यादा जोर से कुछ ही दूरी पर, खुशनुमा संगीत सुनाई दे रहा
था.
- पी-पी-पी, - बंसी चीं चीं कर रही थी.
- ला-ला-ला- वॉयलीन गा रहा था.
- ज़िन-ज़िन – तांबे की तश्तरियां टिनटिन कर रही थीं.
- बूम! – ड्रम दनादन मार रहा था.
-
स्कूल के
लिए दाईं ओर मुड़ना था, संगीत सुनाई दे रहा था बाईं तरफ़ से. बुरातिनो लड़खड़ाने लगा. पैर अपने आप
समुद्र की ओर मुड़ गए, जहां:
- ‘पी-पी, पीईईई...
- ज़िन-लाला, ज़िन-ला-ला..
- बूम!
‘स्कूल तो
कहीं भागा नहीं जा रहा है’, बुरातिनो अपने आप से ज़ोर ज़ोर से बातें करने लगा, - मैं
सिर्फ झाँकूंगा, थोड़ा सा सुनूंगा – और भाग कर स्कूल पहुँच जाऊंगा.
पूरी ताकत
से वह समुन्दर की तरफ़ भागने लगा. उसे एक धारियों वाला तम्बू दिखाई दिया, जो समंदर
से चल रही हवा में फडफडाती हुई रंगबिरंगी झंडियों से सजा हुआ था.
तंबू के
ऊपर, चार संगीतकार नाच रहे थे.
नीचे एक
मोटी, मुस्कुराती हुई आन्टी टिकट बेच रही थी.
प्रवेश
द्वार के पास लोगों की बहुत बड़ी भीड़ खड़ी थी – लड़के और लड़कियां, सैनिक, लेमोनेड
बेचने वाले, नन्हे बच्चों को दूध पिलाती हुई आयाएँ, आग बुझाने वाले, पोस्टमैन, - सब-सभी बड़ा
भारी इश्तेहार पढ़ रहे थे:
गुड़ियों का
थियेटर
सिर्फ एक
शो
जल्दी
आईये!
जल्दी
आईये!
जल्दी
आईये!
बुरातिनो ने एक लडके को बांह पकड़ कर खीचा:
“बताईये,
प्लीज़,
अन्दर जाने के लिए टिकट कितने का है?”
लड़के ने दांत भींचते हुए आराम से जवाब दिया:
“चार साल्दा, लकड़ी के नन्हे इंसान.”
“आप समझ रहे हैं, बच्चे, मैं अपना बटुआ घर में भूल
गया...क्या आप मुझे चार साल्दा उधार दे सकते हैं?...”
लड़के ने तिरस्कार से सीटी बजाई:
“ये मिला एक बेवकूफ!...”
“मुझे बहुहुहुहुत ख्वाहिश है गुड़ियों का थियेटर देखने की!” आँसू बहाते हुए
बुरातिनो ने कहा.
“चार साल्दो में मेरा गज़ब का जैकेट खरीद लीजिये...”
“कागज़ का जैकेट चार साल्दो में? किसी और बेवकूफ़ को ढूंढ.”
“खैर,
तो मेरी बढ़िया टोपी...”
“तेरी टोपी से तो सिर्फ टैडपोल को पकड़ सकते हैं...किसी और बेवकूफ को ढूंढ.”
बुरातिनो की नाक सर्द हो गयी – इतना दिल चाह रहा था उसका थियेटर में जाने
को.
“लडके,
तो चार साल्दो में मेरी नई वर्णमाला की किताब खरीद लो...”
“चित्रों के साथ?”
“गज़ज़ज़ब की तस्वीरों वाली और बड़े बड़े अक्षरों वाली.”
“अच्छा दे दे,” लड़के ने कहा, वर्णमाला
की किताब ले ली और बेमन से चार साल्दो गिनकर दे दिए.
बुरातिनो मुस्कुराती मोटी औरत के पास भागा और चिरचिराया:
“सुनिए,
मुझे इकलौते गुड़ियों के थियेटर के शो के लिए पहली कतार में टिकट दीजिए.”
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