शनिवार, 10 जनवरी 2026

बुरातिनो - 6

 6


अनुवाद: चारुमति रामदास 


अपनी लम्बी दाढ़ी का नीचे वाला भाग जेब में घुसाकर, ताकि वह तंग न करे, वह भट्टी के सामने बैठा, जहां डंडे पर एक पूरा खरगोश और दो मुर्गियाँ भूनी जा रही थीं.

उँगलियों को एक दूसरे पर मलकर उसने भूने जा रहे खरगोश को स्पर्श किया, उसे वह नम प्रतीत हुआ.

भट्टी में लकडियाँ कम थीं. तब उसने तीन बार ताली बजाई.

अर्लेकिन और प्येरो भागकर आये.

“मेरे पास इस निठल्ले बुरातिनो को लाओ,” सिन्योर कराबास बराबास ने कहा. “वह सूखी लकड़ी से बना है, मैं उसे आग में फेंक दूंगा, मेरा खरगोश अच्छी तरह भुन जाएगा.

अर्लेकिनो और प्येरो घुटनों पर बैठ गए, अभागे बुरातिनो के लिए दया की भीख मांगने लगे.

“और, मेरा चाबुक कहाँ है?” करबास बरबास चीखा.

तब वे, बिसूरते हुए गोदाम में गएकील पर टंगे बुरातिनो को उतारा और खींचकर किचन में ले आये.

सिन्योर करबास बरबास, बुरातिनो को भट्टी में जलाने के बदले उसे पांच सोने के सिक्के देता है और घर भेज देता है.

जब कठपुतलियों ने बुरातिनो के खींचकर भट्टी की जाली के पास फर्श पर डाल दिया, तो सिन्योर कराबास बराबास, भयानक रूप से नाक सुड़कते हुएचिमटे से कोयले ऊपर नीचे करने लगा.

अचानक उसकी आंखों में जैसे खून उतर आया, फिर नाक, फिर पूरा चेहरा आड़ी झुर्रियों से भर गया. हो सकता है, उसकी नाक में कोयले का टुकड़ा घुस गया हो.

“आप्...आप्..आप्..” कराबास बराबास आंखें घुमाते हुए कराहा, “आप्-छी!”

और वह इस तरह छींका कि भट्टी में राख स्तंभ की तरह ऊपर उठी.    

कठपुतलियों के डॉक्टर ने छींकना आरम्भ किया, मगर वह अपने आप को रोक न सका और लगातार पचास, या कभी कभी सौ बार भी निरंतर छींकता ही रहा.

ऐसी असामान्य छींक ने उसे निर्बल कर दिया और वह दयालु बन गया.

प्येरो ने फुसफुसाकर बुरातिनो से चुपके से कहा:

“उसके साथ छींकों के बीच बात करने की कोशिश करो...”

“आप्-छी! आप्-छी!” कराबास बराबास ने खुले हुए मुंह से हवा भीतर खींची और एक धमाकेदार छींक ली, अपने सिर को हिलाते हुए और पैरों को पटकते हुए.

किचन में हर चीज़ हिल रही थी, कांच खडखडा रहे थे, खूंटियों पर टंगे पैन और भगौने हिल रहे थे.

इन छींकों के बीच बुरातिनो दयनीय और पतली आवाज़ में बिसूरने लगा:

“मैं बेचारा गरीब, अभागा, किसी को भी मुझ पर दया नहीं आती!”

“ये बिसूरना बंद कर!” कराबास बराबास चिल्लाया. “तुम मुझे डिस्टर्ब कर रहे हो... आप्-छी!”

“मेहेरबानी करें, सिन्योर,” बुरातिनो चहका.

“थैंक्स...और क्या – तेरे मां बाप ज़िंदा हैंआप्-छी!”

“मेरी तो कभी भी, कभी भी माँ नहीं थी, सिन्योर. आह, मैं बदनसीब!” और बुरातिनो इतनी ज़ोर से चीखा की कराबास बराबास के कानों में जैसे सुईयां चुभने लगीं.

वह अपने जूतों से धमधम कर रहा था.

 

“बिसूरना बंद कर, कह रहा हूँ तुझसे!... आप्-छी! और क्या – तेरा बाप ज़िंदा है?

“मेरे गरीब पापा अभी ज़िंदा हैं, सिन्योर.”

“कल्पना कर सकता हूँ, तेरे पापा को यह जानकर कैसा लगेगा, कि मैंने तुम्हारे ऊपर एक खरगोश और दो मुर्गियाँ तली हैं....आप-छी!”

“मेरे गरीब पापा भूख और ठण्ड से जल्दी ही मर जायेंगे. बुढापे में मैं उनका इकलौता सहारा हूँ. दया कीजिये, मुझे छोड़ दीजिये, सिन्योर.”

“दस हज़ार शैतान!” कराबास बराबास गरजा. “दया-वया की कोई बात ही नहीं हो सकती. खरगोश और मुर्गियों को भूने ही जाना है. भट्टी में रेंग जा.”

“मैं ऐसा नहीं कर सकता, सिन्योर.”

“क्यों?” करबास बरबास ने पूछ लिया, सिर्फ इसलिए की बुरातिनो बोलता रहे और कानों में न चीखे.

“सिन्योर, मैंने पहले भी एक बार भट्टी में नाक घुसाने की कोशिश की थी और सिर्फ छेद ही कर पाया.”

“क्या बकवास है!” कराबास बरबास चौंक गया, “तुम नाक से भट्टी में छेद कैसे कर सके?

“इसलिए, सिन्योर, की भट्टी और आग पर रखी केतली पुराने कैनवास के टुकडे पर पेंट किये गए थे.”

“आप-छी!” कराबास बराबास इतनी जीर से छींका कि प्येरो बाईँ तरफ़ उड़ा. अर्लेकिन – दाईं तरफ, और बुरातिनो लट्टू की तरह घूमने लगा.   

“तुमने कैनवास के टुकडे पर बनायी गयी भट्टी, और आग, और केतली कहाँ देखी?

“मेरे पापा कार्लो की कोठरी में.”

“तेरे पापा – कार्लो!” – कराबास बराबास कुर्सी से उछला, उसने हाथ हिलाए, उसकी दाढी उड़ रही थी. – “ तो, मतलब, बूढ़े कार्लो की कोठरी मैं है गुप्त...”

मगर अब काराबास बराबास ने, ज़ाहिर है, इस उद्देश्य से कि किसी गुप्त रहस्य के बारे में कुछ न बोल जाए, दोनों मुट्ठियों से अपना मुंह बंद कर लिया. और इसी तरह कुछ देर बैठा रहा, बुझती हुई आग की ओर आँखें फाड़े हुए देखता रहा.

“अच्छा,” उसने आखिर कहा, “ मैं आधा भुना खरगोश और कच्चे चूज़े खा लूंगा. मैं तुम्हें जीवनदान देता हूँ, बुरातिनो. इतना ही नहीं....”

उसने दाढ़ी के नीचे से जैकेट की जेब में हाथ डाला, सोने के पांच सिक्के निकाले और बुरातिनो की ओर बढ़ा दिए.

“इतना ही नहीं...ये पैसे ले और कार्लो के लिए ले जा. मेरा सलाम कहना, कि मैं उससे विनती करता हूँ, कि किसी भी हालत में भूख और ठण्ड से नहीं मरना और सबसे ख़ास बात – अपनी कोठरी छोड़ कर कहीं न जाए, जिसमें पुराने कैनवास के टुकड़े पर चित्रित भट्टी है. जा, आराम से सो जा और सुबह जल्दी घर भाग जा.”

बुरातिनो ने पाँच सोने के सिक्के जेब में रखे और नम्र अभिवादन से उत्तर दिया:

“धन्यवाद, सिन्योर. आपको पैसे देने के लिए मुझसे ज़्यादा विश्वसनीय हाथ नहीं मिलेंगे...”

अर्लेकिन और प्येरो बुरातिनो को गुड़ियों के शयनकक्ष में ले गए, जहां गुड़ियों ने फिर से बुरातिनो का आलिंगन करना, उसे चूमना, धक्के देनाचिकोटी काटना और फिर से गले लगाना शुरू कर दियाजो न जाने कैसे भट्टी की भयानक मौत से बचकर भाग आया था.

उसने फुसफुसाते हुए गुड़ियों से कहा:

“यहाँ कोई रहस्य है.”

रास्ते में बुरातिनो दो भिखारियों – बिल्ली बज़ीलियो और लोमड़ी अलीसा से मिलता है.  

सुबह-सुबह बुरातिनो पैसे गिनता है,  - सोने के सिक्के उतने थेजितनी हाथ में उंगलियां होती हैं, - पांच.

सोने के सिक्कों को मुट्ठी में दबाकर, वह छलांग लगाते हुए घर की और भागा और गाने लगा:

“खरीदूंगा पापा कार्लो के लिए नया जैकेटबहुत सारे खसखस के तिकोने, डंडियों पर लगे मुर्गे.”

जब गुड़ियों के थियेटर का तंबू और लहराते हुए झंडे आंखों से ओझल हो गए, तो उसने दो भिखारियों को देखाजो धूल भरे रास्ते पर सुस्ती से चल रहे थे: लोमड़ी अलीसा, जो तीन पंजों पर लड़खड़ाते हुए जा रही थी, और अंधी बिल्ली बज़ीलियो.  

ये वो बिल्ली नहीं थी, जिससे बुरातिनो कल रास्ते में मिला था, बल्कि दूसरी थी – ये भी बज़ीलियो थी और धारियोंवाली भी. बुरातिनो नज़दीक से गुज़र जाना चाहता था, मगर लोमड़ी अलीसा ने उससे प्यार से कहा:

“नमस्ते, भले बुरातिनो! जल्दी-जल्दी कहाँ जा रहे हो?

“घर, पापा कार्लो के पास.”

लोमड़ी ने और भी ज़्यादा प्यार से गहरी सांस ली:

“मैं नहीं जानती, कि तुम गरीब बेचारे कार्लो को ज़िंदा पाओगे या नहींभूख और ठण्ड से उसकी हालत बहुत खराब है...”

क्या तुमने यह देखा?” बुरातिनो ने मुट्ठी खोलकर सोने के पांच सिक्के दिखाए.

सिक्के देखकर लोमड़ी ने अनचाहे ही उनकी तरफ़ पंजा बढ़ा दियाऔर बिल्ले ने अचानक अपनी अंधी आँखें खोल दीं, और वे हरे फानूस की तरह चमक उठीं.   

मगर बुरातिनो का इस ओर ध्यान नहीं गया.

“भले, अच्छे बुरातिनो, तुम इन सिक्कों का क्या करोगे?

“पापा कार्लो के लिए जैकेट खरीदूंगा...नई वर्णमाला खरीदूंगा...”

“वर्णमाला, ओह, ओह!” लोमड़ी अलीसा ने सिर हिलाते हुए कहा“ ये पढ़ाई तुम्हारा कुछ भी भला नहीं करेगी...मैंने भी पढ़ा, पढ़ता रहा, और – देख -  तीन पंजों पर चल रहा हूँ.”

“वर्णमाला!” बिल्ला बज़ीलियो गुर्राया और गुस्से से अपनी मूंछों में फ़ुरफ़ुराया . “इस नासपीटी पढाई की वजह से मैंने अपनी आंख खो दी...”

रास्ते के निकट एक सूखी डाल पर अधेड़ कौआ बैठा था. सुन रहा था, सुन रहा था और उसने कांव-कांव किया.

“झूठ बोल रहे है, झूठ बोल रहे हैं!...”

बिल्ला बजीलियो फ़ौरन ऊंचे उछला, पंजे से कौए को गिरा दिया, उसकी आधी पूंछ खींच ली, - वह मुश्किल से उड़ पाया. और फिर से उसने दिखाया जैसे वह अंधा हो. 

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