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कॉमेडी शो के दौरान कठपुतलियाँ बुरातिनो को पहचान लेती
हैं
अनुवाद: आ. चारुमति रामदास
बुरातिनो
पहली पंक्ति में बैठ गया और उत्साह से गिरे हुए परदे को देखता रहा.
परदे पर
चित्रित थे नृत्य करते हुए लोग, काले नकाब पहनी गुडिया, सितारों वाले टोप पहने
डरावने दढ़ियल आदमी, नाक और आंखों वाला पैनकेक जैसा सूरज, और अन्य मनोरंजक चित्र.
तीन बार
घंटी बजाई गई, और परदा ऊपर उठा.
छोटे से
स्टेज पर दायें और बाएं पुट्ठे के पेड़ थे. उनके ऊपर चाँद के आकार का एक फ़ानूस लटक
रहा था और वह कांच के एक टुकड़े में परावर्तित हो रहा था, जिस पर रूई से बनाए गए,
सुनहरी नाक वाले दो हंस तैर रहे थे.
पुट्ठे के
पेड़ के पीछे से एक छोटा सा आदमी लम्बी आस्तीनों वाली, लम्बी कमीज़ में प्रकट हुआ.
उसके चेहरे
पर पाउडर पुती हुई थी, सफ़ेद, टूथ पाउडर जैसी.
उसने
सम्माननीय पब्लिक का झुक कर अभिवादन किया और दुःख से बोला:
“नमस्ते,
मेरा नाम प्येरो है...अब हम आपके सामने प्रस्तुत करने वाले हैं कॉमेडी ‘नीले बालों वाली लड़की, या खोपड़ी पर तैंतीस
झापड़’. मुझे छड़ी से मारेंगे, झापड़ लगायेंगे और खोपड़ी पर चपत मारेंगे. ये बहुत मज़ेदार
कॉमेडी है.
दूसरे पुट्ठे के पेड़ के पीछे से दूसरा आदमी उछल कर बाहर आया, पूरा चौखानों वाला, जैसे शतरंज का बोर्ड हो.
उसने झुककर सम्मानित पब्लिक का अभिवादन किया:
“नमस्ते , मैं अर्लेकिन (जोकर – अनु.) हूँ!
इसके बाद प्येरो की ओर मुड़ा और उसे दो झापड़ जड़ दिए, इतनी जोर से कि उसके गालों
से पाउडर झरने लगा.
“तू क्यों बिसूर रहा है, बेवकूफ़?”
“मैं दुखी हूँ, क्योंकि मैं शादी करना चाहता हूँ,” प्येरो ने जवाब दिया.
“और,
तूने शादी क्यों नहीं की?”
“क्योंकि मेरी मंगेतर मुझसे दूर भाग गई...”
“हा-हा-हा,”
अर्लेकिन हंसते हंसते लोट पोट हो गया, - “देखो इस मूरख को!...”
उसने डंडी उठाई और प्येरो पर जमा दी.
“तेरी मंगेतर का क्या नाम है?”
“तू फिर से झगड़ा तो नहीं करेगा?”
“अरे, नहीं,
मैंने तो अभी सिर्फ़ शुरुआत ही की है.”
“ठीक है,
तो,
उसका नाम है मल्वीना, या नीले बालों वाली लड़की.”
“हा-हा-हा!” अर्लेकिन फिर से लोटपोट होने लगा और उसने प्येरो की खोपड़ी पर
तीन झापड़ जड़ दिए. – “सुनिये, सम्माननीय दर्शकों...क्या नीले बालों वाली लड़कियां भी होती हैं?”
मगर तभी,
दर्शकों की तरफ़ मुड़कर उसने सामने वाली बेंच पर लकड़ी के बच्चे को देखा, जिसका मुंह कानों तक फैला था, नाक लम्बी थी, उसने फुंदने वाली टोपी पहनी
थी...
“देखिये,
ये बुरातिनो है!” – उसकी तरफ़ उंगली से इशारा करते हुए अर्लेकिन चिल्लाया.
“जीता-जागता बुरातिनो!” अपनी लम्बी आस्तीनें हिलाते हुए प्येरो चीखा.
कार्ड बोर्ड के पेड़ों के पीछे से बहुत सारी गुडिया उछलते हुए बाहर आईं –
काली नकाब पहने लड़कियां, टोपियां पहने डरावने दाढ़ी वाले, झबरीले कुत्ते जिनकी आंखों के स्थान पर बटन
थे,
खीरे जैसी नाक वाले कुबड़े...
वे सब मोमबत्तियों की ओर भागे, जो फ़ुटलाईट्स की तरफ़ थीं, और देखते हुए चिल्लाए:
“ये बुरातिनो है! ये बुरातिनो है! हमारे पास, हमारे पास आओ, खुशनुमा जोकर बुरातिनो!”
तब वह बेंच से प्रॉम्प्टर के बूथ पर उछला, और वहाँ
से स्टेज पर कूदा.
गुड़ियों ने उसे पकड़ लिया, उसे गले लगाने लगीं, चूमने
लगीं, चुटकियाँ काटने लगीं...फिर सभी गुड़ियों ने ‘पोल्का
बर्डी’ (पंछियों का पोल्का डांस – अनु.) गाना
शुरू किया:
पंछी
नाच रहा था पोल्का डांस
हरियाली
में सुबह सबेरे.
नाक
बाएं. पूंछ दाएँ , -
ये है
पोलिश करबास.
दो झींगुर हैं – ड्रम के ऊपर,
मेंढक फूंके डबल बास में.
नाक बाएं, पूंछ दाएं, -
ये है पोल्का बरबास.
पंछी नाच रहा है पोल्का,
क्योंकि वह है खुशी से भरा.
नाक बाएं, पूंछ दाएं, -
ऐसा था पोलेच्का नाच...
दर्शक भाव विभोर थे. एक आया तो आंसुओं में नहा गयी. एक आग बुझाने वाले की
आंखें तो रो रोकर लाल हो गईं.
सिर्फ पिछली बेंचों पर बैठे हुए लडके गुस्सा हो रहे थे और पैर थपथपा रहे थे:
“बहुत हो गई चूमा चाटी, छोटे नहीं हो, अपना ‘शो’
जारी रखो.”
ये सब शोर शरावा सुनकर स्टेज के पीछे से एक आदमी बाहर निकला, जो देखने में
इतना डरावना था, कि उसकी एक झलक देखकर ही आदमी
भय से पत्थर बन जाए.
घनी,
उलझी हुई दाढी फर्श तक लटक रही थी, बाहर
को निकली हुई आंखें गोल-गोल घूम रही थीं, बड़े भारी मुंह में दांत किटकिटा रहे थे, मानो वह आदमी नहीं, बल्कि कोई मगरमच्छ हो. उसके हाथ में सात पूँछों
वाला चाबुक था.
ये कठपुतली थियेटर का मालिक था, कठपुतली-विज्ञान का डॉक्टर सिन्योर कराबास बराबास.
“हां-हां-हां, हू-हू-हू!” वह बुरातिनो पर गरजा. – “तो, ये तूने मेरी ख़ूबसूरत कॉमेडी-शो को
बर्बाद किया है?”
उसने बुरातिनो को पकड़ा, थियेटर के गोदाम में ले गया और उसे कील पर टांग
दिया. वापस आकर गुड़ियों को सात पूँछों वाले चाबुक से धमकाया कि वे अपना शो जारी
रखें.
कठपुतलियों ने किसी तरह कॉमेडी-शो को पूरा किया, परदा बंद हो गया, दर्शक चले गए.
कठपुतली-विज्ञान का डॉक्टर सिन्योर कराबास बराबास किचन में खाना खाने के लिए
गया.
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